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विवादापद यों ह रियलिटी शो ?

Swatantra Vaartha  Thu, 4 Feb 2010, IST

विवादापद यों ह रियलिटी शो ?

जानीमानी शसियतों (सेलिबिटीज) के निजी जीवन में ताकझाक कर टीआरपी बढाने की अधी दाड विशेषकर पचिमी देशों बिटेन, अमेरिका, आटेलिया, यूरोप इयादि के टीवी चनलों के बीच देखी जाती रही ह, लेकिन ‘रियलिटी शो’ के नाम पर परोसे जा रहे कायकमों के जरिये चनलों ने अपनी टीआरपी बढाने का एक नया आर आसान राता ढूढ निकाला ह। हालाकि अमेरिका में १९४० में भी ‘कडिड कमरा’ नामक एक ऐसे रियलिटी शो की जानकारी मिलती ह, जिसमें एक छिपा कमरा अचानक किसी आम आदमी के घर में घुस जाता था, पर सही मायने में टीवी चनलों ारा अपनी टीआरपी बढाने के लिए रियलिटी शो का इतेमाल पिछले कुछ वषा] से ही यादा किया जा रहा ह।

इस तरह के कायकमों को लेकर अभी तक असर देखा यही गया ह कि इन कायकमों को नाम भले ही ‘रियलिटी शो’ दिया जाए पर ‘रियलिटी’ यानी वातविकता के धरातल से इनका दूरदूर तक कोइ लेनादेना नहीं रहा, बकि रियलिटी या गेम शो अब लगातार विवादों के तीक बनते जा रहे ह। कुछ हतों के लिए बनावटी घरों में रहकर ओछी हरकते करना, पीठ पीछे एकदूसरे के बारे में आपाजनक वय देना, परदे पर लाखोंकरोडों दशकों के सामने एकदूसरे को गदीगदी गालिया देना, एकदूसरे पर कीचड उछालना, इन शो में शामिल लडकियों ारा अթन अवथा में भारतीय सकति को शमसार कर देने वाली हरकतें करना या विभि डास शोज में जानबूझकर नाटकीय प से विवाद खडे कर उहें सि दिलाने की कोशिश करना, यही तो ह ‘रियलिटी शो।’

पिछले दिनों खूब धूमधडाके के साथ एक टीवी चनल पर परोसे गए ऐसे ही एक शो ‘राखी का वयवर’ के बारे में तो शु से ही यही धारणा थी कि ये शो महज दशकों को मूख बनाने का तमाशा ह आर आखिरकार हआ भी वही। इस शो के जरिये नइ पीढी के सबधों को सरेबाजार नीलाम करने का तमाशा हआ। इसमें सिवाय नाटकी के ऐसा कुछ नहीं था, जिससे समाज को कुछ अछा सदेश मिल सकता। ‘बिग बास३’, ‘पति, पनी आर वो’, ‘राहल दुहनिया ले जाएगा’ जसे रियलिटी शो भी समाज को या दे रहे ह, सब यह तमाशा देख ही रहे ह। समाज के सामने कडवे से कडवे सच को वीकार करने की हिमत दिखाने का दावा करते हए परोसे गए रियलिटी शो ‘सच का सामना’ ने तो हद ही कर दी थी, जिसने परिवारों में न केवल कलह आर वेिष का वातावरण पदा कर आपसी विवास की डोर तथा घरों को तोडने का काम किया, बकि इस शो की दो तिभागियों के पतियों ारा आमहया कर लेने जसी खबरे भी सामने आइ। कुछ अय रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाडी२’ तथा ‘इस जगल से मुझे बचाओ’ में तो सेलिबिटीज को ऐसीऐसी हरकतें करते दिखाया गया कि उन यों को देखकर दशकों को ऊबकाइ आने लगती थी। कीडे खाना, चूहे खाना, आइसकीम या अय खा पदाथ के भीतर माजूद विभि जीवों को चटखारे लेलेकर खा जाना, कीडों अथवा केंचुआें को मुह में भरभरकर दूसरे पा में अथवा अपने साथी के ऊपर उडेलना, आखिर ऐसी घिनानी हरकतों से दशकों का कान सा वथ मनोरजन हो रहा ह आर समाज को कान सा अछा सदेश मिल रहा ह ? सबसे बडा सच तो यही ह कि इन सभी रियलिटी शो में खासकर लडकिया चाहे कसे भी टट अथवा य करें, एक बात नोटिस की जा सकती ह कि उनकी डसेज इतनी छोटी आर सेसी होती ह कि विशेषकर पुष दशक उनके टट कम, उनके छोटे कपडों आर उनकी फिगर पर अधिक नजरें गडाये रहते ह।

रियलिटी शोज को पूण प से रियलिटी शो इसलिए भी नहीं माना जा सकता कि चनल इन शो के कुछ खास हिसों को अपने तरीके से सपादित कर इस तरह तुत करते ह, जिससे उहें दशकों को परोसने के लिए एक अलग तरह का मसाला मिल जाए। चाहे ‘बिग बदर’ हो या ‘बिग बास’, इनमें सेलिबिटीज कमरे के सामने जिस तरह का बताव करते दिखाइ दिए, या उनका निजी जीवन भी उसी तरह का ह ? बिकुल नहीं । परदे पर तिभागियों की नाटकीयता का अदाजा इसी से लगा लें कि ‘बिग बास२’ में भाग लेते हए राखी सावत ने अभिषेक बन से अपने यार का खुलकर इजहार किया था, किंतु शो से बाहर होते ही उसने इसे नकार दिया। इसी शो के कुछ अय तिभागियों ने भी माना था कि इस तरह के शो सिफ बनावटी भावुकता को ही दशाते ह आर चनल ऐसे शो में लाख कोशिशों के बाद भी सभी तिभागियों को नाटकीय अदाज नहीं दे सकते।

टीआरपी बढाने का नया फडा

‘रियलिटी शोज’ को चनलों की टीआरपी बढाने का नया फडा माना जाना गलत भी नहीं ह। इन रियलिटी शो के बारे लोगों की ाय यही धारणा रही ह कि इस तरह के कायकमों की कोइ किट नहीं होती अथात ये बिना किसी पटकथा के बनते ह, लेकिन ऐसे लगभग सभी शो में यादा से यादा पलिसिटी बटोरने के लिए जिस कार से एक ही तरह के घटनाकम देखे जाते रहे ह, उससे साफ पता चलता ह कि इन शो के लिए भी पहले से ही पटकथा तयार कर ली जाती ह आर यह तय हो जाता ह कि कसे इनमें बीचबीच में किसी न किसी तरह का विवाद छेडकर उसके सहारे इहें अधिकाधिक पापुलर बनाया जाए आर उसके जरिये चनल की टीआरपी बढाइ जा सके। विदेशों में इन शो में विवादों के मुकाबले भले ही लोकयिता की अहमियत यादा नजर आती ह, लेकिन भारत में इसका उटा ह, पर एक बात सब जगह कामन ह कि इनमें सफलता पाने के लिए जिस तरह की तिकडमों या विवादों का सहारा लिया जाता रहा ह, उससे यही आभास होता ह कि यह सब चनलों की पूव निधारित योजना का अहम हिसा होता ह। हमारे यहा चूकि अभी टीवी चनलों का शशव काल ही ह, शायद इसीलिए चाहे ‘बिग बास’ जसे अधपके रियलिटी शो हों या ‘कान बनेगा करोडपति’ जसे विदेशी नकल पर अधारित गेम शो अथवा ऐसे ही कुछ अय कायकम, ये एक बार तो बहत जद लोकयिता के शिखर को छू ही जाते ह।

रियलिटी शो में भाग लेने वाली सेलिबिटीज ारा एकदूसरे पर की जाने वाली छींटाकशी के चलते ऐसे लगभग सभी रियलिटी शोज को लेकर एक बहस छिड गइ ह। यहा सबसे अहम सवाल यह उठ खडा होता ह कि अगर इस तरह के शो में भाग लेने वाले कलाकारों को लगता ह कि शो के दारान उनकी बेइाती हो रही ह, तो यों नहीं वे उसी समय शो को छोडने का साहस दिखाते ? दरअसल शो में भाग लेने के लिए उहें पहले ही इतनी बडी रकम थमा दी जाती ह कि उस मोटे काटट के चलते उनके लिए अपने आप शो छोडकर चले जाना सभव ही नहीं होता।

ऐसे शो में भाग लेने पर सेलिबिटीज को मिलने वाले मेहनताने से बडी रकम उस इनाम की होती ह, जो जीतने वाले तिभागी को मिलना होता ह। बिटिश रियलिटी शो ‘बिग बदर’ के सबध में यह हरतअगेज तय सामने आया था कि उसमें भाग लेने के लिए ही तीन करोड का मेहनताना दिया गया था, जबकि इनाम की राशि थी, सिफ ८० लाख पये। सीधा सा मतलब ह कि चनल शो में भाग लेने के लिए ही तीन करोड की रकम दे रहा था, तो शु से ही उसका मकसद इन सेलिबिटीज के जरिये कोइ न कोइ बखेडा खडा कर शो को शोहरत की बुलदियों पर पहचाना जरी रहा होगा आर इसके लिए तिभागियों को बाकायदा इस तरह के निर्देश भी दिए गए होंगे कि वो एकदूसरे के साथ या अकेले में इस तरह की हरकतें करें, जिहें देखकर दशकों में उाेजना पदा हो।

बिटिश रियलिटी शो ‘बिग बदर’ में शिपा की जीत को भले ही बहत से लोगों ने तब भारत की जीत के प में देखा हो, पर वातव में सच यही था कि शिपा ने न तो अपनी तिभा का दशन करते हए शो में जीत हासिल की थी आर न ही इस कायकम में वह अधिकारिक तार पर भारत का तिनिधिव कर रही थी, बकि तीन करोड पये की मोटी रकम का लालच उसे वहा खींच ले गया था, इसलिए शिपा को मिले खिताब से भारत का नाम रोशन होने जसी बातें करना बचकाना ही लगा था। शिपा शो में यदि विदेशी अभिनेी जड गुडी (अब दिवगत) ारा की गइ नलवादी टिपणी की वजह से आसू नहीं बहाती आर यह मामला भारत के साथसाथ बिटेन के साा गलियारों में भी नहीं गूजता तो शायद शिपा को वहा के दशक कभी का शो से बाहर का राता दिखा चुके होते। इसलिए शिपा को मिले इनाम को अगर उसकी बेइाती का इनाम कहा जाए तो कोइ अतिशयो न होगी।

या शिपा को पता नहीं था कि इस तरह के रियलिटी शो में होता या ह आर यों उसे सिफ शो में भाग लेने के लिए ही तीन करोड की रकम दी गइ थी ? पचिमी देशों में बहत खुलापन ह आर नलीय भेदभाव की घटनाए आम बात ह, पर शिपा का बालीवुड में बुरा दार चल रहा था आर वसे भी शो में भाग लेने पर ही उसे तीन करोड पये मिल रहे थे, जबकि कइ फिमें करके भी शिपा इतना नहीं कमा सकती थी, शायद इसीलिए उसने सब कुछ जानतेबूझते हए भी ‘बिग बदर’ में भाग लेने के ताव को झट से वीकार लिया था। एक बिटिश महिला के हाथों अपमानित होकर शिपा ने जो शोहरत आर लोकयिता पाइ, वसी सफलता की शायद उसने कपना तक नहीं होगी। हालाकि शिपा किसी विदेशी रियलिटी शो की पहली भारतीय सेलिबिटी होने के साथसाथ पहली भारतीय विजेता भी रही, लेकिन बेइाती की कीमत पर मिले उस इनाम की बदालत लोकयिता हासिल कर शिपा अतराीय टार बन गइ तो इसमें एक आम भारतीय के लिए गव करने जसी कोइ बात नहीं ह। शिपा को नलीय आधार पर हइ अपनी बेइाती इतनी ही बुरी लगी थी, तो यों आसू बहाने के बाद भारत सहित विदेशी मीडिया आर दोनों देशों तक की ससद तक में इसे विवाद के तूल पकडने पर एकाएक उसका नजरिया बदल गया था आर उसने बयान दे डाला था कि उसे नहीं लगता कि उसके साथ किसी तरह का नलीय भेदभाव हआ?

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