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कुछ आदतें, िजनसे दूरी अछी

swatantravarha  Wed, 23 Dec 2009, IST

कुछ आदतें, िजनसे दूरी अछी

आदतें तो इसान के जीवन में रची बसी ह, पर कुछ आदतें इसान को उ श्रेणी में ला खडा करती ह आर कुछ आदतें ऐसी होती ह, जो दूसरों को नुकसान देती ह या चिडचिडा भी बना देती ह। आइए देखें आपमें कसी आदतें ह। यदि कुछ ऐसी आदतें ह, तो इनसे ताबा करना ही अछा

* अपना काम टालते रहना अछी आदत नहीं ह। जब तक आप अपना काम पूरा नहीं करेंगे, तब तक आप एक अजीब से तनाव में जीते रहेंगे। अछा ह काम टालने की आदत को बदल डालिए आर तनावमु जीवन जीए।

* कइ लोगों में यह आदत होती ह कि माके बेमाके दूसरों की टाग खींचते रहते ह। कभीकभी इस आदत से अछी दोती से हाथ धोना पड सकता ह आर कभी माका लगने पर दूसरा भी आपकी टाग खींच सकता ।

* दूसरों की बातों पर जद ही विवास न करे, न ही उनकी बातों में आकर बिना विचार किए कुछ फसला कर बठें। सलाह लें पर उस पर विचार अवय करें।

* चापलूसी की आदत भी बदल डालें। पीठ पीछे चापलूसी करने वालों का मजाक उडता ह।

* अपने वाथ को पूरा करने के लिए किसी से नजदीकी बढाने का यास न करें।

* जब भी किसी से बोलें, सोच समझ कर बोलें चाहे आपसे दूसरा छोटा हो या बडा।

* समय बलवान ह। इसके महव को जानें आर समय बबाद न करे अपने उेय को पाने का यास करें।

* यदि आप महिला ह, तो महिला होने का लाभ न उठाए। कभीकभी यह लाभ महगा भी पड सकता ह।

* सबसे मिवत यवहार बनाए रखें। किसी से यवहार में खींचातानी मत रखें। मधुर सबध रितों को सजीव व जीवित रखते ह।

* समय पर दतर जाए। बिना किसी विशेष आवयकता के लघु अवकाश न ले। जब वातव में जरत हो, तो अपने बास को समय पर सूचित करें।

* आफिस में काम को हसी खुशी से निबटाए। कुछ समझ नहीं आ रहा तो नवस न होकर अपने सीनियर से मदद मागे। काम सीखने में कोइ बुराइ नहीं।

* दूसरों की निंदा करते हए समय बबाद न करें। परनिदा कभीकभी झगडे का कारण भी बन सकती ह।

* काम करते समय एकागचित होकर काम करें, फालतू इधरउधर यान को न भटकाए।

* अपने पर जरत से यादा भरोसा न करें। यह सच ह कि कभीकभी ओवरकाफीडेंस नुसान भी पहचाता ह।

* आगे बढने के लिए कभी झूठ का सहारा न लें। झूठ पकडे जाने पर शमिदगी उठानी पड सकती ह।

* अपने कामों के लिए दूसरों पर निभर न हों, न ही दूसरों से अधिक आशा रखें। उमीद पूरी न होने पर निराशा हाथ लगती ह। जितना वय कर सकें, उतना ही करें।

* दूसरों से बात करते समय सकोच न करें। अपनी बात यारपूवक दूसरों को समझाए। उन पर अपना आदेश या इछा न लादें।

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