सकोचबालक का िवकास रोक देता है
शम की अनुपिथितय की सामाजिक चेतना को क्षतिगत कर देती ह परतु इसका आधिय विकत यवि को जम देता ह जो मानसिक विकित का प धारण कर लेता है।
शर्मीलापन सवेगामक तनाव आर मानसिक असतुलन की थिति उप करता ह जो य को असामाय बना देता ह। इसके कारण शर्मीले यवि का य अपनी जमजात क्षमताआें जसेबु एव विशि गुणों का सही उपयोग अपने उेय की ा में नहीं कर पाता ह। वह आमकुठित होकर सामाजिक माहाल से दूर एक नये वातावरण में रहने लगता ह जहा वह आनद के किसी भी साधन का सही उपयोग नहीं कर पाता।
शर्मीलेपन की ारभिक अवथा में अभिभावक बहत सतोष की अनुभूति करते ह पर जहा वह मि मडली को छोडकर अपने आपमें लीन रहने लगता ह, वहा अभिभावक को सतक होने की आवयकता होती ।
बाहरी जगत से सबधविछेद के बाद शर्मीला य कुठा पालते हए शारीरिक एव मानसिक रोगों से गत होने लगता ह। उसका शारीरिक रोग भी मुयतया मनोदहिक होता हजसे दय की बीमारी , उ रचाप, वास रोग, मोटापा, आदि। इन याधियों के लक्षण तो शारीरिक रहते ह कितु कारण मानसिक। वह य यावहारिक जीवन में सघष का योता देने वाला, अतमुखी, अधविवासी, असुरक्षित किंतु मुखापेक्षी एव असतुलित रहता ।
शर्मीलेपन का विकास दोषपूण पालनपोषण के कारण होता ह,जिसके लिए मातापिता एव परिवार अधिक उारदायी होते ह। ाय लोग बों को नासमझ समझते ह तथा उनके साथ कोइ भी पारपरिक दोषपूण यवहार करने से नहीं चूकते ह जबकि बों में भाव एव सवेग को समझने की क्षमता जमजात होती ह जिसके कारण वह आपकी भाषा न समझते हए भी अभिय को अछी तरह समझता ।
आप अपने यावहारिक जीवन में ाय देखते ह कि जब सदय आपस में झगडा करते ह या अशात माहाल कायम करते ह तो छोटा बा पूण शात होकर उसका निरीक्षण करता ह तथा अपने सारे सवेगों को रोक लेता ह। पारिवारिक अशात माहाल तथा उसके ति उपेक्षा अथवा अय निषेधामक यवहार बों में कुठा एव शर्मीलापन पदा कर देता ।
सुखद पारिवारिक माहाल ारा इस थिति से मु पाकर यवि का समुचित विकास किया जा सकता ह। सामाजिक सपक को बढाकर शर्मीले य के निषेधामक काेिण को बदला जा सकता ह। उसे विभि कार की तियोगिताआें , सामाजिक उसवों, कीडा, पयटन, साकतिक एव धामिक काया] में भागीदारी के लिए ाेसाहित एव ेषित कर जीवन में आनद के महव को समझने का अवसर देना चािहए।
अययनों में ऐसा देखा गया ह कि अपने आयु के ययाेिं के साथ का सामाजिक सपक अधिक आयु के ययाेिं की अपेक्षा अधिक लाभदायक होता ह, जसे अभिभावक के साथ घूमना, साथियों के साथ घूमने की अपेक्षा अधिक ककर होता ह योंकि अभिभावक का तिबध वाभाविक प में वहा भी कायम रहता ह जबिक माेिं के साथ उसकी अभिय वत रहती ।
शर्मीलेपन को दूर करने में मानसिक एव शारीरिक यतता भी सहायक होती ह योंकि काम का अभाव तनाव का धान कारण होता ह। मानसिक तनाव को कम करने में पालतू जानवर एव बागवानी में चि महवपूण सहयोग देती ह। इन काया] में असतुलित य को मानसिक सतोष, आमेरणा, आमपहचान , आनद वतता एव आमनिभरता की अनुभूति होती ह, जिसके कारण उसे तनाव से मु मिलती ।
शर्मीलापन दूर करने की तमाम कोशिशें तभी सफल होंगी जब य आमेरित होकर किसी यु या काययोजना के मायम से काय करे आर उसे वीकार करे। जरत पडने पर मनोचिकिसक से सहयोग भी लिया जा सकता ह। जिस य में आमविकास की श होती ह वह शमीलेपन जसी वा से शीघता से मु पा सकता ह आर जीवन में सफल इसान ब सकता ।
