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नये नहीं है राजनेताआें के सेक्स सकनडल

Swatantra Vaartha  Thu, 28 Jan 2010, IST

नये नहीं है राजनेताआें के सेक्स सकनडल

िपछले िदनों आध प्रदेश के रायपाल को सेक्स सकडल के मामले में फस कर राजभवन आर अपने राजनितक जीवन को अलिवदा कहना पडा। पर राजनेताआें के सेकस कडल कोइ नइ बात नहीं है । फास के बहचित चरापति निकोलस सरकोजी साफ सरकार आर मूय आधारित राजनीित के वायदों के साथ चुनाव जीते थे। पर आज उनके आर उनके ममिडल के सहयोगियों के रगीले जीवन के िकसे पेिरस की गलियों में चचाएआम बन चुके है । उनके ममिडली सहयोगी फडरिक माि ने खुलेआम वीकारा ह कि वे थाइलड के वेयालयों में पसे देकर नाजवान लडकों के साथ सेस करते रहे है । यह अलग बात ह कि फास आर थाइलड दोनों ही सेस पयटन को हतोसाहित करने का यास कर रहे ह। इटली के धानमी सिवियो बलुकोनी के सेस कारनामों से जनता इतनी आजिज आ गइ कि उनकी सरेआम पिटाइ कर दी गयी। उहें बमुकिल लहूलुहान हालत में भीड से बचाया गया। बहत दिन नहीं बीते जब अमेरिका के हाइट हाउस में अमेरिका के तकालीन रापति बिल लिटन को मोनिका लेवाकी के रहयोदघाटन के बाद अपने अवध सेस सबधों को वीकारने पर मजबूर होना पडा था।

देश की राजधानी दीि आर ातों की राजधानियों में राजनीति के उतरीय सामाजिक दायरों में ‘हाइलास कालगल’ भेजने का काम आाेगिक घराने जमाने से करते आ रहे ह। ऐसी कुछ महिलाए तो इतनी बेखाफ होती ह कि अपने सबधों को खुलेआम वीकारने में सकोच नहीं करतीं। हरियाणा के पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठार का किसा अभी चचा में चल ही रहा है । शासनिक सेवाआें में महवपूण पदों पर बठने वाले अधिकारी ाय लोगों को नाकरी या फायदे देने के एवज में अपनी वासनाआें की पूति करते रहते ह। कभीकभी ऐसे किसे चचा में भी आ जाते है ।

हर धम के मठाधीशों के साये तले सेस के गुमनाम कारोबार पर भी दुनिया भर का मीडिया बीचबीच में रहयोदघाटन करता रहता है । फिम जगत मे व उाेग जगत में तो इसे आम बात माना जाता है । शायनी आहूजा तो सूली चढ गया, पर उसके जसे कितने शायनी मुबइ में रोज यही जिंदगी जीते है । शक्षिक सथानों आर वज्ञानिक योगशालाआें में छाछााआें व शोधकताआें के शारीरिक शोषण के किसे काफी आम होते ह। कुल मिलाकर नाजायज सेस सबध कोइ ऐसी अनहोनी घटना नहीं, जो कभीकभी दुघटना के प में घटती हो। यह कम इतना यापक है कि अगर सारी घटनाए काश में आयें तो मीडिया में सेस कडलों को उछालने के अलावा कुछ बचेगा ही नहीं। गनीमत है कि ऐसी घटनाए कभीकभी काश मे आती ह। अगर सामाजिक सर्वेक्षण करने वालों की मानें तो दस फीसदी घटनाए भी कशित नहीं होतीं। ऐसे में या माना जाए कि जो पकडा गया वही अपराधी ह या जो पकडा गया वो बदकिमत है ?

पिछले दिनों मने पुराने टीवी सीरियल चाणय के ४७ एपिसोड तमयता से बठकर देखे। इस सीरियल में इसा से ३०० वष पूव के राजनतिक भारत का काफी सटीक दशन कराया गया है । उस समय भी साा के दायरों में आर धनिकों के समाज में वेयाआें आर नतकियों के उपभोग का चलन आम था। यह बात उन हजारों गथों में भी दज है , जिहें समयसमय पर समकालीन इतिहासकारों ने दज किया। बाबर की आमकथा ‘बाबरनामा’ में तो खुद बादशाह बाबर इस बात का दुख कट करता ह कि हिदुतान में उसे खूबसूरत लाडे दिखाइ नहीं देते, इसलिए उसे गजनी के लाडों की याद सताती है ।

भारत के धमगथों में विशेषकर महाभारत जसे पुराणों मे जिस तरह के सामाजिक जीवन का वणन है , उसमें भी ऐसा नहीं लगता िक सेस के सबधों को लेकर नतिकता के नियम बहत कडे रहे हों। सकत के वािनों का तो यहा तक कहना रहा ह कि क्षीय आचरण करने वाले को यदि कामवासना की पूति न हो, तो शासन करना आर अपने दिमाग का सतुलन बनाये रखना सरल न होगा। इसीलिए पुराने जमाने के राजाआें की बहपनियों की था को सहजता से वीकारा जाता है ।

ऐसे में यह न उठना वाभाविक है कि राजनेताआें या शासनिक पदों पर बठे महवपूण ययाेिं का निजी जीवन या पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए ? या इसे नतिकता के सर्वो मानदडों पर खरा उतरना चाहिए ? अगर हा, तो या ऐसे शु आचरण वाले लोग थोक में ढूढे जा सकेंगे आर या यह सभव होगा कि साा के शिखर पर केवल वही बठें जो अपना आचरण सि कर सकें ? न यह भी उठाया जाता ह कि शासन चलाने वाले का काम देखना चाहिए, उसके काम का परिणाम देखना चाहिए, कितु उसकी निजी जिदगी में ताक झाक करने का हक किसी को भी नहीं मिलना चाहिए, चाहे वह मीडिया ही यों न हो। यहा यह बात भी रखी जाती ह कि यदि ऐसा य अपनी कामवासना की पूति के लिए अपने पद का दुपयोग करता है , तो उसे अपराध की श्रेणी में माना जाना चाहिए। पर यह बहस शावत है । इसका कोइ समाधान नहीं। जबजब राजपुषों के सेस कडल सामने आते है , ऐसी चचाए जोर पकड लेती है । फिर समाज में वही सब चलता रहता ह आर कोइ कुछ नहीं कहता।

विनीत नारायण


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