बिहार विधान सभा की 18 सीटों के लिए उपचुनाव की तारीखें जैसे-जैसे निकट आ रही हैं, पक्ष-विपक्ष के प्रमुख गठबंधनों के स्टार प्रचारक जनता से संपर्क और संवाद कायम करने उनके बीच पहुंचने लगे हैं। हालांकि इस उपचुनाव से किसी खास राजनीतिक बदलाव की अपेक्षा नहीं है, लेकिन नेताओं के लिए अपना-अपना तिमाही रिपोर्ट कार्ड पेश करने का यह एक अवसर तो बन ही गया है। राज्य में सत्तारूढ़ राजग के प्रचार की अगुवाई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद शरद यादव कर रहे हैं, तो राजद-लोजपा के प्रचार की ताकत इन दलों के अध्यक्ष क्रमश: पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद और रामविलास पासवान के नेतृत्व में निहित है। कांग्रेस इस चुनाव में भी तीसरा कोण है। लोकसभा चुनाव के चंद महीने बाद होने वाले इस शक्तिपरीक्षण में विपक्ष के पास मतदाताओं को बताने के लिए सरकार के कामकाज का ऐसा कोई स्याह पहलू नहीं है, जिसे गंभीरता से लिया जा सके।
विपक्ष बिना किसी प्रामाणिक आंकड़े के आरोप लगा रहा है कि वर्तमान शासन में अपराध व भ्रष्टाचार चरम पर है। उसने मंत्रियों से लेकर अधिकारियों तक की सम्पत्ति की जांच कराने की मांग की है, लेकिन सरकार के इस सवाल का उसके पास कोई जवाब नहीं है कि भ्रष्ट लोगों की सम्पत्ति जब्त करने के लिए कानून में संशोधन करने का जो विधेयक बिहार विधान मंडल ने पारित कर केंद्र के पास भेजा है, उसकी मंजूरी में देर क्यों की जा रही है? राजधानी पटना समेत राज्य के प्रमुख शहरों में अब दुकानें देर रात तक खुली रहने लगी हैं, लेकिन विपक्ष के कुछ नेता यदि कह रहे हैं कि महिलाओं व बच्चों का घरों से निकलना खतरे से खाली नहीं रह गया है, तो इस पर कोई कितना यकीन करेगा? जो लोग राज्य में विपक्ष और केंद्र में सत्तारूढ़ दल की भूमिका निभा रहे हैं, उन्हें ऐसे सवालों का जवाब देना पड़ सकता है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास केंद्र की ओर से राज्यहित की उपेक्षा से लेकर विकास के एजेंडे तक, कहने को बहुत कुछ है। उन्हें प्रदेश को विकास की पटरी पर लाने की दिशा में किए गए बेहतरीन प्रदर्शन के लिए जो बिजनेस रिफार्मर आफ द ईयर अवार्ड देने के लिए चुना गया है, उसकी चयन समिति की राय थी कि बिहार में सुधार कार्यक्रम चलाना एक बड़ा कार्य है। ऐसी भरोसेमंद टिप्पणी राजग के चुनावी उपयोग की सिद्ध हो सकती है। वैसे, दोनों पक्ष रोड-शो से जनता का दिल जीतने में लगे हैं।
[स्थानीय संपादकीय: बिहार ]
