जंपी
एक जंगल में एक खरगोश रहता था। उसका नाम क्या था पता है ? उसका नाम था जंपी। क्योंकि वो हमेशा कुदता रहता था टण टणा टण। हमेशा यहांवहां द़ौडता था। अपने दोस्तों के साथ लुकाछिपी खेलता था, द़ौड लगाता। जंपी देखने में बहुत ही प्यारा था। उसकी आंखें लाल रंग की थी। उसका बदन एकदम सफेद और मलमल जैसा मुलायम था। उसे साफसफाई बहुत पसंद थी। हर रोज वो घर के पास वाले टिले में जाकर स्नान करता था और फिर उसके बाद ही अपनी मां के पास जाकर कहता था, ‘मां, मैंने मेरे दांत साफ किये हैं और मैंने स्नान भी कर लिया है। अब मैं प्यारा दिखता हूं ना। अब मुझे भूख लगी है। मुझे खाना दे दो।’
फिर जंपी की मां उसे टिले के पासवाली हरीहरी घांस और लाल रंग की मिठीमिठी गांजरें देती थी। खाना खाने के बाद वो अपने दोस्तों के साथ खेलने के लिये जाता था।
एक दिन वो अपने दोस्तों के साथ लुकाछिपी खेलतेखेलते बहुत थक गया और एक ब़डे प़ेड के निचे घांस पे बैठ गया। ठंडी हवा के झोंके से वहीं पे सो गया। उसके दोस्तों ने उसे बहुत बार आवाज दी, लेकिन नींद में उसे कुछ भी नहीं सुनाई दिया। उसके दोस्त भी उसे ढ़ूंढतेढ़ूंढते थक गये और सोचने लगे अभी हम क्या करेंगे ? जंपी कहां चला गया ? उसे कैसे ढ़ूंढेंगे हम ?
बहुत देर हो गयी। जंपी का कुछ अतापता नहीं था। धीरेधीरे अंधेरा होने लगा। फिर थके हुए सारे दोस्त एक प़ेड के निचे बैठ गये। इतने में जंपी की मां और सारे खरगोश दोस्तों की मांएं उनको घर बुलाने के लिए वहां आ गईं। फिर सब ने जंपी की मां को बताया कि वो नहीं मिल रहा है। जंपी की मां को उसकी ब़डी ही फिक्र होने लगी। अब क्या करूं ? उसको कुछ भी सूूझ नहीं रहा था। उसकी आंखों के सामने जंपी का प्यारा चेहरा नजर आ रहा था। उसने मन ही मन में भगवान से प्रार्थना की मेरे बच्चे को सहीसलामत रखो भगवान।
और वहां जंपी की नींद पूरी हो गयी। वो उठ के बैठ गया। उस वक्त चारो ओर अंधेरा होने लगा था। जंपी पहले तो एक मिनट के लिए डर गया। मेरी मां कहां है ? मेरे सारे दोस्त कहां हैं ? लेकिन फिर उसने निश्चय किया कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं नहीं डरूंगा, और घर में मां के पास जाऊंगा या फिर अपने दोस्तों को ढ़ूंढूंगा।
उसने अपने हाथ में एक सफेद रंग की पेंसिल ली और रास्ते में हर प़ेड पर दिशा के बाण निकाले। एक बार वो फिर से घूमकर उसी प़ेड के पास आ गया। लेकिन उसके निकाले हुए बाण से उसे पता चला कि दूसरे रास्ते से जाने पर उसे बराबर रास्ता मिल जाएगा। और इस तरह से वो अपने दोस्तों के पास पहुंच गया। उसी प़ेड के नीचे उसके सारे दोस्त उनकी मांएं और खुद जंपी की मां भी थी। मां ने जंपी को गले से लगाया और सभी को बहुत खुशी हुई। फिर जंपी ने सबको क्याक्या और कैसेकैसे हुआ वो बताया।
तब तक तो रात हो गयी थी। बहुत घना अंधेरा छा गया था। सब दोस्त बायबाय करके अपनेअपने घर चले गये और अपना जंपी भी कूदतेकूदते मां के साथ घर चला गया
