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कोई अगर दो बहनों को पिरभािषत करना चाहे तो?

swatantravartha  Sun, 3 Jan 2010, IST

कोई अगर दो बहनों को पिरभािषत करना चाहे तो?

शायद गुथी सबसे यादा सुलझी हइ होगी। कहने को यह मामला सहज दो आरतों के बीच का ह, लेकिन इस ‘बीच’ में अनगिनत भावनाए आर एहसास तरते रहते ह। बहनें आपस में िजतनी घुटी दोती रखती ह उतना भावनामक तर पर एक होना भाइयों में कम दिखता ह। दो िबलकुल ि वपरीत भी असल में मन से गहरा जुडाव रखती ह। यही कारणहै िक यह िरता कुछ खासहै ।

रोली (२३) की हाल ही में शादी हइ ह। उनकी शादी में खरीददारी से लेकर वेलरी तथा डेस का सिलेशन, पालर की बुकिग, पार्टी का आयोजन आदि सब कुछ रोली की छोटी बहन निमिशा ने किया। हसते हए रोली कहती ह‘कहने को म निमिशा से ६ साल बडी ह आर आज तक उसने मुझसे जिद करके चीजें मागने, अपनी बात मनवाने तथा नखरे दिखाने के अलावा कुछ नहीं िकया।

यह भी सच ह कि अपनी उस नही बहन को लाड करने में मुझे भी बहत मजा आता ह, लेकिन मेरी शादी तय होते ही वो एकदम से बदल गइ। जिस नही गुडिया की साजसभाल आज तक मने की थी, वो अचानक मेरी दादी मा बन गइ। पूरी शादी के दारान मेरे खानेपीने, आराम करनेे से लेकर म या आर कब पहनूगी, मेरे ससुराल में किसको या गिट जाएगा बाप रे। उसने सब कुछ इतनी जिमेदारी आर कुशलता से किया कि हम सब हरान हो गए।

मेरे ससुराल वालों का तो उसने मन जीत लिया। मुझे असर इस बात को लेकर टशन होती थी कि मेरी शादी के बाद पापाममी की देखभाल कान करेगा? हमारा तो कोइ भाइ भी नहीं ह। फिर निमिशा तो खुद का ही काम पूरा नहीं कर पातीं आर दुनियादारी से तो बिलकुल ही बेखबर हलेकिन उसने इतनी सहजता से सब सभाल लिया कि या कह। मुझे सच मे अपनी बहन पर गव ।’

५४ वर्षीय चकािजी कहती ह‘सारे भाइबहनों में सबसे यादा मूडी आर कपनालोक में जीने वाली म रही ह। असर यह होता था कि बाजार में शापिंग करते समय म कोइ डेस पसद कर खरीद लेती, लेकिन घर आते ही मुझे बडी बहन की लाइ हइ डेस अछी लगने लगती आर अपनी खराब। म जसे ही यह बात कहती, बहन उतनी ही सहजता से खुशीखुशी अपनी डेस मुझे दे देती, बकि कइ बार तो दोनों डेस वो मेरे ही हवाले कर देती। आज भी म शापिंग को जाती ह तो अपने लिए पसद करके साडी लाती ह आर फिर मुझे बहन ारा ली गइ साडी यादा अछी लगने लगती ह आर आज भी बहन खुशी से मुझे अपनी साडी साप देती ह। म बचपन से जानती ह कि बहन को यवथित रहना पसद ह आर मुझे यह बिलकुल नहीं आता। मने हमेशा उसके कपडे उसका सामान पूरे अधिकार से उपयोग किया आर कभी यवथित वापस नहीं दिया, इसके बावजूद उसने आज तक उसकी शिकायत नहीं की। जबकि कोइ आर ऐसा करता तो उसकी शामत आ जाती।’

बहनों का यह रिता उतना ही कठिन ह जितना सरल। दो भाइयों की घनि मिता की तरह ही दो बहनों की भी मिता होती ह, लेकिन पुष आर महिला के भावनामक तर पर यह अलग ह। दो भाइ असर उस तरह भावनाए कट नहीं कर पाते जिस तरह दो बहनें आपस में कर देती ।

किसी कायकम के लिए डेेेस का चयन हो या किसी पोशाक को देखकर उसाह कट करना हो, बहनें असर ऐसे समय में खुलकर भावनाए कट करती ह। समय पडने पर वे वथ तिۧी भी ह, एकदूसरे की आलोचक भी आर गहरी दोत भीइन सबके बावजूद दिल से वे सिफ दो महिलाए ह जिहें अपनी भावनाए एकदूसरे को समझानेे की जत नहीं पडती। वे बिना कहे, बिना इशारा किए एकदूजे का मन पढ लेती ह। इसलिए बहनों का ये रिता इतना अलग आर इतना अनोखा ।

सेिलिबटी सिटस

बात चाहे सुरों की धनी मगेशकर बहनों की करें, टेनिस जगत की हलचल विलियस बहनों की, मलाइकाअमता अरोडा या करिमाकरीना की, सब में एक खास बाडिग आपको नजर आएगी। चाहे लमर जगत के ये सितारे निरी चकाचाध में घिरे रहते हों, लेकिन दो बहनों की आपसी मिता का भाव यहा भी बिलकुल आम मनुयों कासा ही ह। करिमा कपूर अगर करीना के लिए फेंडफिलासफर गाइड ह, तो करिमा की बेटी समायरा करीना के लिए इवर की सबसे अनमोल भेंटहै ।

मगेशकर बहनों ने तो अपने सघष के दिनों से आज तक अपनी एकता कायम रखी ह। यहा तक कि आशाजी आर लताजी के ाेफेशनल रितों के बारे में भी कितनी ही बातें की गइ हों, आज भी आशाजी के मन में अपनी बडी बहन के लिए अथाह आदर ह आर लताजी भी उहें मा समान ेम ही देती ।

शायद यही वह बधन ह, जो इन दोनों बहनों को सबसे अलग बनाता ह। विव में अपने ताकतवर टेनिस शाटस के लिए यात विलियस बहनों के बीच की बाडिग भी कुछ ऐसी ही ह। दोनों जितना हो सके एकदूसरे के साथ रहना पसद करती ह। इन दोनों के बीच ेम का एक बडा ही यारा सा उदाहरण ह। ऐसा कइ बार हआ ह कि टेनिस कोट पर दोनों बहनेेंं एकदूसरे के खिलाफ भी उतरी ह आर इन मुकाबलों में छोटी बहन सेरेना ने यादा बार बाजी मारी ह। ऐसे ही एक मच के दारान जब बाजी बडी बहन ने मारी, तो उहोंने खेल होने के बाद अपनी बहन को गले लगाते हए कहा‘आय लव यू’। जबकि तिۧी खिलाडी ऐसे समय में अधिकाधत: ‘बहत अछा खेले’,‘इट वाज आ लोज गेम’ या फिर ‘धयवाद’ जसे शदों का सहारा लेते ।

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