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मिहला बनी सफलता पर्याया

swatantravarth  Sun, 3 Jan 2010, IST

मिहला बनी सफलता पर्याया

वतमान परेिय में महिला को यदि सफलता का पयाय कहा जाए तो यह अतिशयो नहीं होगी। आज भारतीय महिलाए हर क्षे में पुषों के कधे से कधा मिलाकर देश की गति में भागीदार बन रही ह। अपने बु काशल, साहस व जीत के जबे से महिलाए जहा अपने घरपिरवार में कुशल गहिणी बनकर सबकी वाह वाही पा रही ह, वहीं ये मिहलाए कार्पोरेट सेटर में अपनी तिभा के जलवे दिखाकर देश आर दुनिया को भी चाका रही है ।

कहते ह जिस दतर में महिलाए होती ह, उस दतर में पुषों में डेसअप व बातचीत का सलीका खुदबखुद आ जाता ह। साथ ही समय की पाबदी व इमानदारी भी महिलाआें की पहचान होती ह, जिससे पुष काफी भावित होते ह। यही कारण ह कि आज भारतीय महिलाए कइ बडीबडी कपनियों में उ पदों पर आसीन ह।

यदि हम भारतीय महिलाआें की कार्पोरेट सेटर में विव में थिति की बात करें, तो आपके समक्ष एक चाका देने वाला सच आएगा। इएमए पाटनर इटरनेशनल के सर्वे के मुताबिक भारत में करीब ११ फीसदी महिलाए बडीबडी कपनियों में सीइओ जसे उ पद पर काबिज ह। वहीं अमेरिका जसे विकसित देश में मा ३ फीसदी महिलाए अमेरिका की फायून ५०० कपनियों में कायरत ह। यह अतर कोइ मामूली अतर नहीं ह। हमारे सामने इदिरा नूइ, चदा कोचर जसी सफल महिलाआें के उदाहरण ह, जो आज कार्पोरेट सेटर में महिलाआें की आदश बनकर देश की सभी सफल महिलाआें का तिनिधिव कर रही ह। कार्पोरट ही या अब तो राजनीति के क्षे में महिलाआें की दखल ‘परिवतन का एक शुभ सकेत’ साबित हो रही ह। फिर चाहे वह मनमोहन को दिशानिर्देश देने वाली सोनिया गाधी हों या फिर बीजेपी की चतुर राजनीतिज्ञ सुषमा वराज ही यों न हों, उार देश की कमान सभालने वाली मायावती हो या फिर आमुक की जयललिता ही यों न हो, आज इन सभी की अपनी पार्टी में आज भी अलग ही धाक ।

भारतीय महिलाआें की गति कही न कहीं हमारे उदार काेिण व महिलाआें के ति समान की भावना का ही परिणाम ह। शिक्षा विकास का आधार ह। यदि महिला शिक्षित होती ह, तो कल को उसके बे भी शिक्षित होंगे आर इस तरह हमारा देश भी एक साक्षर देश बनेगा कल तक शिक्षा से वचित रहने वाली गाव की बेटिया भी आज शिक्षा में चि ले रही ह। वतमान में महिलाआें की गति व शिक्षा भविय में देश के विकास के उस ददीयमान सूरज के उदय का आगाज ह, जो कल हमारे देश को भी विकसित देशों की थम श्रेणी में लाकर खडा कर देगा।

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