जीवजतुआें की अदभुत चेतना शक्ती
जानवरों के ित हमारे मन मे असर यह धारणा बनी रहती िक वे बुहीिन होते ह आर उहें अछे बुरे का ज्ञान नहीं होता। इसलिए हम उहें अधिक महव नहीं देते आर तुछ समझते ह, परतुु यह धारणा सच नहीं ह। यिद िकसी पशुपक्षी को सही ढग से शक्ती करके उसकी बु को िनखारा जाये तो वह कइ काम मनुयों से बढचढकर कर सकता है । कुछ जानवरों में तो अदभुत विलक्षण चेतना शक्ती होतीहै ।
िननिलिखत उदाहरण इसी बात की पु करते ह। सन १९०४ में अमेरिका के पचिमी ीप समूह का पाच हजार फुट ऊचा माउट पीरो नाम का पवत वालामुखी बन कर फूट पडा आर उसके टुकडेटुकडे होकर बिखर गये। इस दुघटना में लगभग तीस हजार य मरे, हजारों घायल हए आर करोडों पये की सपा का नुकसान हआ।
योंकि यह दुघटना अचानक ही घट गइ इसलिए वहा के निवासियों में से किसी को भी यह आशका नहीं थी, लेकिन आचय की बात यह ह कि वहा रहने वाले पशुपक्षी महीनों पहले घबराये हए से लगते थे। रात को कुाे बीि एक वर मे रोते थे आर कहीं खिसक जाते थे। विफोट होने के मुय थान से सारे के सारे साप, कुाे, बीि, सियार आर अय दूसरे पशुपक्षी पहले ही किसी दूसरे सुरक्षित थान पर चले गये आर उनके दशन दुलभ हो गये। पक्षियों ने तो पूरा ीप ही खाली कर दिया था।
ाणी वाि विशारद विलियम जे लाग ने पशुआें की चेतना श के विषय में अपनी पुतक ‘हाउ एनिमस टाक’ मे वितार से काश डालते हए बताया ह कि भले ही बु काशल में मनुय की तुलना में पशु पिछडे हए हों, लेकिन उनमें चेतना श कहीं अधिक बढी होती ह। उसी के आधार पर वे अपनी जीवनचया की सुविधापूवक सचा करते
।
एक आखों देखी घटना ह। मेरे पडोस में एक पसठ वर्षीय सान रहते थे। अयापक थे, अकेले थे। उनका सगा सबधी कोइ नहीं था। बस एक कुाा था जो मालिक के साथ रहता था। अयापक महोदय कुछ दिन से बीमार चल रहे थे। पडोसी होने के नाते म ही उनकी देखभाल आर दवादा की यवथा करता था। एक रात उनकी हालत कुछ यादा खराब हो गइ। उस रात उनका कुाा रह रहकर सारी रात रोता रहा। आखिकार तडके चार बजे के लगभग माटर जी की मयु हो गइ। इससे लगा कि उनके कुाे को अपने मालिक की मयु का पूवाभास हो गया था।
लाग महोदय ने अपनी पुतक में ऐसे अनेकों सग लिखे ह जिनसे यह साफ जाहिर होता ह कि जीव जतुआें को निकट भविय में घटने वाली घटनाआें का पहले से आभास हो जाता ह। यदि जुबान होती तो वे आने वाली घटनाआें के बारे महवपूण जानकारी दे सकते थे। उनकी पुतक में दिये हए कुछ सकरण इस कार ह। एक मदान में हिरणों के झुड इतनी तेजी से घास चुग रहे थे कि मानों उहें कहीं जाने की आतुरता हो। इस अवाभाविक ढग से घास चरना कुछ समझ में नहीं आ रहा था कितु कुछ ही घटों के बाद अचानक बफानी तूफान आ गया आर कइ दिनों तक घास मिलने की कोइ उमीद ही न रही। तब समझ में आया कि थिति का पूवाभास पाकर हिरण अयत तीवता के साथ इतनी घास चरने में लगे थे कि जिससे उनका कइ दिनों तक गुजारा हो सके।
जब बफ पडने की सभावना होती ह तो रीछ अपनी गुफा में चले जाते ह आर कइ दिन पहले काफी दिन का आहार जमा कर लेते ह। यहा भी उनकी चेतना श ही काम करती ह।
इसी तरह उारी कनाडा में झील की मछलिया बफ की मोटी सतह झील पर जमने से पहले ही गरम थान पर सुरक्षित पहच जाती ह।
वियना में एक बार एक कुाा माल चढाने आर उतारने वाली केन से थोडी ही दूरी पर पडा हआ आराम कर रहा था। जाने या हआ, कुाा अचानक चाका, उछला आर फुर्ती से उठकर केन से काफी दूरी पर जाकर बठ गया। इस घटना को कुछ ही क्षण बीते होंगे कि केन की चेन टूट गइ आर भारी लाह खड उसी थान पर आकर गिरा जहा कुाा लेटा हआ था। कुाे का इस तरह चाकना आर भागकर दूर बठ जाना इस बात का माण था कि ऐसी घटना घटित होने का उसका पूवाभास हो गया था।
एक बार पेलनजानी नामक एक इटलियन ने चमगादड की उडान का परीक्षण किया। उसने एक कमरे की छत से धागे को लटकाया आर उनमें घटिया बाध दी जिससे धागों से टकराने पर वे बजें। उसके बाद उनमें एक चमगादड को दाडाया। चमगादड बद कमरे में बडी देर तक इधर उधर दाडता रहा पर एक भी घटी नहीं बजी। हालाकि चमगादड की बहत कमजोर होती ह, परतु उसने किस तरह अपने आपको धागों से बचाये रखा, यह आचय की बात ह। कहते ह चमगादड ति सेकड तीस बार वनि तरगें भेजता ह आर जितने समय में उसे उनकी तिवनि आती ह, वह सामने वाली बाधाआें का पता लगा लेता ह आर उनसे बचकर निकल जाता ह।
बमा की कलादान घाटी में एक बीि की समाधि बनी हइ ह। उसकी समाधि के चारों ओर बडे बडे अक्षरों में लिखा हआ ह ‘यह बीि अगर हम लोगों की सहायता न करती तो हम सब के सब मारे गये होते आर पराजित होते।’ इन शदों में वाकइ जीवों की अदभुत इयि क्षमता का इतिहास अकित ह।
घटना उन दिनों की ह जब बमा में अगेजों आर जापानियों के बीच यु चल रहा था। एक दिन अगेजों की टुकडी ने एक जापानी टुकडी पर हमला बोल दिया। जापानियों ने पीछे हटने का नाटक खेला पर वातव में वे पीछे हटे नहीं, बकि खदकों में छुप गये जिससे लगे कि मानो सचमुच वे भाग गये हों। एक मेज पर वे ताजा पका खाना भी छोड गये। गरम ताजा वादि भोजन देखकर अगेजों के मुह में पानी भर गया आर सब खाने पर टूट पडे, लेकिन वे अभी लेटों तक पहच भी नहीं पाये थे कि उनमें से एक सार्जेट रडी की काली बीि उस खाने पर जा टूटी आर भयानक प से गुराकर अगेज सनिकों को पीछे हटा दिया। अगेजों ने बीि को धमकाया भी, लेकिन उसने उग प धारण कर रखा था आर अपनी कु मुा में तब तक गुराती रही जब तक वहा एक भयानक धमाका नहीं हो गया।
वातव में जापानियों ने खाने के साथ बादी सुरग का सपक जोड रखा था जो सभी सनिकों के ाण ले लेता पर बीि ने अपने ाणों की आहति देकर न केवल अपने वामीभ होने का परिचय दिया, बकि उसने यह भी सि कर दिया कि जीव जिहें हम तुछ समझते ह किस तरह विलक्षण आमिक गुणों, अतीयि क्षमताआें से ओत ाेत होते ह।
समु में तूफान आने से बहत पहले ही समुी बतखें आकाश मे उड जाती ह आर तूफान की परिधि के क्षे से बाहर निकल जाती ह। डाफिन मछलिया चानों में जा छिपती ह। तारा मछली गहरी डुबकी लगा लेती ह आर हवेल उस दिशा में भाग जाती ह जहा तूफान न पहुचे सके। यह पूव ज्ञान इन जल जतुआें का जितना सही होता ह उतना ऋतु विशेषज्ञों के कीमती आर आधुनिक उपकरणों से भी नहीं होता।
