आपका पिरधान?
सादयबोध के िलए आवयक ह शारीिरक साव, आतिरक गुण, वाकपटुता तथा सयमित समयानुकूल पिरधान एव साजश्रगार। इसके विपरीत कोइ भी मिहला आकषक यवि बनाये रखने में सफल नहीं हो सकती । अगर मिहला चाहती है िक उसका यिव आकषक िदखे तो उसे शारीरिक साव एव समयानुकूल साजश्रगार तथा पहनावे पर विशेष यान देना ही होगा। वय को आकषक िदखाने में समयानुकूल वों का चयन परम आवयक होता है ।
परिधानों का चयन करते समय सवथम अपनी शारीरिक बनावट, गठन एव परग पर यान देना आवयक ह। अगर आपका कद अधिक लबा ह तो ऐसे वों का चयन करना होगा जिससे आप अधिक लबी न दिखाइ दें। ठिगनी एव मोटी महिलाआें को लबी धारियों वाले वों का ही अधिक योग करना चाहिए। अगर रग अधिक काला या सावला ह, तो काले एव नीले रगों के साथ ही डाक कलर के वों का योग नहीं करना चाहिए।
व इतने ढीले एव तग मत पहनिये कि पहनावा भोंडा आर अनुपयु लगे। अधिक ढीले वों के पहनने से फूहडता तीत होती ह तथा अधिक तग वों के पहनने से न सिफ फूहडता ही तीत होती ह, बकि वाय की से भी यह अति हानिकारक होता ह। वक्षथल के उभारों की ओर अनायास ही चलतेफिरते लोगों का यान आकषित होता ह।
व ऐसे पहनने चाहिए कि आकषक ययाेिं में सादगी एव गभीरता का परिचय दें। अगों का अनावयक दशन ‘सेस सिबल’ का परिचायक होता ह। तडकभडक एव अगों की नुमाइश करने वाले व हायापद थिति में तो खडे कर ही देते ह। साथ ही वे आकमिक सकट को भी आमण दे सकते ह। सावजनिक थानों पर जाने पर खुले वों का योग कभी नहीं करना चाहिए।
वेशभूषा ारा य के मानसिक आथिक आचरण का पता लगता ह। भडकाऊ व आपकी रोमाटिक मनोवा को दशित करते ह। सादगी एव हके रगों के व गभीरता एव शात वभाव को दशित करते ह। ऐसे वों के साथसाथ अगर वाकशली में गभीरता एव सयता हो तो वह नारी हर थान पर समान पाती ह। वबेव बोलते रहने से बात का महव समा तो होता ही ह साथ ही अधिक बोलने वाले को ‘बातूनी’ कहकर उसका उपहास भी उडाया जाता ह।
हर व खामोश एव खोये रहना तथा युार में अनावयक सक्षिता का भाव भी सामने वाले को उपेक्षित करता ह। अधिक ककश एव तेज वाणी आकषक यवि के लिए घातक होती ह। सावजनिक उसव, समारोह एव मागलिक अवसरों पर अनावयक हतक्षेप एव अनावयक सभाषण करते हए आप अपनी नजर में भले ही एडवास बन जायें लेकिन आपको पीछेपीछे अशोभनीय टिपणी को सुनने के लिए भी आपको अपने कान खुले रखने चाहिए।
कामकाजी या घर से बाहर रहने वाली महिलाए अति भडकाऊ वों को कदापि धारण न करें। बेव की सादगी, बेव की शहनाइ, बेव की वेशभूषा एव बेव का साज श्रगार य के यवि को सदेहापद बना सकता ह। सावजनिक थलों में नाइटी या गाउन पहनकर निकलना, मागलिक अवसर पर सादगी में रहना, शोकद वातावरण में तडक वाले वों को पहनना यवि के विपरीत होता ह। ‘बूढी घोडी लाल लगाम, ‘मखमल पर टाट का पबद’ जसी कहावतों को चरिताथ करने वाले वों को कदापि धारण न करें। अगर आप आज के युग के समान आकषक ही दिखना चाहती ह, तो निनानुसार काय कर सकती ह
* लबे काडिगन या हिप से नीचे तक की लबाइ के सिंगल बिटेड अनकसटटेड जकेटस पहनें। मुलायम शोडर पडस जो अधिक सत या मोटे न हो, का उपयोग करें। इससे आपका आकषण बढेगा।
* एक ही रग के या सिफ काले आर सफेद (एकवर्णी) कपडे पहनें। ऊपर व नीचे के दोनों ही डेस एक ही रग के हों।
* अगर आप गहरे रग की कट पहनती ह। तो टाकिंस (नायलोन मिस लाइका को ाथमिकता दें) भी गहरे रग की ही हों। टाकिंस के बिना भी टपी सडल के साथ कट काफी अछी लगती ह।
* अपनी कमर पर अधिक कसाव न दें। अछी फिटिंग के लबें लीवलेस कोट (टयूनिक) पहनें पर इसके साथ ही काफी टाइट पट न पहनें।
* लिम दिखने के लिए कालें रग की डेस सबसे बेहतर होती ह, परतु अछे रग के कपडे पहनने में आप कतइ हिचकिचाए नहीं।
* अपने चेहरे को निखारने के लिए या आकषक बनाने के लिए आप कानों में बुदे आर गले में नेकलेस व काफ पहन सकती ह। चेहरे पर हमेशा अधिक से अधिक मुकान लाते रहने की कोशिश कीजिए।
