तेलगाना समथकों के पास आर कोइ विकल्प नहीं राष्ट्र
तेलगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अयक्ष के चशेखर राव के पास अब इसके अलावा आर कोइ विकप नहीं है कि वह तब तक अपना आदोलन जारी रखें जब तक कि अलग तेलगाना राय का निमाण सुनिचित नहीं हो जाता। इसके पूव यदि उहोंने साा के साथ कोइ समझाता किया तो उनकी सारी राजनीति मिटटी में मिल जाएगी। कागेस नेतव हर तरह से इस कोशिश में लगा हैकि बिना कोइ निणय लिए ही तेलगाना आदोलन शात हो जाए।
मीडिया में ऐसी तरहतरह की खबरें सारित कराइ जा रही ह जिससे आदोलनकारियों की नज टटोली जा सके। ऐसी खबरें भी गम ह कि के सरकार चशेखर राव को केीय ममिडल में थान देना चाहती ह, लेकिन कोइ आपचारिक निमण नहीं दिया गया है। एक समाचार प ने ऐसी धारणा थापित करने की कोशिश की कि टीआरएस में भी कुछ लोग ऐसे किसी ताव की तीक्षा में है, योंकि वे समझते ह कि के में सरकार के सिहासन के निकट रहकर वह पथक तेलगाना के बारे में सरकार पर अधिक दबाव डाल सकेंगे। इसके पक्ष में यह तक दिया गया है कि के सरकार में रहकर ही चशेखर राव उस पर इतना दबाव डाल सके कि तेलगाना की बात को रापति के अभिभाषण में शामिल किया जा सके।
उधर एलु से कागेस के सासद काबुरी साबशिवराव ने बयान दिया ह कि पार्टी का केीय नेतव राय सरकार में तेलगाना का उपमुय मी बनाने पर विचार कर रहा ह। साबशिवराव कागेस सासद ह जिहें ५ जनवरी की के में बुलाइ गइ ८ दलों की बठक में कागेस की तरफ से आध व रायलसीमा का तिनिधव करने के लिए चुना गया था।
यपि इस तरह की खबरों पर तीव तिकिया हइ ह फिर भी आम जनता में यह धारणा आसानी से जम सकती ह कि पथक तेलगाना की माग करने वाले नेतागण पदपसे के लोभन में एकबार फिर तेलगानावासियों की भावनाआें को धोखा दे सकते ह। टीआरएस नेता को के में मीपद व इस क्षे के कागेसी नेताआें को राय ममिडल में बेहतर तिनिधिव देकर मामले को ठडा किया जा सकता ह इसकी आशका बहत पहले से थी इसलिए इस क्षे के छााें व अयापकों ने राजनीतिक नेताआें को दूर रखकर अपने पथक तेलगाना आदोलन को आगे बढाने का निणय लिया।
उहोंने पिछले अनुभवों से यही सीखा कि राजनेता खरीदे जा सकते ह, इसलिए वे निजी वाथ में कभी भी धोखा दे सकते । छााें की इस सतकता का ही ऐसा दबाव ह कि अब तेलागाना क्षे का किसी पार्टी का कोइ नेता तेलगाना आदोलन छोडकर साा के साथ किसी तरह की सादेबाजी नहीं कर सकता। केीय नेतव के लिए भी उहे खरीदना मुकिल हो गया है।
टीआरएस के विधायक व चशेखर राव के भतीजे हरीश राव ने ऐसी सभी खबरो का खडन किया ह कि टीआरएस अयक्ष के सरकार में कोइ पद वीकार कर सकते ह। उनके अनुसार चशेखर राव ने आदोलन को आगे बढाने के लिए ही ससद की सदयता से भी अपना इतीफा दे दिया ह। उहोंने यह इतीफा सीधे लोकसभायक्ष को भेजा ह जिसका अथ ह कि वह इसके ति गभीर ह। अब जब उहोंने ससद की सदयता से ही इतीफा दे रखा ह तो फिर मपिद वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता। कागेस के भी तेलगाना क्षे के नेताआ ने साबशिवराव के बयान की तीव आलोचना की आर कहा ह कि वह तेलगाना क्षे की जनता के बीच भम फलाने की कोशिश कर रहे ।
इसमें दो राय नहीं कि के सरकार तेलगाना मसले पर ‘विलबन नीति’ अपना रही । उसकी कोशिश ह कि इसे जहा तक हो सके टाला जाए। ५ जनवरी की बठक के बाद अभी तीक्षा की जा रही ह कि कागेस हाइकमान अब इस मसले पर या ख अतियार करता ह, लेकिन उसे इसकी कोइ जदी नहीं ह। इस मसले पर आगे विचार विमश के लिए एक ‘पनेल’ गठित होने वाला था वह भी अब तक गठित नहीं हो सका ह। इसलिए अब आगे की कारवाइ का दारोमदार फिर सयु कारवाइ समिति (जेएसी) पर निभर ह। १२ जनवरी मगलवार को होने जा रही इसकी बठक में चशेखर राव भी शामिल होने वाले ।
वे इसमें केीय नेताआें के साथ हइ अपनी बातचीत का निकष पेश करेंगे। अब इस बठक में जेएसी का जो भी निणय हो लेकिन उसके नेतागण इतना तो समझते ही होंगे कि उनके लय की सफलता उनके आदोलन की तीवता पर ही निभर है।
चीन कुतरता जा रहा है हमारी जमीन
लददाख में चीन से लगी सीमा पर घुमतू चरवाहों की समया पर विचार के लिए सेना व नागरिक अधिकारियों की लेह में हइ बठक में पता चला कि चीन पिछले २०२५ वषा] में भारत की उारी सीमा को लगातार कुतरता जा रहा ह आर हम पीछे हटते आ रहे ह। इस सीमावर्ती इलाके का अभी भी कोइ पा नशा नहीं ह। विभिन एजेंसियों के नशों में भी फक ह, लेकिन इसे वीकार करते हए भी अधिकारियों ने माना कि देश की उारी सीमा लगातार सिकुडती जा रही ह आर इसका लाभ चीन उठा रहा ह। उसका दक्षिण की ओर होने वाला वितार एकएक इच करके बढता जा रहा ह। चीन की एक सि कहावत ह कि इच इच बढना गजो में आगे बढने से बेहतर ।
लददाख के डाकवुग क्षे में चरवाहे सीमावर्ती क्षे में टेंट लगा कर रहते ह आर अपने जानवरों को चराते ह। चीनी सनिक आये दिन इनके टेंटों पर हमला कर देते ह आर उहें हडका कर भगा देते ह। बारबार ऐसी शिकायतें मिलने के बाद यह बठक आयोजित की गइ। इस बठक में चरवाहों की सुरक्षा के लिए या निणय हआ यह तो पता नहीं कितु इतना जर पता चल गया कि देश की उारी सीमा लगातार सिकुडती जा रही है।
अभी पिछले दिनों जब यह खबर आइ कि चीनी सनिकों ने भारतीय सीमा में करीब डेढ किमी भीतर घुस पर चटटानों पर लाल पेंट से चीन लिख दिया तो भारत सरकार ने इसे काइ गभीरता से नहीं लिया। उसने बारबार किये जा रहे सीमोलघन को भी महव नहीं दिया। ऐसा नहीं कि भारत सरकार को अबसे पहले पता न रहा हो कि हमारी उरी सीमा सिकुड रही ह, लेकिन वह इसकी उपेक्षा करती रहीं है।
आज यह जानना सुनना कितना शमनाक ह कि हमारे पास अपनी उारी सीमाआे का कोइ सही नशा तक नहीं । हमें खुद नहीं पता हमारी सीमा कहा तक है। पडोसी जहा तक घुस आता , उसे आने देते ह आर चुपचाप पीछे सरक आते है।
सीमा के बारे मे यह ढीला रवया देश के लिए बेहद खतरनाक । सरकार को इस पर गभीरता से विचार करके सीमा को थिर करने का यन करना चाहिए।
