ADVERTISEMENT

आपका वोट

क्या राहुल गांधी भ्रष्टाचार खत्म करेंगे?

  • सही
  • गलत
  • पता नहीं
और भी

फोटो दीर्घा

Share

राखी की लाज

Swatantra Vaartha  Sun, 22 Aug 2010, IST

राखी की लाज

प्रकाशचंद्र एक नामी सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। अमेरिका के मशहूर कंप्यूटर संस्थान से उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी और बोस्टन में रहकर एक मशहूर कंपनी में कार्यरत थे। पत्नी कामिनी और एक बिटिया रोजी, बस तीन प्राणियों का नन्हा सा परिवार था उनका। जीवन के दिन बहुत सुखमय गुजर रहे थे। किसी चीज की उन्हें कोई कमी न थी। कमी थी तो बस एक पुत्र की।

रोजी को भी अक्सर भाई की कमी बहुत महसूस होती, खासकर रक्षाबंधन के दिन, जब बोस्टन में बसे भारतीय समुदाय के लोग भी रक्षाबंधन का त्यौहार धूमधाम से मनाते और सभी बहनें अपनेअपने भाईयों की कलाईयों पर स्नेह का पवित्र धागा (राखी) प्यार से बांधती। उस वक्त रोजी काफी मायूस एवं गुमसुम सी हो जाती। उसे भी अपने साथ हंसनेखेलने तथा उसके हर सुखदुख में उसका साथ निभाने के लिए एक अदद भाई की चाह थी, परंतु ईश्वरीय इच्छाआें के आगे मनुष्य पूरी तरह बेबस होता है।

प्रकाशचंद्र ने कामिनी की अच्छी से अच्छी चिकित्सा कराई, किंतु डॉक्टरों ने साफ जवाब दे दिया कि अब वो जीवन में दोबारा कभी मां नहीं बन सकेगी।

रोजी की उदासी उम्र ब़ढने के साथसाथ और गहन होती चली जा रही थी। उसे अब भाई की कमी पहले से भी ज्यादा खलने लगी थी। प्रकाशचंद्र एक जानेमाने सॉफ्टवेयर इंजीनियर तो थे ही, एक दिन अचानक उन्होंने मन ही मन सोचा कि क्यों न अपने लिए एक ‘रोबोट पुत्र’ ही बना लूं !

बस, यह विचार मन में आते ही उन्होंने अपने इसी सपने को पूरा करने की ठान ली और अगले दिन से ही उन्होंने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया। छह माह के अथक प्रयास और बेहतरीन टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर आखिरकार उन्होंने एक सुंदर सा ‘रोबोट पुत्र’ अपने लिए तैयार कर ही लिया। देखने में वह एक २०२१ साल का सुंदर, स्मार्ट और शक्तिशाली युवक लगता था। उन्होंने उसका नाम रखा आलोकचंद्र।

रोजी और कामिनी को इन सब बातों की कोई जानकारी ही न थी। एक दिन अचानक रोजी के जन्मदिन के अवसर पर प्रकाशचंद्र ने आलोक को प्रकट किया और रोजी के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोले, ‘लो बिटिया, तुम्हारा भैया तुम्हारी सेवा में हाजिर है। एक सगा भाई जितना प्यार, स्नेह एवं सुरक्षा अपनी बहन को देता है, आलोक तुम्हें उससे भी कहीं ज्यादा देगा।’

इसके बाद वह आलोक की ओर मुखातिब होते हुए बोले, ‘बेटे आलोक, लो अपनी लाडली बहन को संभालो।’

कामिनी और रोजी अचानक अपने बीच एक रोबोट को देखकर दंग रह गई, लेकिन तब प्रकाश चंद्र ने उन्हें सारी बात विस्तार से बताई तो उन्हें संतुष्टि हो गई।

एक रोबोट होकर भी आलोक बिल्कुल मनुष्यों की तरह ही व्यवहार करता था। उसकी मैमोरी में सारी अच्छी बातें और अच्छे संस्कार फीड कर दिए गए थे। एक अच्छे सभ्य भारतीय कुलीन युवक में जोजो गुण होने चाहिए, वो सब उसमें थे।वह रोजी के साथ गेम खेलता, लॉन में टहलता, डांस करता और उसे अच्छेअच्छे मजेदार जोक्स सुनाकर गुदगुदा देता।

कुछ ही दिनों में रोजी और कामिनी आलोक (रोबोट) से काफी घुलमिल गए। बाहर से कोई गेस्ट आता तो उससे कामिनी उसका परिचय कराते हुए कहती, ‘ये है मेरा बेटा आलोक।’

अगले रक्षाबंधन के दिन रोजी काफी खुश नजर आ रही थी। खुश भी क्यों न होती, आखिर वषा] बाद आज वो अपने किसी भाई को राखी बांध रही थी। उसने आलोक की कलाई पर राखी बांधी और माथे पर दही, केसर एवं कुमकुम का टीका लगाया। आलोक ने भी उसकी रक्षा का प्रण लिया और साथ ही उसे एक सुंदर सा उपहार भी दिया।

इसी तरह आलोक के साथ खुशीखुशी कई वर्ष बीत गए। रोजी अब २० वर्ष की एक अत्यंत खूबसूरत और आकर्षक युवती बन चुकी थी। वह मेडिकल की प़ढाई कर रही थी। ऋृतुराज खन्ना नामक उसका एक सहपाठी एक बहुत ही बिग़डैल रईसजादा था। उसके पिता मदनलाल बोस्टन के अरबपति व्यवसायी थे। चूंकि रोजी बला की खूबसूरत थी, अतः ऋृतुराज उस पर गलत निगाह रखता था, लेकिन रोजी उसे जरा भी लिफ्ट न देती, किंतु ऋृतुराज था कि वो रोजी को किसी भी कीमत पर हासिल कर लेना चाहता था।

एक बार प्रकाशचंद्र और कामिनी किसी रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए भारत में अपने गांव आए हुए थे। इसलिए बोस्टन में घर और रोजी की देखरेख का जिम्मा आलोक पर ही था।

ऐसे में एक दिन मौका पाकर ऋृतुराज अचानक रोजी के घर आ धमका। उसने सोचा था कि भला एक रोबोट उसका क्या बिग़ाड लेगा? यही सोचकर वह रोजी से छ़ेडछ़ाड करने लगा। उसकी नीयत उस दिन काफी खराब लग रही थी और वह सारी हदें पार करने पर उतारू नजर आ रहा था। रोजी द्वारा बेरूखी दिखाने पर उसने साथ जबरन बलात्कार करने की कोशिश की लेकिन रोजी की चीखचिल्लाहट सुनते ही आलोक किचन से द़ौडाद़ौडा बेडरूम में पहुंचा कि आखिर रोजी अचानक इतनी घबराहट और डर के स्वर में चिल्ला क्यों रही है ?

आलोक जब बेडरूम में पहुंचा तो वहां का दृश्य देखकर वह गुस्से से पगला गया। उसने लातघूंसों से ऋृतुराज की धुनाई शुरू कर दी।

ऋृतुराज हर तरह से आवारा, बदचलन और बिग़डा हुआ ल़डका तो था ही, जब उसने देखा कि यह यंत्र मानव उस पर भारी प़ड रहा है तो उसने अपनी रिवाल्वर निकाली और दनादन तीन गोलियां आलोक के सीने में उतार दी पर आलोक वहीं ख़डा मुस्कराता रहा। आखिरकार आलोक ने अपने फौलादी हाथों से ऋृतुराज का गला दबाकर उसका काम तमाम कर दिया। यह देखकर रोजी घबरा गई, परंतु आलोक ने कहा, ‘यह गुनाह मैंने किया है, तुम बेफिक्र रहो।’

तब आलोक ने खुद पुलिस को फोन किया और इस बारे में सारी जानकारी दी। पुलिस के लिए अब सबसे ब़डी दुविधा यह थी कि चूंकि ऋृतुराज का कत्ल एक यंत्र मानव ने किया था, इसलिए वह उस पर मुकद्दमा नहीं चला सकती थी जबकि ऋृतुराज एक बलात्कारी था। अतः पुलिस लाश लेकर लौट गई। आलोक ने तुरंत मोबाइल से फोन करके पापा और मम्मी को इस घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही वो लोग तुरंत भारत से बोस्टन पहुंच गए।

रोजी ने कहा, ‘जितना एक सगा भाई अपनी बहन के लिए न करता, उससे कहीं ज्यादा वफादार एवं समझदार मेरा यह भाई है। मुझे अपने आलोक भैया पर गर्व है।’प्रकाशचंद्र और कामिनी ने अपने ‘रोबोट पुत्र’ आलोक को गले लगा लिया।

रंजन कुमार शर्मा

आपकी राय