पार्टी सख्त, सरकार ढीली
िहसाब से कागेस ने महगाइ पर तीन महीने से सरकार पर दबाव बनाया हआ था, लेिकन शरद पवार के कानों पर जू नहीं रेंगी आर न मनमोहन िसंह की नींद उडी। यह बारबार सािबत हआ है िक महगाइ के मामले में मनमोहन सरकार के ख लापरवाह ह। यिद लापरवाही नहीं होती तो मालयों आर गुप आफ मिनिटर के बीच ताव नोट नहीं घूमते रहते। महीनों से सिचवों की एक कमेटी ित साह बठक करके कीमतों को रियू करती ।
इन िरयू बठकों में भी कइ नोट बने।
ये सुझाव नोट पहले कषि मालय को गए िफर िवचाराथ मालयों में इधरउधर आतेजाते रहे। जसे आयात या िनयात के सबधी मुाें पर या दालों के आयात के िलए यमार को एडवास पेमेंट के मसले में फाइले घूमती रही। शुगर िनयात सादों के मसले में भी लालफीताशाही हइ। सचिवों की कमेटी, गुप आफ मिनिटर से कबिनेट की आथिक मामलों की सीसीइए आर कबिनेट की कीमतों की सीसीपी में सुझावनाटों का सिलसिला चलता रहा।
जब चीनी के कीमतें ५० तिकिलो की रेट पर पहचनी लगी तो सोनिया गाधी, जनादन वेिदी, अहमद पटेल सभी ने पार्टी की तरफ से सरकार को अटीमेटम सा दिया। उसी के दबाव में बुधवार को मनमोहन सिंहशरद पवार को यह तय करना पडा िक आज ही फसलों का दो टूक ऐलान हो। अब गडबड यह ह कि विरोधी पाटियों भाजपा, लालू यादव, मायावती, नीतीश कुमार आदि सभी महगाइ विरोधी सत टेंड ले चुके है । इहोंने महगाइ के खिलाफ आदोलन का ऐलान कर रखा ह। यदि शरद पवार के कहे अनुसार दस दिन में कीमते नहीं घटी तो विरोधी पाटियों के आदोलन को भारी बल मिलेगा।
सकट में सभी क्षप
कुछ अजीब सयोग ह कि तमाम क्षेीय नेताआें के बुरे दिन चल रहे ह। मुलायम सिंह यादव अपने राजनतिक जीवन के सवाधिक खराब दार में ह। लालू यादव आर रामविलास पासवान खूब मेहनत कर रहे ह,लेकिन नीतीश कुमार के तमगों की सया बढ रही ह, इसलिए मेहनत आर आदोलन के बावजूद बिहार में इनकी हवा नहीं बन पा रही ह। एचडी देवेगाडा ने अपनी जुबान से ऐसी गालिया निकाली कि हर कोइ यह सोचने को मजबूर हआ कि भारत को कसा धानमी मिला था। तेलुगु देशम के चबाबू नायुडूू तेलगाना के मामले में इतने बुरे उलझे ह कि उनकी साख दोनों तरफ खराब ह। उधर महगाइ ने शरद पवार को विलेन बना दिया ह। हिसाब से कणानिधि, काश सिंह बादल आर ममता बनर्जी भी कम मुकिलों में नहीं ह। बाल ठाकरे आर लेट पाटियों की जो दशा ह, वह किसी से छुपी हइ नहीं ।
मगर इन सबमें सवाधिक परेशान मुलायम सिंह ह। उहें समझ नहीं आ रहा ह कि अमर सिंह को कसे हडल करें? परिवार आर पार्टी दोनों में जहा अमर सिंह को निकालने का दबाव ह, वहीं डरे भी हए ह। अमर सिंह ने मुलायम सिंह आर सपा दोनों को तारे दिखा दिए ह। अमर सिंह इस मूड से काम करते लगते ह कि मेरी दोती देखी ह, अब दुमनी देखें। तय माने कि समाजवादी पार्टी का बाजा बजेगा। हरानी की बात ह कि सपा में एक भी नेता मेे रामगोपाल यादव के बचाव या अमर सिंह को मुहतोड जवाब देने की हिमत नहीं हइ। चुपचाप सभी या तो बदात कर रहे ह या ललोचपों की कोशिश की।
ममता बनर्जी की तखी
ममता बनर्जी बहत तखी होती जा रही ह। इस एक साह में उहोंने ऐसी कइ बातें कही ह, जो उनके उखडे हए मूड को बताती ह। उहोंने कबिनेट बठक में महगाइ पर हा किया। मनमोहन सिंह को नीतिगत फसलों से पहले काडिनेशन कमेटी बनाकर उसमें विचार के लिए कहा। डीएमके आर एनसीपी को अपने साथ बताया। दरअसल धानमी डामनमोहन सिंह की बुदेव के साथ मेलमुलाकात आर उनका योति बसु को देखने जाना ममता को पसद नहीं आया ह। मनमोहन सिंह कोलकाता गए तो वे उनकी आगवानी के लिए एयरपोट नहीं गइ। जबकि वे कोलकाता में ही थी। न ही वे अपताल गइ। उहोंने अपने वाय रायमी दिनेश वेिदी को धानमी की आगवानी के लिए एयरपोट भेजा।
अगले दिन उहोंने चेतावनी दे डाली कि यदि धानमी ने सीपीएम नेताआें से साठगाठ बद नहीं की तो वे इतीफा दे देगी। यह नहीं सोचे कि वह पिछलगू ह। उनकी पार्टी टीमएसी यदि यूपीए का समथन कर रही ह, तो वजह मजबूरी नही, बकि देश के यापक हितो के लिए ह। यही नहीं उहोंने पचिम बगाल के कागेसियों को तणमूल में शामिल होने का याता भी दे डाला ह। मकसद राय में होने वाली ८२ नगरपालिकाआें के चुनाव में कागेस को सबक सिखाने का ह। वे कागेस में फूट पदा कर दीि में बठे कागेस नेताआें को सबक सिखाना चाहती ह।
कागेस नेता इसे गठबधन धम का उघन मान रहे ह, लेकिन ममता को इससे कोइ फक नहीं पडता ह। उहोंने कें सरकार की खुली आलोचना करते हए कहा ह कि महगाइ से लेकर माओवाद तक के मुाें पर कें के पास कोइ नीति नहीं ह। ममता बनर्जी ने कागेस पर यह आरोप भी लगाया ह कि यूपीए सरकार में दूसरी सबसे बडी पार्टी होने के बावजूद उनकी पार्टी की अनदेखी हो रही है । जाहिर ह ममता बनर्जी लेट के ति कागेस नेताआें के सदभाव से चिढी है ।
एनएसी में टालमटूल
या यह मुमकिन ह कि सोनिया गाधी को जिस नेशनल एडवायजरी कासिल का अयक्ष बनना हो, वह लालफीताशाही में अटकी रहे। कुछ ऐसी ही रिपोट ह। सोनिया गाधी की अयक्षता वाली सलाहकार कासिल को वापस बनाने की राय बहत पहले बन गइ थी। हा, नाम बदल कर इसके गठन का विचार जर आया था। हिसाब से यह काम अब तक हो जाना चाहिए था। लेकिन गठन में यों देरी हो रही ह, इसका जवाब किसी के पास नहीं ह। कुछ सूाें के मुताबिक सभावित सदयों के नाम तय नहीं हो पा रहे ह, वहीं कागेस नेताआें का मानना ह कि धानमी दतर की नाकरशाही के कारण देरी हो रही है ।
सीपीएम का सकट
सीपीएम सुधार की जितनी कोशिश कर रही ह, उसकी मुकिलें उतनी ही बढती जा रही ह। ताजा मुकिल उसके सुधार दतावेज की वजह से ह। इसमें कहा गया ह कि कोइ भी कामरेड न तो धामिक फशन आयोजित करेगा आर न किसी ऐसे कायकम में हिसा लेगा। इससे नाराज केरल से पार्टी के पूव सासद के एस मनोज ने इतीफा दे दिया ह। मनोज वटिकन कथोलिक इसाइ ह आर नियमित प से चच जाते ह। उनका कहना है िक पार्टी सुधार दतावेज के नाम पर ऐसी चीजें थोप रही ह, जो पार्टी के सविधान में भी नहीं ह आर देश के सविधान में भी नहीं ह। उनका कहना ह कि वे विचारधारा के लिए अपनी आथा से समझाता नहीं कर सकते।
सीपीएम नेताआें का मानना ह कि यह सकट अभी आर बढेगा। योंकि केरल से केरल से लेकर पचिम बगाल तक पार्टी में अपसयक नेताआें की भरमार ह, जो गरीब हितषी नीतियों को मानने के साथसाथ धम में भी आथा रखते ह। कुछ ही समय पहले सीपीएम के एक आर अपसयक नेता अदुाकुी भी पार्टी छोडकर गए थे आर उहोंने भी कहा था कि सीपीएम में धामिक आथा बनाए रखने की वतता नहीं ह। अदुाकुी पिछले दिनों उपचुनाव में सीपीएम उमीदवार को हराकर विधायक बने ह। धम के अलावा सुधार दतावेजों में नेताआें के आचरण को लेकर भी दिशानिर्देश दिए गए ह। पार्टी के यादातर नेताआें का मानना ह कि इसे ऊपर से लागू किया जाए। यानी पहले बडे नेता इसका पालन करें, फिर इसे नीचे लागू किया जाए।
नितिन गडकरी की सकियता
भाजपा के नए अयक्ष नितिन गडकरी भी राहल गाधी की तरह फिजिकल मूवमेंट को तरजीह दे रहे ह। इधरउधर खूब घूम रहे ह। भागदाड कर रहे ह। उनकी इस सकियता से मीडिया का उन पर अपने आप फोस बना हआ ह। वे हाडकोर राजनीति कम भागमभाग अधिक कर रहे ह। जसे दीि के विधायकों से मिलने दीि की विधानसभा में जाना ह। दीि में भाजपा के २० विधायक ह, इनसे वे देश या केींय मुयालय में भी मिल सकते थे, पर विधानसभा जाने का ऐलान कर उहोंने मीडिया का फोस बनवाया।
इसी तरह दीि विववािलय में जाकर फकटी आफ आटस में विवेकानद की मूति पर माला चढाने का उनका ाेगाम था। युवा दिवस पर इस तीकामक पहल का अपना महव ह। दीि विववािलय किसी जमाने में एबीवीपी का गढ था, पर पिछले कइ सालों से कागेस के छा सगठन एनएसयूआइ ने वहा दबदबा बनाया ह। मुबइ में देशों के सगठन मयाेिं की बठक का हा भी भागमभाग की हवा बनाने वाला ह। कुल मिलाकर गडकरी ने मुबइ, नागपुर आर दीि के काेिण में भागदोड से अपनी मेहनत की एक हवा बनाइ ह।
सुतानपुर में किसने हरवाया ?
कागेस नेता विधान परिषद चुनाव में सुतानपुर की हार को पचा नहीं पा रहे ह। रायबरेली की सीट जीत कर कागेस ने किसी तरह से इात बचाइ। पर राहल गाधी के अमेठी क्षे जिले की परिषद सीट पर कागेस चाथे नबर पर चली जाए, यह कागेस के मिशन २०१२ को एक भारी झटका ह। इस वजह से पार्टी में यह खोज तेज हो गइ ह कि कागेस के अधिकत उमीदवार जगदीश सिंह को किसने हराया। शक की सुइ सुतानपुर के कागेस सासद सजय सिंह पर जाकर टिकी ह।
जानकार सूाें के मुताबिक सजय सिंह सुतानपुर के बसपा उमीदवार अशोक सिंह को हर हाल में हराना चाहते थे, योंकि अशोक सिंह के भाइ आर यूपी के परिवहन मी विनोद सिंह से उनकी झगडा ह। अशोक सिंह को हराने के लिए सजय सिंह ने आखिरी व में सपा उमीदवार शलें सिंह को समथन दे दिया। इसका नतीजा यह हआ कि कागेस के जगदीश सिंह बिकुल अकेले पड गए। उहोंने थानीय निकायों के तिनिधियों के दो हजार वोट में से सिफ ९३ वोट मिले आर चाथे थान पर रहे। अब कागेस नेता यह आरोप भी लगा रहे ह कि शु से ही सजय सिंह यह सीट हारना चाहते थे, तभी उहोंने कमजोर उमीदवार खडा कराया था।
