स्टेन के कहर से भारत फालोआन के बाद संकट में
नागपुर । डेल स्टेन की कहर बरपाती गेंदबाजी से भारत को सस्ते में समेटकर फालोआन के लिये मजबूर करने वाले दक्षिण अफ्रीका ने दूसरी पारी में भी चोटी के दो विकेट निकालकर पहले टेस्ट क्रिकेट मैच पर आज यहां तीसरे दिन मजबूत शिकंजा कस दिया।
दक्षिण अफ्रीका ने अपनी पहली पारी छह विकेट पर ५५८ रन पर समाप्त घोषित कर दी थी, जिसके जवाब में भारतीय टीम २३३ रन पर ढेर हो गयी और फालोआन के बाद उसने तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक अपनी दूसरी पारी में दो विकेट पर ६६ रन बनाये।
पहली पारी में ३२५ रन से पिछ़डने वाले भारत को अब भी पारी की हार से बचने के लिये २५९ रन की दरकार है और उसका काफी दारोमदार अनुभवी सचिन तेंदुलकर पर टिका हुआ है, जो १५ रन बनाकर खेल रहे हैं। उनके साथ दूसरे छोर पर ख़डे मुरली विजय ने २७ रन बनाये हैं। मैच का तीसरा दिन भी दक्षिण अफ्रीका विशेषकर स्टेन के नाम रहा, जिन्होंने अपने कैरियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पहली पारी में ५१ रन देकर सात विकेट लिये। उनके इस प्रदर्शन से वीरेंद्र सहवाग की १०९ रन की पारी भी फीकी प़ड गयी। सहवाग और अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे एसब्रदीनाथ (५६) के बीच चौथे विकेट के लिये १३६ रन की साझेदारी से भारत एक समय वापसी की स्थिति में दिख रहा था, लेकिन तीसरे सत्र में मैच पूरी तरह से दक्षिण अफ्रीका के शिकंजे में चला गया। भारत ने चाय के विश्राम के बाद १२ रन के अंदर अंतिम छह विकेट गंवा दिये, जिनमें से पांच विकेट स्टेन को मिले।
दक्षिण अफ्रीकी विकेटकीपर मार्क बुचर घायल होकर मैदान से बाहर चले गये थे, लेकिन उसके गेंदबाज हावी थे और ऐसे में ग्रीम स्मिथ ने भारत को फालोआन के लिये बुलाने का फैसला करने में कोई देर नहीं लगायी। स्टेन और नयी गेंद के उनके साथी मोर्ने मोर्कल ने २४ रन के स्कोर तक दोनों सलामी बल्लेबाजों गौतम गंभीर और सहवाग को पवेलियन भेजकर अपने कप्तान का फैसला भी सही साबित कर दिया।
दुनिया का नंबर एक बल्लेबाज गंभीर (१२ और एक रन) दोनों पारियों में असफल रहा। सुबह मोर्कल की पहली गेंद पर विकेटकीपर को कैच थमाने वाले गंभीर ने दूसरी पारी में इसी गेंदबाज की कोण बनाती गेंद छ़ोडने की गलती की जो उनके आफ स्टंप की गिल्ली ले उ़डी। सहवाग (१६) दिन में दूसरी बार पराक्रम दिखाने में असफल रहे और स्टेन की बाहर निकलती गेंद पर ड्राइव करने के प्रयास में पहली स्लिप में स्मिथ को कैच दे बैठे। स्टेन ने तेंदुलकर के खिलाफ पहली गेंद पर ही पगबाधा की जोरदार अपील की, लेकिन अंपायर ने उसे ठुकरा दिया और इसके बाद इस स्टार बल्लेबाज ने बेहद सजगता दिखायी। विजय ने कुछ ढीली गेंदों पर शाट जरूर जमाये, लेकिन उनकी प्राथमिकता भी रन बनाना नहीं बल्कि विकेट बचाना ही रहा।
इससे पहले सुबह भारत की शुरुआत ही खराब रही और उसने जल्द ही तीन विकेट गंवा दिये। सहवाग ने बद्रीनाथ ने कुछ देर तक विकेट गिरने का क्रम रोका, लेकिन राहुल द्रव़िड और वीवीएस लक्ष्मण जैसे अनुभवी बल्लेबाजों की अनुपस्थिति में भारतीय मध्यक्रम की कमजोरी खुलकर सामने आ गयी। गंभीर पहली गेंद पर आउट हुए तो विजय भी स्टेन की स्विंग लेती गेंद को छ़ोडकर बोल्ड होकर पवेलियन लौटे। इस तेज गेंदबाज ने इसके बाद तेंदुलकर (०७) को भी अधिक देर नहीं टिकने दिया जो उनकी आउटस्विंगर पर आगे ब़ढकर शाट लगाने के प्रयास में विकेट के पीछे बाउचर को कैच थमा बैठे। भारत का स्कोर तीन विकेट पर ५६ रन हो गया, जिसके बाद सहवाग और बद्रीनाथ स्कोर को १९२ रन तक ले गये। सहवाग ने बिना किसी दबाव के बल्लेबाजी की और १३४ गेंद पर अपना १८वां टेस्ट शतक पूरा किया। वह दूसरे सत्र के पहले ड्रिंक्स ब्रेक के तुरंत बाद
वायने पार्नेल की गेंद पर स्लैश करके डीप कवर पर जेपी डुमिनी को आसान कैच थमाकर दक्षिण अफ्रीका को इनाम में विकेट देकर पवेलियन लौटे।
सहवाग ने १३९ गेंद खेली तथा १५ चौके लगाये। बद्रीनाथ ने इसके बाद अपना पहला टेस्ट अर्धशतक पूरा किया, लेकिन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी किसी भी समय सहज होकर नहीं खेल पाये। चाय के विश्राम के बाद दक्षिण अफ्रीका ने धोनी के विकेट से ही भारतीय पारी के पतन की कहानी लिखी।
अपने पहले रन के लिये १५ गेंद खेलने वाले धोनी ने पाल हैरिस की गेंद पर जाक कैलिस को कैच थमाया, जिसके बाद स्टेन ने बचे हुए पांचों बल्लेबाजों को आउट करने में देर नहीं लगायी। उन्होंने अगले ओवर में ही बद्रीनाथ के एकाग्रता भंग की और फिर अपना पहला मैच खेल रहे वृद्धिमान साहा को बोल्ड करके उन्हें खाता भी नहीं खोलने दिया। स्टेन ने पिछल्लगू बल्लेबबाज जहीर खान, अमित मिश्रा और हरभजन सिंह को भी अपना शिकार बनाकर अपने कैरियर में पहली बार पारी में सात विकेट लिये।
