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लक्ष्मण रेखा पार न करें राजपाल और प्रभजोत : हरेन्द्र

Swatantra Vaartha  Fri, 12 Feb 2010, IST

लक्ष्मण रेखा पार न करें राजपाल और प्रभजोत : हरेन्द्र

नई दिल्ली। भारतीय हॉकी टीम के कोच हरेन्द्र सिंह ने कहा है कि राजपाल सिंह और प्रभजोत सिंह को कप्तानी को लेकर बयान देने बंद करने चाहिये और उन्हें इस मामले पर लक्ष्मण रेखा पार नही ंकरनी चाहिये।

हरेन्द्र ने आज यहां संवाददाताआें के सवालों की बौछारों के बीच कहा कि चयनकर्ताआें,सरकारी पर्यवेक्षक और की इंडिया ने कप्तान के रूप में राजपाल सिंह का फैसला कर लिया है, जिसे सभी खिला़डयों को मानना चाहिये और इसे अनावश्यक तूल नहीं दिया जाना चाहिये। भारतीय टीम के नेशनल स्टेडियम में चल रहे अभ्यास को कवर करने के लिये मीडिया को सुरक्षा के नाम पर स्टेडियम में प्रवेश न करने देने से उठे विवाद के बाद मीडिया से पहली बार रूबरू होते हुए हरेन्द्र को पत्रकारों के सवालों की क़डी परीक्षा से गुजरना प़डा, लेकिन उन्होंने ब़डे ही ‘कूलकूल’ अंदाज में सभी सवालों के जवाब दिये।

कप्तानी को लेकर टीम में दो गुट हो जाने के बारे में पूछने पर हॉकी इंडिया के मीडिया सलाहकार अनुपम गुलाटी के साथ बैठे हरेन्द्र ने कहा कि जो फैसला कर लिया गया है उसे हम सभी को मानना चाहिये। हमारा काम इन मुद्‌दों पर नहीं बल्कि अपने खेल पर ध्यान देना है। यदि किसी को कोई आपत्ति है,तो वह इसे हॉकी इंडिया को बताये। हरेन्द्र ने साथ ही कहा कि राष्ट्रीय कोच होने के नाते मैंने राजपाल और प्रभजोत दोनों को समझाया है कि वे अनावश्यक विवाद ख़डा नहीं करें और विश्व कप पर ध्यान दें।

उल्लेखनीय है कि २८ फरवरी से होने वाले विश्वकप के लिये राजपाल को कप्तान बनाया गया है,लेकिन मुख्य कोच जोसे ब्रासा और खिला़डयों का एक वर्ग प्रभजोत को कप्तान के रूप में चाहता है। इसी कारण टीम के दो हिस्सों में बंट जाने की खबरें मीडिया के जरिये सामने आ रही हैं।


हरेन्द्र ने हालांकि टीम में कप्तानी के मुद्‌दे को लेकर किसी तरह के विभाजन की बात से इंकार किया। उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा कुछ नजर नहीं आता है। लोकतांत्रिक देश होने के नाते हर किसी को अपनी बात कहने की आजादी होती है। लेकिन हमारे चाहने या न चाहने से कुछ नहीं होता है। कप्तान का चयन ऊपर से हुआ है और उन्हें जो ठीक लगता है उन्होंने वहीं फैसला किया हैं। गुलाटी ने भी हरेन्द्र के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि यह अध्याय अब खत्म हो चुका है। कोच ने कहा कि १३ अक्टूबर २००८ को मेरा बयान था कि हिन्दुस्तान को कप्तान की जरूरत नहीं है,बल्कि १६ खिलाडियों को नेतृत्व देखना चाहिए। मैं आज भी इस बयान पर कायम हूं। हरेन्द्र ने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन जैसा महान खिल़ाडी महेन्द्र सिंह धोनी की कप्तानी में बिना किसी परेशानी के खेलता है,तो भारतीय हॉकी टीम में यह विवाद क्यों उठता है।

उन्होंने हाकी के महान खिल़ाडी धनराज पिल्लै का भी उदाहरण देते हुए कहा कि वह चार ओलंपिक खेले,लेकिन किसी में भी कप्तान नहीं बने। इससे उनकी महानता पर तो कोई असर नहीं प़डा।

टीम के प्रशिक्षण और विश्व कप की संभावनाआें के बारे में पूछने पर हरेन्द्र ने कहा कि मैं तीन विश्व कप कवर कर चुका हूं और अपने अनुभव के आधार पर दावा कर सकता हूं कि टीम अच्छी पोजीशन हासिल करेगी।

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