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आक्रामक फार्म ही दअफ्रीका के खिलाफ दिलायेगी सफलता : यूसुफ

Swatantra Vaartha  Thu, 18 Feb 2010, IST

आक्रामक फार्म ही दअफ्रीका के खिलाफ दिलायेगी सफलता : यूसुफ

नई दिल्ली। घरेलू टूर्नामेंट में आक्रामक फार्म में चल रहे आल राउंडर यूसुफ पठान को पूरी उम्मीद है कि वह टीम इंडिया में शामिल किये जाने के इस मौके का पूरा फायदा उठायेंगे और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ २१ फरवरी से शुरू होने वाली एक दिवसीय श्रृंखला में बेहतरीन प्रदर्शन कर मेजबान टीम को जीत की ओर अग्रसर करेंगे।

यूसुफ ने कल विजय हजारे ट्राफी में महाराष्ट्र के खिलाफ ४० गेंद में शतक ज़डकर घरेलू टूर्नामेंटों के इतिहास में दर्ज करा लिया और अपनी टीम को जीत दिलायी। वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में तीसरा सबसे तेज सैक़डा ज़डने वाले खिल़ाडी बने। इसके बाद ही यूसुफ को टीम में शामिल होने की खबर मिली।

इस २७ वर्षीय खिल़ाडी ने ब़डौदा से भाषा को कहा कि टीम में चुने जाने से काफी खुश हूं। मेरा प्रदर्शन भी काफी अच्छा रहा। उन्होंने हाल में दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ दलीप ट्राफी में भी ५३६ रन के रिकार्ड लक्ष्य का पीछा करते हुए १९० गेंद में नाबाद २१० रन की मैच विजेता पारी खेलकर पश्चिम क्षेत्र को जीत दिलाकर रिकार्ड बुक में नाम दर्ज कराया था। निश्चित रूप से इस प्रदर्शन के बूते ही चयनकर्ताआें का ध्यान आकर्षित करने में सफल रहे।

यह पूछे जाने पर कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उनकी रणनीति क्या होगी तो यूसुफ ने कहा कि टेस्ट और वनडे का खेल अलग होता है। मैं सिर्फ प्रदर्शन को ही तवज्जो देता हूं। घरेलू टूर्नामेंटों में काफी ब़ढया खेल रहा हूं और इसी फार्म को बरकरार रखते हुए खेलूंगा। यूसुफ ने अपना अंतिम एक दिवसीय मैच पिछले साल आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी में खेला था। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे श्रृंखला शुरू होने से पहले जो रणनीति बनेगी, उसी के अनुसार खेलूंगा। अभी मैं अच्छी फार्म में चल रहा हूं और मुझे पूरा भरोसा है कि मेहमान टीम के खिलाफ भी अपने इसी अंदाज में खेलकर अपनी जगह पक्की करने की कोशिश करूंगा। यह आल राउंडर घरेलू टूर्नामेंट के प्रदर्शन से खुद पर लगे ‘टी२० टैग’ से काफी खुश हैं और मानता है कि अच्छे प्रदर्शन के बूते ही वह वनडे टीम में वापसी कर पाया।

हालांकि यूसुफ को चयनकर्ताआें ने कई बार मौका दिया है और वह इसे भुनाने में चूक जाते हैं। वह खुद भी इस बात से वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि मैं आपकी बात समझ रहा हूं, लेकिन मैं सिर्फ अपने खेल पर ही ध्यान लगाना चाहता हूं। आलोचकों का काम होता है आलोचना करना और मैं सिर्फ अपने प्रदर्शन से उन्हें चुप करने में विश्वास रखता हूं।

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