देश में अच्छे तेज गेंदबाज कोचों की कमी : प्रभाकर
नई दिल्ली। स्विंग के सुल्तान कहे जाने वाले पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज मनोज प्रभाकर का मानना है कि देश में तेज गेंदबाजी के क्षेत्र में पर्याप्त प्रतिभाएं हैं,लेकिन अच्छे कोचो के अभाव में ये प्रतिभाएं निखर नहीं पाती हैं।
प्रभाकर ने कहा कि युवा तेज गेंदबाजों को निखारने में कोच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जो उसे बता सकता है कि वह अपने एक्शन और गेंद की लाइन लेंथ में कहां गलती कर रहा है। वह स्विंग कैसे सीख सकता है और बल्लेबाज को रोकने के लिए अपनी गेंदबाजी में कितने हथियार शामिल कर सकता है। लेकिन दिक्कत यह है कि मौजूदा समय में हमारे कोच किताबी ज्ञान ज्यादा रखते हैं लेकिन वे व्यवहारिक नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति राज्यों में चल रही अकादमियों में ही नहीं,बल्कि राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में भी है जहां ऐसे कोच रख दिए जाते हैं,जिनमें असल कोच का हुनर नहीं होता है। वे केवल परीक्षा पास कर कोच बन जाते हैं। प्रभाकर ने कहा कि हम तेज गेंदबाज चुनते हैं और उन्हें तराशने के
लिए एनसीए में भेजा जाता हैं, लेकिन वहां स्थिति यह होती है कि गेंदबाज आगे ब़ढने की बजाए पीछे खिसक जाता है। न उसकी गति में सुधार आ पाता है और न ही वह स्विंग के गुर सीख पाता है। बीसीसीआई को चाहिए कि वह कोचों के लिए कुछ नियम कायदे बनाए और जो कोच इन नियमों पर खरा उतरे उसी को अकादमी में रखा जाए।
मौजूदा समय में राजस्थान के क्रिकेट कोच प्रभाकर ने कहा कि एक प्रतिभाशाली क्रिकेटर अच्छा कोच हो यह नहीं हो सकता। सचिन तेंदुलकर महान बल्लेबाज हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह भविष्य में कभी महान कोच भी बन सकें। कोच वही अच्छा होता है जो निचले स्तर से ऊपर तक पहुंचा हो, जिसने ११५ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से शुरुआत कर १४० किलोमीटर प्रति घंटे की गति हासिल की हो। उसे ही यह पता हो सकता है कि किस स्तर पर गेंदबाज को सुधारना है।
पूर्व तेज गेंदबाज ने इशांत शर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि इशांत ने जब अपनी शुरुआत की थी तो वह १३० किलोमीटर के आसपास की रफ्तार से गेंद फेंकते थे, लेकिन आस्ट्रेलिया में अनूकुल पिचों पर उन्होंने १४५ किलोमीटर की रफ्तार से भी गेंदें डाली। मगर यही गेंदबाज अब अपनी स्वभाविक इनस्विंग और गति दोनों ही खो चुका है। यही कारण है कि उनके प्रदर्शन में लगातार गिरावट आ रही है, लेकिन उन्हें सुधारने या उनकी गलती बताने के लिए टीम इंडिया के पास दीर्घकालिक कोच नहीं है। संक्षिप्त अवधि के लिए कोच रखकर आप किसी भी खिल़ाडी के प्रदर्शन में सुधार नहीं कर सकते।
प्रभाकर ने कहा कि दो चार सप्ताह में कोई भी कोच किसी खिल़ाडी के खेल में परिवर्तन नहीं ला सकता। इशांत के लिए उन्होंने कहा कि उन्हें पता होना चाहिए कि वह कहां गलती कर रहे हैं। यदि वह अपनी गेंदबाजी में सुधार नहीं करेंगे, तो उनका वही हाल होगा जो आरपीसिंह और इरफान पठान जैसे गेंदबाजों का हुआ। उन्होंने साथ ही कहा कि खराब फार्म में होने के बावजूद इशांत को बार बार खेलाकर उनका उल्टे नुकसान ही किया जा रहा है जबकि होना यह चाहिए कि वह घरेलू क्रिकेट में लौटे और अपनी गेंदबाजी में सुधार कर फिर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाएं।
