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आयोजन की दृष्टि से अब तक का बदतरीन विश्व कप : परगट

Swatantra Vaartha  Tue, 23 Feb 2010, IST

आयोजन की दृष्टि से अब तक का बदतरीन विश्व कप : परगट

नई दिल्ली। विश्व कप की आयोजन समिति को जमकर लत़ाडते हुए पूर्व ओलंपियन परगट सिंह ने आज कहा कि उन्होंने किसी खेल में इतना बदतर आयोजन नहीं देखा और इससे अक्टूबर में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की भारत की क्षमता पर सवालिया निशान लग सकता है।

परगट ने यहां पत्रकारों से कहा कि ऐसी आयोजन समिति दुनिया में मैंने कहीं नहीं देखी। २९ साल बाद देश में विश्व कप हो रहा है लेकिन मीडिया हो या टीम, आयोजकों का बर्ताव किसी के साथ सही नहीं है। मैचों की टिकटें नहीं मिल रही। लगता है कि आयोजकों को किसी किस्म का अनुभव नहीं है। भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलम़ाडी को खेल माफिया कहने वाले इस पूर्व कप्तान ने उन्हें एक बार फिर आ़डे हाथों लेते हुए कहा कि आईओए ने जब से हाकी की कमान संभाली है, इसका ब़ेडा गर्क हो गया है। सुरेश कलम़ाडी पूरी तरह से कसूरवार हैं। उन्होंने कहा कि इससे भारत की छवि खराब हो रही है और विडंबना यह है कि किसी को इसकी परवाह नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्व कप में १२ टीमें भाग ले रही है। उन पर क्या प्रभाव प़डेगा कि भारत में एक खेल का आयोजन ठीक से नहीं हो सकता तो राष्ट्रमंडल खेल कैसे सफल हो पायेंगे। विश्व कप के प्रायोजक बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने इतने विवादों के बावजूद इसका दामन नहीं छ़ोडा।

परगट ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय खेल को ताक पर रखकर आयोजक चुनावी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रीय संघों को पत्र लिखकर सूट का नाप मांगा गया है। जब मामला अदालत के विचाराधीन है तो यह पत्र कैसे लिखे जा सकते हैं। वहीं कलम़ाडी अपनी मर्जी से किसी को भी हाकी इंडिया का अध्यक्ष बना रहे हैं। यह राष्ट्रीय खेल है, किसी की जागीर नहीं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय हाकी महासंघ पर भी हमला बोलते हुए कहा कि उसका हाकी इंडिया के प्रति नरम रवैया समझ से परे है। उन्होंने कहा कि समझ में नहीं आता कि हाकी इंडिया ने एफआईएच से किया एक भी वादा नहीं निभाया, लेकिन वह फिर भी इस पर मेहरबान क्यों है। एफआईएच का रुख इस मामले में लचर रहा है। परगट ने कहा कि अपनी अकादमी के २०० बच्चों को वह मैच दिखाना चाहते थे, लेकिन टिकट खरीदने के लिये उन्हें दर दर भटकना प़ड रहा है।

उन्होंने कहा कि पूर्व ओलंपियनों को सम्मान देने की बात तो भूल जाइये। मैं अपनी अकादमी के २०० बच्चों को टिकट खरीदकर मैच दिखाना चाहता था लेकिन इसके लिये अधिकृत एजेंसी कम्यून को बार बार फोन करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिल रहा। खिला़डयों को पूरा ध्यान खेल पर फोकस करने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि उनका अच्छा प्रदर्शन ही भारतीय हाकी की डूबती नैया को बचा सकता है।

उन्होंने हालांकि चंडीग़ढ में चैरिटी मैच के लिये सीनियर खिला़डयों द्वारा पैसे मांगने की घटना की निंदा करते हुए कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो राष्ट्रीय सम्मान को भुलाकर इस तरह की मांग करना अक्षम्य है।

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