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भारत के लिये भाग्यशाली रहा है ग्वालियर का रुपसिंह स्टेडियम

Swatantra Vaartha  Tue, 23 Feb 2010, IST

भारत के लिये भाग्यशाली रहा है ग्वालियर का रुपसिंह स्टेडियम

ग्वालियर। भारत और दक्षिण अफ्रीका १९ साल बाद एक बार फिर ग्वालियर के उसी रुपसिंह स्टेडियम में आमनेसामने होंगे जहां का मैदान भारत के लिये भाग्यशाली साबित हुआ है।

तीन मैचों की एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय श्रृंखला का दूसरा मैच २४ फरवरी को यहां खेला जाएगा। इससे पहले १२ नवंबर १९९१ को दोनों टीमों के बीच खेले गये ४५ ओवर के मैच में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को ३८ रनों से पराजित किया था। उस मैच के भारतीय क्रिकेटरों में से केवल सचिव तेंदुलकर २४ फरवरी को होने जा रहे मैच में अपने जौहर दिखाते नजर आएंगे। वर्ष १९९१ के मैच में हालांकि सचिन अपनी आज की शोहरत के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए थे और केवल चार रन बनाकर आउट हो गये थे।

सचिन यहां अब तक आठ वनडे खेल चुके हैं। इस मैच की एक खासियत यह भी होगी कि दक्षिण अफ्रीका की टीम के तब के धुरंधर बल्लेबाज पीएन कर्सटन के भाई गैरी कर्सटन आज टीम इंडिया के कोच हैं और तत्कालीन कप्तान के वैसल्स आज की दक्षिण अफ्रीका टीम के साथ कोच की हैसियत से आए हैं। वर्ष १९९१ के मैच में वैसल्स ने ७१ रन बनाए थे और मैच हारने के बावजूद उन्हें ‘मैन आफ द मैच’ चुना गया था।

तब भारत की और से के श्रीकांत ने ६८ रन, नवजोत सिंह सिदू ने ६१ रन और संजय मांजरेकर ने ५२ रन (नाबाद) बना कर अर्धशतकीय पारियां खेलीं थी।

यह भी एक संयोग था कि १२ नवंबर १९९१ का अंतर्राष्ट्रीय मैच तब की सीरीज का दूसरा वन डे मैच था।

कैप्टन रुपसिंह स्टेडियम पर अब तक ११ अंतर्राष्ट्रीय मैच हो चुके हैं और २४ फरवरी को १२वां मैच होगा। अब तक के ११ मैचों में से नौ में भारत शामिल रहा है। उसका इस मैदान पर रिकार्ड बहुत अच्छा रहा है। उसने नौ में से सात मैच जीते हैं। टीम इंडिया यहां चार मार्च १९९३ और पांच मार्च १९९३ के मैचों में इंग्लैंड और २१ फरवरी १९९६ के मैच में वेस्टइंडीज को हराकर जीत की हैट्रिक बना चुकी है। हैट्रिक का यह सिलसिला उसने १९९१ में न्यूजीलैंड, १९९३ में आस्ट्रेलिया और २००७ में पाकिस्तान को हराकर कायम रखा है।

इन आंक़डों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि ग्वालियर का रुपसिंह स्टेडियम टीम इंडिया के लिए अब तक भाग्यशाली रहा है। १५ नवंबर २००७ के मैच में उसने पाकिस्तान को छह विकेट से करारी मात दी थी लेकिन २८ मई १९९८ को केन्या जैसी कमजोर टीम के हाथों टीम इंडिया की यहां ६९ रनों से हुई पराजय को भारतीय क्रिकेट टीम सपने में भी नहीं भुला पायी। रुपसिंह स्टेडियम रनों के लिए स्वर्ग कहा जा सकता है। यह बल्लेबाजों के लिए अभी तक सहायक सिद्ध हुआ है। १९९७ में पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच हुए एशियाई कप के मैच में ९९५ ओवर्स में ५४८ रन बने थे। इसी तरह भारत विरूद्ध इंग्लैंड मैच में ५३२, भारत विरूद्ध आस्ट्रेलिया मैच में ५२९, और भारत विरूद्ध पाकिस्तान मैच में ५१५ रनों के अंबार लगे थे।

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