सचिन भारत रत्न के हकदार : कपिल
नई दिल्ली। एकदिवसीय क्रिकेट में पहले दोहरे शतक समेत अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के कई रिकार्ड अपने नाम कर चुके सचिन तेंदुलकर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ का हकदार बताते हुए कपिल देव और अजित वाडेकर जैसे पूर्व कप्तानों ने कहा है कि क्रिकेट के इतिहास में ऐसा खिल़ाडी ना कभी हुआ है और ना होगा। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन (३१०४१) और शतक (९३) बनाने वाले तेंदुलकर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ग्वालियर में दूसरे मैच के दौरान वनडे क्रिकेट का पहला दोहरा शतक ज़डकर एक बार फिर क्रिकेट की रिकार्ड पुस्तिका में अपना नाम दर्ज करा लिया।
भारत को एकमात्र विश्व कप दिलाने वाले कप्तान कपिल ने संवाददाताआें से कहा कि बीस साल के अंतर्राष्ट्रीय कैरियर में सचिन ने जितने कीर्तिमान कायम किये हैं, निश्चित तौर पर वह भारत रत्न का हकदार है। हमें तो बहुत खुशी होगी अगर एक खिल़ाडी को देश का यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलता है। सबसे पहले यह मांग उठाने वाले पूर्व कप्तान वाडेकर ने कहा कि सचिन क्रिकेट का कोहिनूर हीरा है। उसके जैसा ना कोई हुआ है और ना ही होगा। उसे तो अभी तक भारत रत्न मिल जाना चाहिये था। उनके सुर में सुर मिलाते हुए पूर्व कप्तान और चयन समिति के अध्यक्ष रहे दिलीप वेंगसरकर ने भी कहा कि तेंदुलकर इस सम्मान को हासिल करने वाला पहला खिल़ाडी बन सकता है।
वेंगसरकर ने कहा कि निश्चित तौर पर अगर कोई खिल़ाडी इस सम्मान का हकदार है तो वह सचिन है। उसे भारत रत्न मिलना ही चाहिये। कपिल ने इस बात से इंकार किया कि २०० रन की उनकी रिकार्ड पारी के कारण यह मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि उस पारी में सचिन शून्य पर भी आउट हो जाता तो वह भारत रत्न का उतना ही हकदार होता। एक पारी के आधार पर कोई निर्णय बना लेना दुरुस्त नहीं है। मैं उसके समग्र कैरियर को देखते हुए यह बात कह रहा हूं।’
वाडेकर ने इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन की इस बात पर सहमति जताई कि तेंदुलकर महान बल्लेबाज सर डान ब्रैडमेन से भी बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि दुनिया का कोई बल्लेबाज सचिन से बेहतर है, ब्रैडमेन भी नहीं। सचिन ने तीनों प्रारूप (टेस्ट, वनडे और टी२०) में खेला है और तीनों में रिकार्ड बनाये हैं। उन्होंने दिन रात के मैच भी खेले हैं, जबकि ब्रैडमेन के दौर में ऐसा नहीं था। पूर्व कप्तान ने कहा कि तेंदुलकर का खेल के लिये जुनून एक मिसाल है और अभी भी युवा खिल़ाडी उनके सामने उन्नीस साबित होते हैं।
