दादाजी नहीं चाहते थे कि क्रिकेटर बनूं : अजहर
फरीदाबाद। पूर्व भारतीय कप्तान एवं मुरादाबाद के सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन ने कहा कि वह घरवालों के विरोध के बावजूद क्रिकेटर बने।
अजहर ने आज यहां विद्या संस्कार इंटरनेशनल स्कूल स्पोट्र्स अकादमी का उदघाटन करने के बाद संवाददाताआें से कहा कि मेरे घरवाले नहीं चाहते थे कि मैं क्रिकेटर बनूं। मेरे दादाजी तो इसके सख्त खिलाफ थे। दादाजी चाहते थे कि मैं प़ढाई करके बैंक की नौकरी करूं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता था कि वह एक अच्छे क्रिकेटर हैं और बाद में उनकी मेहनत रंग लाई। वनडे क्रिकेट में भारत के सबसे सफलतम कप्तान ने अजहर ने कहा कि मैं आज भी एक अपने को एक खिल़ाडी महसूस करता हूं। उन्होंने कहा कि वह आज भी सौ मीटर की दूरी बहुत कम समय में पूरी कर सकते हैं।
अकादमी के उदघाटन के मौके पर बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को इस अकादमी में खेल का ब़ढया वातावरण उपलब्ध कराया गया है और यहां हर प्रकार की सुविधाएं हैं। बच्चों के पास मौका है कि वे खेल के क्षेत्र में भी अपना कैरियर बना सकते हैं।
मुरादाबाद के सांसद अजहर को जब यह पता चला कि इस अकादमी में उनके संसदीय क्षेत्र के भी विद्यार्थी हैं, तो इस पर वह काफी प्रसन्न हुए। अजहर से जब यह पूछा गया कि क्या वे अपने बच्चों को क्रिकेटर बनाना चाहेंगे, तो उन्होंने कहा कि मैंने अपने बच्चों से स्पष्ट कह दिया है कि यदि वे क्रिकेट को लेकर सीरियस हैं,तो मैं उनकी मदद करने के लिए तैयार हूं अन्यथा मैं भी अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता और बच्चों का भी नहीं। इस अवसर पर स्पोट्र्स अकादमी के निदेशक एवं पूर्व भारतीय क्रिकेटर विजय यादव ने कहा कि इस स्पोट्र्स अकादमी में आकर मेरा सपना सच हो गया।
