ADVERTISEMENT

आपका वोट

क्या राहुल गांधी भ्रष्टाचार खत्म करेंगे?

  • सही
  • गलत
  • पता नहीं
और भी

फोटो दीर्घा

Share

परीक्षा से भय कैसा!

Swatantra Vaartha  Mon, 1 Mar 2010, IST

परीक्षा से भय कैसा!

प्रायः जनवरीफरवरी माह में छात्रछात्राएं खेलखूद व मौजमस्ती छ़ोडकर अपनी वार्षिक परीक्षाआें की तैयारी में जुट जाते हैं। बहुत से छात्रों को तो वार्षिक परीक्षा के नाम से ही क़डाके की ठंड में भी पसीने छूटने लगते हैं। दरअसल यही वह समय होता है, जब उनकी सालभर की प़ढाई का मूल्यांकन होना होता है, इसी परीक्षा की बदौलत उन्हें आगे की प़ढाई के लिए आधार मिलता है। हर साल फरवरीमार्च के महीने में १०वीं, १२वीं की बोर्ड परीक्षाएं होती हैं। कुछ छात्र तो इन परीक्षाआें की तैयारी में रातदिन इस कदर जुट जाते हैं कि उन्हें खानेपीने तक की सुध नहीं रहती। कई बार तो स्थिति यह हो जाती है कि खानपान के मामले में निरंतर लापरवाही बरतने के कारण स्वास्थ्य गिरता जाता है, जिसका सीधा प्रभाव उनकी स्मरण शक्ति पर प़डता है और नतीजा, परीक्षा की भरपूर तैयारी के बावजूद उन्हें आशातीत सफलता नहीं मिल पाती। विशाल शर्मा के साथ भी १२वीं की परीक्षा में यही हुआ।

विशाल बहुत होनहार छात्र था और पूरे जोरशोर से परीक्षा की तैयारी में जुटा था। प़ढाई में वह इस कदर मग्न था कि उसे खानेपीने का भी ध्यान न रहता। परिणामस्वरूप उसका स्वास्थ्य गिरता गया और परीक्षा के दिनों में वह बीमार प़ड गया। बीमारी में ही उसे परीक्षा देनी प़डी और शारीरिक व मानसिक अस्वस्थता की दशा में वह याद किए गए प्रश्नों के उत्तर भी भूल गया। इसका परिणाम यह रहा कि वह बामुश्किल फेल होते होते बचा और कामचलाऊ अंकों से ही परीक्षा उत्तीर्ण कर सका।

कहने का तात्पर्य यह है कि परीक्षा के दिनों में खूब मन लगाकर प़ढाई करना और क़डी मेहनत करना तो जरूरी है ही लेकिन प़ढाई के साथसाथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि अगर आपका शरीर ही स्वस्थ नहीं होगा तो आप परीक्षा की तैयारी बेहतर ढंग से मन लगाकर कैसे कर पाएंगे? परीक्षा में सफलताअसफलता को लेकर भी बहुत से छात्र तनावग्रस्त हो जाते हैं, और उनके मन में परीक्षा नजदीक आते ही बेचैनी सी छा जाती है। दरअसल ऐसे छात्र सालभर का समय तो मौजमस्ती में ही गुजार देते हैं और जब परीक्षाएं नजदीक आती हैं, तो उन्हें हौव्वा मानकर घबराने लगते हैं। इसके अलावा समय सारिणी बनाकर नियमित अध्ययन न करना भी उनके तनावग्रस्त होने का प्रमुख कारण होता है।

कुछ छात्र परीक्षा की तैयारी के लिए अपना कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं कर पाते और लक्ष्य निर्धारित न होने के कारण एकाग्रचित्त होकर परीक्षा की तैयारी नहीं कर पाते। ऐसे में परीक्षा को लेकर उनका चिंतित और तनावग्रस्त होना स्वाभाविक ही है, किन्तु परीक्षा के दिनों में जरूरत से ज्यादा तनावग्रस्त रहना निश्चित रूप से हानिकारक साबित होताहै। तनावग्रस्त रहने के कारण लाख कोशिशों के बाद भी प़ढाई में उनका मन नहीं लग पाता। अतः यह बेहद जरूरी है कि आप शुरू से ही प़ढाई के प्रति रुचि बनाए रखें, अपना लक्ष्य निर्धारित करें ताकि ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न ही न होने पाएं, जिनके कारण परीक्षा को हौव्वा मानकर आपको तनावग्रस्त रहना प़डे।

वही छात्र परीक्षाआें को हौव्वा मानते हैं, जो सालभर तो मौजमस्ती करते घूमते फिरते हैं और ठीक परीक्षा के मौके पर उन्हें किताबों की सुध आती है। तब उन्हें समझ ही नहीं आता कि परीक्षा की तैयारी कैसे और कहां से शुरू की जाए। इसी ह़डब़डी तथा तनाव के चलते वे परीक्षा में पिछ़ड जाते हैं। यदि आपने सालभर नियमित रूप से मन लगाकर प़ढाई की है, तो कोई कारण नहीं, जो परीक्षा से आपको किसी प्रकार का भय सताए।

अगर आप समय सारिणी बनाकर अध्ययनमनन करें, तो कठिन से कठिन विषय भी आपको आसानी से समझ में आ सकता है, लेकिन समय सारिणी बनाते समय इसमें सिर्फ अपने मनपसंद विषय को ही वरीयता न दें सभी विषयों पर बराबर ध्यान देेने का प्रयास करें बल्कि जिस विषय में आप स्वयं को कमजोर पाते हैं, उस पर कुछ ज्यादा ध्यान केन्द्रित करें। घर का वातावरण तथा अभिभावकों की सजगता भी परीक्षा में छात्रों की सफलताअसफलता का निर्धारण करने में अहम भूमिका निभाती है। यदि आप परीक्षा के खौफ से मुक्त होकर मन लगाकर परीक्षा की तैयारी करें, तो निश्चित रूप से सफलता आपके कदम चूमेगी।

आपकी राय