एफआइएच में भारत का परतिनिधि नहीं होना नुकसानदेह : शिवेंद्र
नइ दिलली, । विशव कप में दो मचों का निलबन झेल रहे भारत के टार फारवड शिवें सिंह ने एफआइएच में भारत का तिनिधिव नहीं होने को परोक्ष प से अहम कारण बताते हुए आज कहा कि उहें तो इसके लिये गीनकाड की भी आशका नहीं थी, लेकिन इतनी बडी सजा सुना दी गइ जिसका मलाल उहें ताउम रहेगा।
शिवें ने अपीली जूरी ारा दो मचों का निलबन सुनाये जाने के बाद सवाददाताआें से कहा कि म बता नहीं सकता कि कितना दुखी ह। मुझे तो गीनकाड की भी आशका नहीं थी,बकि मने उस घटना को नोटिस भी नहीं किया था। मच के बाद डिनर के समय कोचों ने मुझसे पूछा कि या मने फरीद अहमद को जान बूझकर चोट पहचाइ ह, तब मुझे इसके बारे में पता चला। उहोंने कहा कि कोचों ने ही मुझे बताया कि टूनामेंट निदेशक केन रीड ने मुझे सुबह सुनवाइ के लिए बुलाया ह। मने बाद में मच के फुटेज देखे, तो पाया कि खेल के दारान टिक उठ गइ ह, लेकिन मने जान बूझकर ऐसा नहीं किया था। उस खिलाडी ने पीछे से आकर मेरे पर पर चोट पहचाइ,तो मने अपना सतुलन बनाने के लिये हाथ हवा में उठाया, जिसमें उसे शायद टिक लग गइ। लेकिन खेल में ऐसा होता है।
शिवें ने कहा कि फरीद को बाद में खिलाडियों ने देखा तो वह एकदम सामाय था। उसे इतनी चोट नहीं लगी थी, लेकिन सजा सुनाते समय इसे यान में नहीं रखा गया। यह पूछने पर कि या एशियाइ खिलाडियों के साथ सातेला बताव किया जाता है, उहोंने कहा कि म नहीं जानता कि भारतीय या एशियाइ खिलाडियों के साथ सातेला बताव किया जाता ह या नहीं, लेकिन यदि एफआइएच में भारत का कोइ तिनिधि होता, तो शायद हालात दीगर होते।
