भारत के लिए करो या मरो का मुकाबला
नई दिल्ली। पहले मैच में धमाकेदार जीत के बाद आस्ट्रेलिया के हाथों करारी हार झेलने वाली भारतीय हॉकी टीम को विश्व कप में अपनी चुनौती बरकरार रखने के लिये कल स्पेन के खिलाफ पूल ‘बी’ का अहम मैच हर हालत में जीतना होगा। पहले मैच में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को ४१ से हराने के बाद आस्ट्रेलिया ने दूसरे मैच में कोच जोस ब्रासा की टीम के पैर जमीन पर ला दिये।
आस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में भारतीय दमखम और रफ्तार के मामले में उन्नीस साबित हुए और मिडफील्ड भी बिखरा हुआ नजर आया। अपनी लय के लिये जानी जाने वाली स्पेनिश टीम के सामने भी भारतीय टीम इत्मीनान की सांस नहीं ले सकती। उसे उन गलतियों को दोहराने से बचना होगा, जो आस्ट्रेलिया के खिलाफ की थी। कल के मैच में हार से भारत के लिये सेमीफाइनल में प्रवेश की डगर बेहद मुश्किल हो जायेगी। आस्ट्रेलियाई के खिलाफ भारतीय डिफेंडरों ने पहले दस मिनट में दो गोल गंवा दिये। संदीप सिंह की अगुवाई में बैकलाइन के पास आस्ट्रेलिया की रफ्तार और बेहतरीन मूव का कोई जवाब नहीं था।
भारतीय कोच ब्रासा को स्वीकार करना प़डा कि उनकी टीम को इस तरह की तेज हॉकी खेलने की आदत नहीं है। ब्रासा ने कहा कि हमने उतना बुरा नहीं खेला। हमने साल्टा की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। लेकिन आस्ट्रेलिया काफी तेज हॉकी खेलता है। हम इस तरह की हॉकी खेलने के आदी नहीं है। दो मैचों का निलंबन झेल रहे शिवेंद्र सिंह की कमी भारतीयों को बुरी तरह खली। प्रभजोत सिंह और दीपक ठाकुर भी खराब फार्म में दिखे।
शिवेंद्र का निलंबन इस मैच में भी लागू रहेगा। दीपक, प्रभजोत और कप्तान राजपाल सिंह को स्पेनिश डिफेंस में सेंध लगाने के लिये नये तरीके तलाशने होंगे। ब्रासा ने कहा कि शिवेंद्र के बिना सिर्फ १५ खिला़डयों के साथ खेलने का हमें काफी नुकसान हुआ। इससे रोटेशन के विकल्प कम हो गए। आस्ट्रेलिया के खिलाफ संदीप तीन में से एक भी पेनल्टी कार्नर तब्दील नहीं कर सके ।इस ड्रैग फ्लिकर को अब स्पेन के खिलाफ साबित करना होगा कि वह मैच विनर खिल़ाडी हैं। ब्रासा ने कहा कि आस्ट्रेलिया के खिलाफ हम पेनल्टी कार्नर तब्दील नहीं कर सके। यही वजह है कि गोलों का अंतर कम नहीं हुआ। भारतीयों को इस मैच में छोटे छोटे पास देने की तरकीब से भी काम करना होगा। ज्यादा देर तक गेंद पक़डकर रखने की गलती का खामियाजा टीम ने भुगता है। भारत के लिये दूसरे मैच में राहत की बात अर्जुन हलप्पा और सरदार सिंह का शानदार फार्म था जिन्होंने प्लेमेकर की भूमिका बखूबी निभाई। उन्हें फारवर्ड पंक्ति से पूरा सहयोग नहीं मिला।
