शिवेन्द्र की वापसी से भारत के इंग्लैंड के खिलाफ हौसले बुलंद
नई दिल्ली। स्ट्राइकर शिवेन्द्र सिंह के दो मैचों का प्रतिबंध पूरा होने के बाद कल इंग्लैंड के खिलाफ टीम में लौटने से भारतीय टीम के हौसले काफी बुलंद हैं।
शिवेन्द्र को पाकिस्तान के खिलाफ पहले मैच में अपनी स्टिक से एक विपक्षी को आंख के ऊपर चोट पहुंचाने के कारण टूर्नामेंट डायरेक्टर केन रीड ने तीन मैचों के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। भारत ने इसके खिलाफ अपील की थी, जिस पर सजा तीन मैचों से घटाकर दो मैच कर दी गई थी। शिवेन्द्र दो मैचों के प्रतिबंध के कारण आस्ट्रेलिया और स्पेन के खिलाफ मुकाबलों में नहीं खेल पाए थे और भारत ये दोनों मैच २५ के अंतर से हार गया था। शिवेन्द्र के इन दो मैचों में न खेल पाने पर भारतीय कोच होजे ब्रासा, कप्तान राजपाल सिंह ने एक स्वर में कहा था कि टीम की फारवर्ड लाइन में शिवेन्द्र की कमी काफी महसूस हुई थी। यह बात भी सही है कि शिवेन्द्र की अनुपस्थिति में भारत के हमलों में कमी आई थी और जिस तरह का अटैक भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जताया था वैसा अटैक वह आस्ट्रेलिया और स्पेन के खिलाफ नहीं दिखा सका। भारत के लिए इंग्लैंड के खिलाफ मैच खासा महत्वपूर्ण है और यह देखना दिलचस्प होगा कि शिवेन्द्र दो मैचों का प्रतिबंध पूरा करने के बाद टीम में लौटकर कैसा प्रदर्शन कर पाते हैं और टीम उनकी मौजूदगी से अपना मनोबल कितना ऊपर कर पाती है।
शिवेन्द्र के आने से टीम के हौसले बुलंद हों,लेकिन आंक़डे मेजबान टीम के खिलाफ हैं। भारत पिछले १६ वषा] से इंग्लैंड को विश्व कप के मुकाबलों में नहीं हरा पाया है। दोनों टीमों के बीच विश्व कप में अब तक छह बार मुकाबला हुआ,जिसमें भारत तीन बार जीता है और दो बार जीत इंग्लैंड के हाथ लगी है। इंग्लैंड ने भारत से विश्व कप में पिछले दो मुकाबले जीते हैं। इंग्लैंड ने २००२ के विश्व कप में और फिर २००६ के विश्व कप में भारत को ३२ के अंतर से हराया था। भारत की इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप में आखिरी जीत १९९४ के टूर्नामेंट में थी, जिसमें भारत ने पांचवें से छठे स्थान के मुकाबले में इंग्लैंड को १० से पराजित किया था। विश्व कप में इंग्लैंड पर भारत की सबसे ब़डी जीत मुंबई में अपनी मेजबानी में हुए विश्व कप में थी। तब भारत मुकाबला ४२ से जीता था।
