भारत रोमांचक संघर्ष में इंग्लैंड से हारा
नई दिल्ली,। भारत ने तीन मिनटों के अंतराल में दो गोल करते हुए इंग्लैंड के खिलाफ पूल ‘बी’ मैच में वापसी करने की भरपूर कोशिश की, लेकिन इंग्लैंड ने मेजबान टीम की क़डी चुनौती पर आज रात ३२ से काबू पाते हुए हॉकी विश्व कप टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया।
इंग्लैंड की यह लगातार चौथी जीत है और वह १२ अंकों के साथ विश्व कप के सेमीफाइनल में प्रवेश करने वाली पहली टीम बन गई। भारत अपनी तीसरी पराजय के साथ अब पांचवें और छठे स्थान की ह़ोड से बाहर हो गया है। भारत के चार मैचों से सिर्फ तीन अंक हैं।
विश्व कप में छुपा रुस्तम बन चुकी इंग्लैंड की टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन का सिलसिला बरकरार रखते हुए मेजबान टीम का भी शिकार कर डाला। विजेता टीम आधे समय तक १० से आगे थी। दूसरे हाफ में इंग्लैंड ने दो गोल और करते हुए ३० की ब़ढत बना दी, लेकिन मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में खचाखच भरे १५ हजार दर्शकों के समर्थन से उत्साहित होकर भारत ने तीन मिनट के अंतराल में दो गोल ठोक डाले।
गुरविंदर सिंह चांडी ने ५४वें मिनट और कप्तान राजपाल सिंह ने ५७वें मिनट में गोल कर स्कोर २३ कर दिया। उस समय ऐसा लगने लगा था कि जोश के समंदर पर सवार भारतीय टीम वापसी करने में कामयाब हो जाएगी और मैच में बराबरी हासिल कर लेगी, लेकिन इंग्लैंड ने भारतीय हमलों का बखूबी बचाव किया व अपनी ब़ढत को हाथों से फिसलने नहीं दिया। कप्तान राजपाल के पास मैच के अंतिम मिनट में बराबरी करने का सुनहरा मौका था, मगर अर्जुन हलप्पा के दाएं छोर से मारे गए बेहतरीन क्रास को वह गोल के सामने ट्रैप नहीं कर पाए। भारत को इस तरह आस्ट्रेलिया, स्पेन और इंग्लैंड के खिलाफ लगातार तीन पराजय झेलनी प़डी। इस पराजय ने भारत की पांचवें और छठे स्थान के लिए खेलने की उम्मीदों को भी त़ोड दिया।
भारत ने आस्ट्रेलिया व स्पेन के मुकाबले इस मैच में कहीं ज्यादा बेहतर प्रदर्शन दिखाया। पहले हाफ में जरूर भारतीय टीम का खेल उख़डा रहा था, लेकिन दूसरे हाफ के अंतिम २० मिनट में भारतीय फारवडा] ने इंग्लैंड की रक्षापंक्ति को लगातार हमलों से झकझोर कर रख दिया। दो मैचों का प्रतिबंध झेलने के बाद टीम में लौटे स्ट्राइकर शिवेन्द्र सिंह ने दूसरे हाफ में अपनी लय में लौटते हुए हमलों को गति दी। चांडी, गुरबाज सिंह व कप्तान राजपाल ने काफी प्रभावशाली खेल दिखाया, लेकिन स्ट्राइकर प्रभजोत सिंह ने एक बार फिर निराश किया। कोच होजे ब्रासा लगातार साइडलाइन के पास डटे रहकर टीम का हौसला ब़ढा रहे थे, लेकिन टीम को जो एक अंतिम पुश मारना चाहिए था वह उसमें कामयाब नहीं हो सकी। भारत के सरदार सिंह को ६७वें मिनट में और गुरबाज सिंह को ६९वें मिनट में पीला कार्ड दिखाकर बाहर भेजा गया।
टीम अपनी परंपरागत आसमानी रंग की ड्रेस को छ़ोडकर इस बार सफेद ड्रेस में मैच खेलने उतरी,लेकिन इंग्लैंड ने आक्रामक शुरुआत की और १६वें मिनट में जेम्स टिंडल के गोल से ब़ढत बना ली। निक केटलीन ने बाएं छोर से टिंडल को डी में पास दिया और उन्होंने गेंद को खुले गोल में पहुंचाने में कोई गलती नहीं की। भारतीय रक्षापंक्ति ने अपना गोल खुला छ़ोडने की एक बार फिर कीमत चुकाई।
पहले हाफ के १२वें मिनट में संदीप सिंह ने और ३२वें मिनट में धनंजय महादिक ने दो पेनल्टी कार्नर बर्बाद किए। दूसरे हाफ के ४०वें मिनट में राजपाल के पास एक बेहतरीन मौका था, मगर डी में उनका अपनी जगह से घूमकर मारा गया शॉट गोलपोस्ट के बिल्कुल पास से निकट गया। इसके दो मिनट बाद इंग्लैंड को अपने जवाबी हमले में मैच का पहला और एकमात्र पेनल्टी कार्नर मिला, जिस पर एश्ले जैक्सन का सटीक शाट गोल को भेद गया। जैक्सन ने इसके पांच मिनट बाद अपना दूसरा गोल करते हुए इंग्लैंड को ३० की मजबूत ब़ढत दिला दी।
तब ऐसा लगने लगा था कि भारतीय एकतरफा अंदाज में फिर पिट जाएंगे, लेकिन दर्शकों के लगातार समर्थन से उत्साहित भारतीयों ने हौसला नहीं छ़ोडा और जवाबी हमले जारी रखे। खेल के ५४वें मिनट में गुरबाज का दाएं छोर से सटीक क्रास सीधे गोल के सामने पहुंचा और चांडी ने गोल करने में कोई गलती नहीं की। तीन मिनट बाद ही शिवेन्द्र ने बाएं छोर से डी में घुसते हुए गेंद कप्तान राजपाल की तरफ ब़ढाई और उन्होंने भारत का दूसरा गोल कर डाला। इस समय सारा माहौल भारत के पक्ष में हो चुका था।
मेजबान टीम को बराबरी करने के लिए सिर्फ एक गोल की जरूरत थी, लेकिन काफी कोशिशों के बावजूद टीम को बराबरी का गोल नहीं मिल पाया। भारत को अब यदि नौवें से लेकर १२वें स्थान की ह़ोड में आने से बचना है तो उसे अपने अंतिम लीग मैच में सोमवार को दक्षिण अफ्रीका को हर हाल में हराना होगा।
