लगातार तीसरी बार फाइनल में पहुंचने के इरादे से उतरेगा जर्मनी
नई दिल्ली। गत दो बार के चैंपियन जर्मनी इंग्लैंड के हाथों यूरोपीय चैंपियनशिप के फाइनल में मिली हार को अभी तक भूल नहीं पाया है और गुरुवार को जब वह एफआईएच हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल में इसी टीम के खिलाफ उतरेगा, तो उसके जेहन में उस हार का बदला लेने के साथसाथ लगातार तीसरी बार फाइनल में पहुंचने का पक्का इरादा होगा।
जर्मनी की नजरें बेशक इस विश्व कप में खिताबी हैट्रिक बनाने पर टिकी हुई हैं, लेकिन उसके सामने एक ऐसी टीम की चुनौती है, जिसने इस टूर्नामेंट में जबर्दस्त खेल दिखाया है और उसे खिताब के लिए छुपा रुस्तम माना जा रहा है। बात इंग्लैंड की है, जिसने पूल ‘बी’ में लगातार चार मैच जीतकर सबसे पहले सेमीफाइनल में स्थान बनाया था। हालांकि इंग्लैंड की टीम अपने अंतिम लीग मैच में स्पेन के हाथों ०२ से पराजित हो गई थी, मगर उसे सेमीफाइनल में किसी भी सूरत में कमतर नहीं आंका जा सकता। जर्मनी को इस बात का एहसास पूरी तरह है कि जो काम इंग्लैंड ने यूरोपीय चैंपियनशिप में किया था वही काम वह विश्वकप में भी कर सकता है। इसलिए गत चैंपियन को इस खतरनाक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ पूरी तरह सतर्क रहना होगा और उसे शुरुआती गोल देने से बचना होगा।
जर्मनी ने अपने ग्रुप पूल ‘ए’ में कोरिया से पहला मैच २२ से ड्रा खेलने के बाद शानदार वापसी करते हुए अगले चार में से तीन मैच जीतकर ११ अंकों के साथ ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया। उसका ग्रुप की दूसरे नंबर की टीम हालैंड के साथ मैच २२ से ड्रा रहा।
जर्मनी ने अपने पांच मैचों में जहां १९ गोल दागे वहीं उसने सिर्फ नौ गोल खाए। पूल ‘बी’ में दूसरे नंबर पर रही इंग्लैंड ने अपने पांच मैचों में १७ गोल दागे लेकिन उसने १२ गोल भी खाए। पूल ‘बी’ में इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया के एक बराबर १२१२ अंक थे, लेकिन आस्ट्रेलिया बेहतर गोल अंतर के आधार पर ग्रुप में चोटी पर रहा।
जर्मनी और इंग्लैंड के बीच दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद की जा रही है। यूरोपीय शैली में खेलने वाली दोनों टीमें इस मैच में जीत के लिए अपना पूरा जोर लगाएंगी। दोनों टीमों के बीच इससे पहले विश्व कप में एक बार मुकाबला हुआ था और २००६ के टूर्नामेंट में जर्मनी ने लीग मैच २१ से जीता था,लेकिन पिछली बार की यूरोपीय चैंपियनशिप से इंग्लैंड के खेल में काफी फर्क आ चुका है और अचानक ही यह टीम मजबूत नजर आने लगी है और जानकार इसे खिताब का दावेदार भी बताने लगे हैं, लेकिन जर्मनी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने आखिरी लीग मैच में जिस तरह किवी टीम को ५२ से रौंदा उससे यह बात तो तय है कि गत चैंपियन टीम अपनी पूरी लय में लौट चुकी है और उसे लगातार तीसरा फाइनल खेलने से रोकने के लिए इंग्लैंड को अपना शत प्रतिशत प्रदर्शन देना होगा।
जर्मनी को सेमीफाइनल में इंग्लैंड के स्ट्राइकर एश्ले जैक्सन से सावधान रहने की जरूरत है, जो तीन मैदानी और दो पेनल्टी कार्नर गोल सहित अबतक कुल पांच गोल कर चुके हैं। इंग्लैंड के जेम्स टिंडाल भी तीन गोलों के साथ खासे खतरनाक दिखाई दे रहे हैं। बैरी मिडल्टन और जोंटी क्लार्क भी जर्मनी के लिए खतरा बन सकते हैं।
गत चैंपियन जर्मनी की तरफ से युवा खिल़ाडी १८ वर्षीय फ्लोरियन फुक्स ने अब तक कमाल का खेल दिखाते हुए सर्वाधिक चार गोल किए गए हैं। उनकी तेजी विपक्षी टीम को लगातार परेशान करने वाली है। मार्टिन ज्वीकर दो गोल, मार्टिन होर दो गोल, जान मार्को मोंटाग दो गोल और मथायस विटहास दो गोल इंग्लैंड के लिए सिरदर्द बन सकते हैं।
जर्मनी की खास बात यह है कि डिफेंस, मिडफील्ड और फारवर्ड लाइन में उसके पास गजब का तालमेल है और इस टीम की खासियत है कि वह किसी भी समय अपने खेल का स्तर ऊंचा कर सकती है। इंग्लैंड अपने आखिरी लीग मैच में बेशक हार गया था, लेकिन यह माना जा रहा है कि सेमीफाइनल सुनिश्चित हो जाने के बाद उसने अपनी ऊर्जा बचाने के उद्देश्य के साथ इस मैच में अपनी सारी ताकत नहीं लगाई थी। पिछले विश्व कप में पांचवें स्थान पर रहा इंग्लैंड १९८६ के बाद से पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचा है और उसकी पूरी कोशिश फाइनल में पहुंचकर २४ वर्ष पुराना इतिहास दोहराने की होगी जबकि जर्मनी की टीम लगातार तीसरी बार फाइनल में पहुंचने की फिराक में है।
