हॉकी इंडिया की उपेक्षा की शिकार पूर्व महिला कप्तान
नई दिल्ली। हाकी की दशा सुधारने के तमाम खोखले दावों की कलई खोलता भारतीय महिला हाकी खिला़डयों का संघर्ष बदस्तूर जारी है। अब गाज ममता खरब जैसी स्टार खिल़ाडी पर गिरी है जो घुटने की चोट के कारण आगामी विश्व कप और राष्ट्रमंडल खेलों से लगभग बाहर हो गई है लेकिन हाकी इंडिया ने ता तो उनकी सुध ली है और ना ही उपचार का खर्च उठाना मुनासिब समझा। पूर्व कप्तान ममता के घुटने में भोपाल में अभ्यास शिविर के दौरान चोट लगी थी और आठ मार्च को मुंबई में मशहूर विशेषज्ञ डाक्टर अनंत जोशी की निगरानी में उनका आपरेशन हुआ। उन्हें पांच महीने पूरी तरह आराम की सलाह दी गई है, जिससे उनका इस साल दोनों ब़डे टूर्नामेंटों में खेलना संदिग्ध हो गया है। भारतीय हाकी की इस स्टार फारवर्ड ने मुंबई से संवाददाताआें को बताया कि मेरा आपरेशन कामयाब रहा, लेकिन पांच महीने तक हाकी से पूरी तरह दूर रहने को कहा गया है। इसके बाद ही अभ्यास शुरू कर सकूंगी। मुझे लगता है कि अगस्त में होने वाले विश्व कप से बाहर रहना होगा लेकिन मैं कोशिश करूंगी कि दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा ले सकूं हालांकि यह बहुत मुश्किल होगा। हाकी इंडिया और अपने कोचों द्वारा की गई उपेक्षा से नाराज ममता ने कहा कि हाकी इंडिया को तो शायद पता भी नहीं होगा कि मेरा आपरेशन हुआ है। खर्च उठाना तो दूर उन्होंने पूछना तक मुनासिब नहीं समझा कि मैं किस हाल में हूं। यहां मैं अपने रिश्तेदार के घर पर हूं और खुद मैनेज करना प़ड रहा है।
हरियाणा की रहने वाली ममता ने कहा कि मेरे आपरेशन का खर्च मध्य प्रदेश सरकार ने उठाया, जिसके लिये मैं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की शुक्रगुजार हूं। लेकिन इतने साल अंतर्राष्ट्रीय हाकी खेलने के बाद मेरे साथ यह सलूक किया जा रहा है, जिससे मैं बहुत आहत हूं।
उन्होंने कहा कि हाकी इंडिया यह तर्क दे सकता है कि अधिकारी विश्व कप के आयोजन में व्यस्त थे। लेकिन कोच : एमकेकौशिक तो पूछ सकते थे। टीम फिजियो विकास धवन को छ़ोडकर किसी ने मुझे फोन तक नहीं किया। मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेल २००२ में भारत की खिताबी जीत की नायिका ममता ने कहा कि हमारे यहां हाकी को ब़ढावा देने की बातें की जाती है, लेकिन असलियत कुछ और है। महिला हाकी खिला़डयों का तो और भी बुरा हाल है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने के बावजूद हमें अपने हाल पर छ़ोड दिया जाता है। राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने को लक्ष्य बनाने वाली इस अनुभवी स्ट्राइकर ने कहा कि मेरी पूरी कोशिश होगी कि दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में भाग ले सकूं। पिछले तीन चार साल से हम इसी के लिये मेहनत कर रहे हैं और टीम पदक की प्रबल दावेदार है। यदि मैं इसमें नहीं खेल सकी तो जिंदगी भर यह मलाल रहेगा।
