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कोटला की भरपाइ : त्यागी

swatantravarth  Sun, 3 Jan 2010, IST

कोटला की भरपाइ : त्यागी

नइ िदली। सुदीप यागी को िफरोजशाह कोटला की खराब पिच के कारण अतराटीय किकेट में अपने पदापण को यादगार नहीं बना पाने का मलाल ह, लेकिन यह तेज गेंदबाज अब उस करण को भुलाकर बगलादेश में नये िसरे से अपने करियर की शुआत करने के िलये तिबहै ।

यागी ने मुबइ में टीम से जुडने के िलये रवाना होने से पहले सवाददाताआें से कहा कि मुझे निराशा तो ह कि म जसे चाह रहा था मेरे अतराटीय करियर की शुआत वसे नहीं हो पायी।

अछी गेंद कर रहा था आर मेरा इकोनोमी रेट भी अछा था, लेकिन म अब उसे भुलाकर नयी उमीदों के साथ बगलादेश जा रहा ह। मुझे विवास ह कि वहा मुझे माका मिलेगा आर म उमीदों पर खरा उतरने में सफल रहगा। वह यागी ही थे जिनकी अधिकतर गेंदें काफी खतरनाक तरीके से उठी। उहीं की गेंद जब तिलना कदाबी के लिये तेजी से उछली, तो बलेबाज ने अपायरों से शिकायत की जिसके बाद मच नहीं हो पाया आर इसे र करना पडा। यागी ने भी अपने सीनियर खिलाडियों की तरह वीकार किया कि कोटला की पिच खतरनाक आर खेलने लायक नहीं थी। उहोंने कहा कि विकेट खराब था, लेकिन मेरा काम लाइन आर लेंथ से गेंदबाजी करना था आर म वही कर रहा था। कुछ गेंद खतरनाक तरीके से उठ रही थी, लेकिन मेरे निशाने पर बलेबाज नहीं विकेट थे।

यागी ने इस मच में ६३ ओवर में १५ रन देकर श्रीलकाइ कतान कुमार सगकारा का विकेट लिया था। यह मच भले ही र हो गया लेकिन इस २२ वर्षीय गेंदबाज को खुशी ह कि वह चयनकताआें आर अपने सीनियर को भावित करने में सफल रहा। इसका श्रेय उहोंने तेज गेंदबाजी के अगुआ जहीर खान आर आशीष नेहरा के अलावा सचिन तेंदुलकर को भी दी जो नेट पर उहें हमेशा टिस देते ह। उार देश के इस गेंदबाज ने कहा कि मुझे जब भी परेशानी होती ह तो म सीनियर से पूछता ।

जहीर भाइ हमेशा मेरी मदद करते ह। वे मेरे आदश रहे ह आर मुझे खुशी होती ह जब वह मुझे बताते ह कि अगली गेंद कसी करनी ह। इसके अलावा कोच आर आशीष भाइ ने भी मेरी काफी मदद की। श्रीलका के खिलाफ श्रखला में यागी केवल एक मच खेल पाये, लेकिन उहें सबसे बडी खुशी तेंदुलकर जसे दिगज बलेबाज के साथ डेसिंग म में समय बिताने आर उहें नेट पर गेंदबाजी करने से मिली। उहोंने कहा कि सचिन सर ने विशेषकर नेटस पर मेरी काफी मदद की। मने उहें (इस श्रखला के दारान) कइ बार नेटस पर गेंदबाजी की आर यदि उहें कोइ गेंद अछी लगती थी तो वह उसकी जर तारीफ करते थे। कइ बार उहोंने मुझे बताया कि कोइ गेंद किस तरह से की जानी चाहिए थी। इस सबसे मुझे काफी फायदा मिला ह।

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