नये जमाने के बडमन है सहवाग : चपल
नइ िदली। वीरें सहवाग की बेखाफ बलेबाजी आर श्रीलका के खिलाफ मुबइ में उनकी २९३ रन की पारी से बेहद भावित पूव आटेलियाइ कतान ने भारत के इस सलामी बलेबाज को वतमान समय का डान बडमन करार दिया आर कहा िक इन दोनों की बलेबाजी में कइ समानताए ।
चपल के अनुसार उस जमाने में जबकि अय बलेबाज अपनी तकनीक पर भरोसा करते ह तब सहवाग ‘गेंद देखो आर हिट करो’ के आजमाये हए फामूले पर चलते ह। इस पूव आटेलियाइ कतान ने एक खेल वेबसाइट में अपने कालम में लिखा ह, ‘सहवाग असर कहता ह कि बलेबाजी करते समय वह अधिक नहीं सोचता। एक चतुर यति ऐसा करता ह। वषा] तक यह कयास लगने के बाद अपने काशल के अलावा सर डोनाड बडमन के महान बनने के या कारण थे, म इस नतीजे पर पहचा ह कि वह बेखाफ होकर बलेबाजी करते थे। उहोंने कहा कि सहवाग आर बडमन में केवल यही समानता नहीं ह।
केवल ये दोनों ही ऐसे बलेबाज ह जिहोंने टेट किकेट में तीन बार २९० रन से अधिक रन बनाये। उनका अपनी पीढी में बडे कोर का सवश्रेठ टाइक रेट रहा। इससे बलेबाजी को लेकर दिलचप याल आता ह कि या युवा बलेबाज तयार करने में या तकनीक के बजाय टोक जमाने को अधिक तरजीह दी जानी चाहिए। आखिर में भावशाली तरीके से रन बनाना ही जीत की पहली सीढी होती ।
चपल ने ‘द यू बडमन’ शीषक से अपने कालम में लिखा ह, ‘जिस कलेंडर वष (२००९) में कइ उपलधिया हासिल हइ, वीरें सहवाग का टेट मच के एक दिन ७९ ओवर में २८४ रन बनाना शातिपूण विरोध की तरह रहा। जिस तरह से बेबोन टेडियम में उहोंने श्रीलकाइ आकमण का कलेआम किया वह इस बात का एक आर सबूत ह कि वह यू बोट (जमन सय पनडुबी) के बाद सबसे बडा विवसक ह।
चपल ने इसके साथ ही हरानी जतायी कि जब जान राइट भारत के कतान थे, तब सहवाग की उनके बेफिक बलेबाजी के लिये आलोचना तक की गयी थी। इस सबध में उहोंने सहवाग की तुलना अपने जमाने के दिगज सलामी बलेबाजों के साथ की ह, जिहें उनकी तकनीक को लेकर खास तार पर याद किया जाता ।
उहोंने कहा कि सलामी बलेबाज के तार पर सहवाग का भारत के पूव कान सुनील गावकर से बेहतर आसत ह। दिली के सहवाग के ७५ तिशत शतक में १५० रन से ऊपर के ह, जबकि सर लियोनाड हटन के केवल ५० फीसदी शतक ही इस सया से ऊपर तक गये ह। यह इसलिये भी महवपूण ह योंकि जब जान राइट भारतीय टीम के कोच थे, तब इसी सहवाग की अछी शुआत के बावजूद अपना विकेट इनाम में देने के लिये आलोचना हइ थी।
चपल ने इसके साथ ही आशा जतायी कि सहवाग २०१० में भी बेबोन जसी पारिया खेलकर किकेटेमियों को रोमाचित करेंगे। उहोंने सलाह दी कि सहवाग को अपनी बलेबाजी तकनीक मे कोइ बदलाव नहीं करना चाहिए।उहोंने कहा कि उहें अपनी तरह से ही खेलना चाहिए।
