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सचिन को भारत रत्न मिलना चाहिये : आशा भोसले

Swatantra Vaartha  Fri, 30 Jul 2010, IST

सचिन को भारत रत्न मिलना चाहिये : आशा भोसले

नई दिल्ली। सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिये जाने की मांग में शामिल हुई मशहूर पार्श्वगायिका आशा भोसले ने आज कहा कि यह चैंपियन बल्लेबाज सही मायने में इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान का हकदार है, जिसने पिछले दो दशक में पूरी दुनिया में भारत का परचम लहराया है।

आशा ने संवाददाताआें से बातचीत में कहा कि सचिन को भारत रत्न मिलना ही चाहिये। वह इसका हकदार है। इतने साल से वह दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर रहा है। इससे पहले अजित वाडेकर, दिलीप वेंगसरकर और कपिल देव समेत कई पूर्व क्रिकेटर ‘रन मशीन’ सचिन को भारत रत्न देने की मांग कर चुके हैं। श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में सचिन की दोहरी शतकीय पारी देखने वाली इस गायिका ने कहा कि सचिन जब बल्लेबाजी करता है तो चारों तरफ मानों संगीत बिखर जाता है।

उन्होंने कहा कि मुझे वह बल्लेबाज नहीं, महान कलाकार लगता है। वह बल्लेबाजी करता है तो ऐसा लगता है कि कोई राग गूंज रहा हो। मैंने गैरी सोबर्स, विवियन रिचड्‌र्स और क्लाइव लायड को भी देखा है, लेकिन सचिन की शैली सबसे जुदा है और उसके जैसा कोई नहीं। आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ब्रेट ली के साथ गा चुकी आशा ने कभी सचिन के साथ भी गाने की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि यह ख्वाहिश जल्दी पूरी होती नजर नहीं आ रही।

आशा ने कहा, ‘मैं सचिन के साथ गाना चाहती थी लेकिन वह इतना व्यस्त है कि मैं उससे यह कभी कह ही नहीं पाऊंगी। देखती हूं कि यह इंतजार कभी खत्म होता है या नहीं।’ लता मंगेशकर, अमिताभ बच्चन और आशा भोसले से प्रेरणा लेने वाले सचिन भी इस सुरों की इस मलिका के लिये प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

आशा ने कहा, ‘सचिन से मुझे हार से नहीं डरने की प्रेरणा मिलती है। वह कभी जल्दी आउट हो जाता है तो कभी ब़डी पारी खेलता है। जैसी आज खेली। वह आलोचना से नहीं डरता और जो हार से नहीं डरता, वह सचिन तेंदुलकर बनता है।’ तेंदुलकर का नाम मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर रखा गया है और इस वजह से आशा उनसे खास लगाव महसूस करती है। उन्होंने कहा कि मुझे यह सुनकर अच्छा लगता है। लता की तरह ही आशा भी चाहती है कि सचिन अगले साल उपमहाद्वीप में होने वाला विश्व कप ही नहीं बल्कि अगले कई साल तक खेलता रहे।

उन्होंने कहा कि सिर्फ विश्व कप ही क्यों, वह जब तक चाहे खेल सकता है। उसमें क्रिकेट का जुनून और खेलने की इच्छाशक्ति है और मन की यही हिम्मत मुझे भी ७५ साल की उम्र में भी गाने के लिये प्रेरित करती है।

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