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भारत त्रिकोणीय श्रुखला के फाइनल में

swatantravaarttha  Mon, 11 Jan 2010, IST

भारत त्रिकोणीय श्रुखला के फाइनल में

मीरपुर। गेंदबाजों के शानदार दशन के बाद ओपनर गातम गभीर (७१) दिनेश कातिक (४८) आर जबदत फाम में चल रहे युवा बलेबाज विराट कोहली (नाबाद ७१) ने बेजोड पारिया खेलते हए आज यहा त्रिकोणीय सीरीज के एक मच में श्रीलका को आठ विकेट से हराकर बोनस अकों के साथ टूनामेंट के फाइनल में थान सुनिचित कर लिया। फाइनल में भारत का मुकाबला श्रीलका से ही होगा।

भारतीय गेंदबाजों के धारदार दशन के बाद टीम इडिया के बलेबाजों ने श्रीलकाइ गेंदबाजों की बखिया उधेडते हए फाइनल में जगह बनाइ आर २१४ रनों का लय ३२४ ओवर में ही हासिल कर लिया। इस जीत के साथ ही भारत को एक बोनस अक भी मिला।

इसके अलावा भारत ने इस वष के शुआत से श्रीलका के चले आ रहे अपराजेय कम को भी तोड दिया। भारत की तरफ से गभीर ने ८६ गेंदों में दस चाकों की मदद से ७१ रन बनाए आर अपना १९वा अթशतक पूरा किया। वहीं वीरे सहवाग के विश्राम के कारण टीम में शामिल किए गए कातिक केवल दो रन से अթशतक से चूक गए। उहोंने महज ४० गेंदों में ना चाकों की मदद से ४८ रन बनाए। कोहली ने ६८ गेंदों में ना चाकों की मदद से नाबाद ७१ रन बनाए। उनका वनडे में यह चाथा अթशतक था। सहवाग की अनुपथिति में ओपनिंग करने उतरे कातिक आर गभीर की जोडी ने इस मच में टीम को तूफानी शुआत दी। दोनों बलेबाजों ने पहले विकेट के लिए महज ११३ ओवर में ही ८९ रन की धमाकेदार साझेदारी कर डाली। इस साझेदारी में कातिक ने कुछ आकामक शाट खेल। हालाकि तेज खेलने के चकर में कातिक कुछ यादा ही आकामक हो गए आर तेज गेंदबाज तिलन तुषारा की एक बाहर जाती गेंद से छेडखानी के कारण उहें पवेलियन लाटना पडा। कातिक के आउट होने के बाद गभीर आर कोहली ने भी अछी बलेबाजी की आर दूसरे विकेट के लिए ७२ रन की साझेदारी कर डाली। दोनों बलेबाजों ने श्रीलका की धारहीन आकमण को धोकर रख दिया। इस दारान कोहली यादा आकमण नजर आए। गभीर को उनकी अթशतकीय पारी में दो जीवनदान भी मिले। जब टीम का कोर १६१ रन था तभी गभीर तेज गेंदबाज चनाका वेलेगेदरा को उठाकर मारने के चकर में वह कच आउट हो गए। हालाकि उहोंने दस चाके की मदद से ७१ रन बनाए। लेकिन इसके बाद जीत की आपचारिकता कोहली आर युवराज सिंह (नाबाद ०८) ने पूरी कर दी। कोहली ने इस दारान अपना अթशतक भी पूरा किया। वह दस चाकों की मदद से ७१ रन पर नाबाद रहे, जबकि युवराज ने सात गेंदों की अपनी पारी में नाबाद आठ रन बनाए।

श्रीलका की तरफ से तुषारा आर परेरा को एकएक विकेट मिला।

इससे पहले फाइनल में पहच चुकी श्रीलका के कतान कुमार सगकारा ने खिताबी मुकाबले में ओस में गेंदबाजी की चुनाती के लिए तयार रहने के इरादे से टास जीतकर बलेबाजी का फसला किया,लेकिन उहें छोडकर शीष कम का कोइ बलेबाज टिककर नहीं खेल पाया।

खराब शाट चयन के कारण टीम ने १४वें ओवर तक ६६ रन पर पाच विकेट गवा दिये थे। श्रीलका की ओर से सगकारा ने ७८ गेंद में सवाधिक ६८ रन की पारी खेली, जबकि भारत में श्रखला के दारान एकदिवसीय किकेट में पदापण करने वाले सूरज रणदीव ने ७६ गेंद में ५६ रन की पारी खेलते हए अपना पहला अթशतक बनाया। सगकारा आर रणदीव के बीच सातवें विकेट की ५९ रन आर रणदीव तथा तिलन तुषारा (२८) के बीच ६९ रन की साझेदारी के कारण ही श्रीलका २०० रन के आकडे को पार कर पाया। भारत के गेंदबाजों ने बेहतर दशन किया। अपना दूसरा एकदिवसीय मच खेल रहे सुदीप यागी ने मच की चाथी गेंद पर ही सलामी बलेबाज उपुल थरगा को खाता खोले बिना पवेलियन भेजकर भारत को अछी शुआत दिलाइ।

गोइन की चोट के कारण पिछले दो मच से बाहर रहे तिलकरने दिलशान (३३) ने आकामक शुआत करते हए यागी पर पाचवें ओवर में लगातार तीन चाके मारे। उहोंने श्रीसत पर भी दो चाके मारे। दिलशान ने छठे ओवर में जहीर का वागत भी चाके के साथ किया, लेकिन बायें हाथ के इस तेज गेंदबाज ने उहें गातम गभीर के हाथों कच करा दिया। जहीर ने इसके बाद पिछले मच में शतक बनाने वाले महेला जयवթने (५)को शाट कवर में विराट कोहली के हाथों कच कराया, जबकि अगले ओवर में श्रीसत ने भारत के खिलाफ पिछले मच में नाबाद १०५ रन की पारी खेलने वाले तिलन समरवीरा को खाता खोले बिना पवेलियन भेज दिया। तिलन कदाबी (१) सगकारा के साथ गलतफहमी का शिकार होकर आउट हए, जबकि तिषारा परेरा (११) को मिश्रा ने युवराज के हाथों कच कराया। सगकारा भी जूझा पारी खेलने के बाद ३०वें ओवर में युवराज की गेंद को उठाकर मारने के यास में सुरेश रना को कच थमा बठे, जिससे श्रीलका पर जद सिमटने का खतरा मडराने लगा, लेकिन रणदीव ने एक छोर सभालते हए टीम का कोर २०० रन के पार पहचाया।

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