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बिना लक्ष्य के राठ़ौड का दोबारा सफल होना मुश्किल : रसेल मार्क

Swatantra Vaartha  Fri, 3 Sep 2010, IST

बिना लक्ष्य के राठ़ौड का दोबारा सफल होना मुश्किल : रसेल मार्क

नई दिल्ली। राज्यवर्द्धन सिंह राठ़ौड को कोचिंग दे चुके अटलांटा ओलंपिक के स्वर्ण पदकधारी आस्ट्रेलियाई डबल ट्रैप निशानेबाज और कोच रसेल मार्क का मानना है कि बिना लक्ष्य के इस भारतीय का सफल होना कठिन है और रोंजन सिंह सोढी के बारे में भविष्यवाणी करते हुए कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों और लंदन ओलंपिक में उन्हें पछ़ाडना काफी मुश्किल होगा।

आस्ट्रेलिया का यह ४६ वर्षीय अनुभवी निशानेबाज टूर्नामेंटों में भाग लेने के अलावा युवाआें को कोचिंग भी देता है और एथेंस ओलंपिक से पहले उन्होंने राठ़ौड को कोचिंग दी थी, जिसके बाद इस भारतीय ने रजत पदक हासिल कर भारत को व्यक्तिगत स्पर्द्धा का पहला पदक दिलाया था। राठ़ौड ने भारतीय नेशनल्स राइफल्स संघ (एनआरएआई) की नयी नीतियों से निराश होकर ट्रायल्स में शिरकत नहीं थी, जिससे वह राष्ट्रमंडल खेलों में नहीं खेल पायेंगे।

सिडनी २००० ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले मार्क से जब राठ़ौड के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आस्ट्रेलिया से को दिये ईमेल साक्षात्कार में कहा कि मैंने उससे उसके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में बात नहीं की है, लेकिन बिना लक्ष्य के उसका दोबारा सफल होना काफी मुश्किल होगा। फिर से राठ़ौड को कोचिंग देने के बारे में मार्क ने कहा कि मैं नहीं जानता कि राठ़ौड को कौन कोचिंग दे रहा है, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि उसके अनुभव को देखते हुए उसे शायद अब कोच की जरूरत नहीं है।

मार्क सोढी को भी ट्रेनिंग दे चुके हैं, उन्होंने कहा कि वह (स़ोढी) उन निशानेबाजों में शामिल है, जिन्होंने पिछले चार वषा] में अपने प्रदर्शन में काफी सुधार किया है और काफी मेहनती है। अभी उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आना बाकी है। वह भविष्य में भारत के लिये कई उपलब्धियां हासिल करेगा। इस साल राष्ट्रमंडल खेलों और लंदन २०१२ ओलंपिक में उसे हराना काफी मुश्किल होगा। राष्ट्रमंडल खेलों में मिलने वाली भारतीय चुनौती के बारे में इस आस्ट्रेलियाई निशानेबाज कहा कि मेजबान देश की ओर से स़ोढी प्रबल दावेदार होगा। भारत और इंग्लैंड के निशानेबाजों से काफी चुनौती मिलेगी। इनके अलावा आइल आफ मैन के टिम नील भी काफी प्रतिस्पर्धी निशानेबाज है। मार्क को भारतीय कोच बनने में कोई परेशानी नहीं है, उन्होंने कहा कि अगर पेशकश की जाये तो वह भारतीय टीम का ‘पार्ट टाइम’ कोच बनना पसंद करेंगे और उन्हें यह भी लगता है कि अगले पांच से आठ वषा] में भारत डबल ट्रैप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दबदबा बना लेगा।

उन्होंने कहा, हां, मैं पार्ट टाइम आधार पर भारतीय टीम का कोच बनना पसंद करूंगा। मैं जानता हूं कि मैं उनकी मदद कर सकता हूं क्योंकि टीम में काफी युवा प्रतिभायें मौजूद हैं और मेरा मानना है कि उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें अगले पांच से आठ साल में डबल ट्रैप स्पर्द्धा में दबदबा बना लेना चाहिए।

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