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मैंने किसी भारतीय खिल़ाडी से सटोरिये के संपर्क करने के बारे में नहीं सुना : सचिन

Swatantra Vaartha  Sat, 4 Sep 2010, IST

मैंने किसी भारतीय खिल़ाडी से सटोरिये के संपर्क करने के बारे में नहीं सुना : सचिन

नई दिल्ली। स्पाट फिक्सिंग स्कैंडल से निराश भारत के सीनियर बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने आज कहा कि आईसीसी को इस मामले की गहन जांच करनी चाहिए और अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

तेंदुलकर ने कहा कि अगर यह प्रकरण सच साबित होता है तो इससे ‘खेल की प्रतिष्ठा को नुकसान’ पहुंचेगा। ब्रिटिश टेबलायड ‘न्यूज आफ द वर्ल्ड’ ने इस स्कैंडल का खुलासा किया था। तेंदुलकर ने यहां संवाददाताआें से कहा, ‘‘आईसीसी को इंग्लैंड में जो हुआ उसकी गहन जांच करनी चाहिए और अगर कोई खिल़ाडी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए। अगर ये आरोप सही है तो निश्चित तौर पर खेल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचेगा।’ उन्होंने कहा, ‘मैं कोई विशेषज्ञ नहीं हूं और यहां भारत में बैठकर इंग्लैंड में जो हो रहा है उस पर प्रतिक्रिया नहीं कर सकता। लेकिन निश्चित तौर पर यह मेरे लिए निराशाजनक है।’ यह खुलासा उस समय हुआ जब एक सटोरिये पर ब्रिटेन के टेबलायड ने स्टिंग आपरेशन किया जिसने कथित तौर पर पिछले हफ्ते लाड्‌र्स टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ पूर्व निर्धारित समय पर नोबाल फेंकने के लिए टेस्ट कप्तान सलमान बट और तेज गेंदबाजों मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमिर को पैसे दिये।

यह पूछने पर कि क्या उन्होंने कभी भारतीय खिला़डयों से सटोरियों के संपर्क करने के बारे में सुना है, तेंदुलकर ने कहा, ‘नहीं, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में मेरे २१ बरस के दौरान मैंने कभी किसी भारतीय खिल़ाडी से सटोरिये के संपर्क करने के बारे में नहीं सुना।’

तेंदुलकर यहां अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपने २१ साल पूरे होने पर आयोजित एक फोटो प्रदर्शनी में मीडिया से मुखातिब थे। आयोजकों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तेंदुलकर के सुनहरे साल की बानगी पेश करते २१ फोटो इस चैंपियन बल्लेबाज ने खुद चुने हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें चुनना काफी मुश्किल था क्योंकि मेरे कैरियर में कई यादगार पल आये। करीब ३० फोटो चुने जिनमें से २१ का चयन किया गया। तेंदुलकर ने कहा कि दो दशक के कैरियर में क्रिकेट का स्वरूप काफी बदल गया है खासकर २०२० क्रिकेट के उद्‌भव के बाद। उन्होंने कहा कि खिल़ाडी अब अधिक आक्रामक हो गए हैं। ट्‌वेंटी२० क्रिकेट के आने से कई नये शाट सामने आये हैं जिससे खेल और रोचक हो गया है।’ तेंदुलकर ने स्वीकार किया कि कई बार आक्रामक होने से क्रिकेटर मैदान पर एकदूसरे से भ़िड जाते हैं लेकिन वह खुद को संयमित रखते आये हैं। उन्होंने कहा कि मेरी आक्रामकता संतुलित है। मैं कई बार सिर्फ गेंदबाज की आंखों में देखता हूं। संतुलन खोकर जवाब देने का कोई फायदा नहीं है। पुरानी यादों को ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि अपने कैरियर की पहली प्रेस कांफ्रेंस वह कभी नहीं भूल सकते जब १९९० के इंग्लैंड दौरे पर दूसरे टेस्ट में उन्हें मैन आफ द मैच पुरस्कार मिला था।

तेंदुलकर ने कहा, ‘यह ओल्ड ट्रैफर्ड की बात है। मैं बहुत सकुचाया हुआ था और मुझे पता नहीं था कि क्या करना है क्योंकि यह मेरी पहली प्रेस कांफ्रेंस थी। मैंने अपने साथी खिला़डयों से पूछा कि मुझसे किस तरह के सवाल पूछे जायेंगे। उस समय बिशन सिंह बेदी कोच थे और उन्होंने मुझे नर्वस नहीं होने के लिये कहा।’ उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत शर्मीला था और किसी से बात करते समय भी नजरें झुका लेता था। मैं दूसरे व्यक्ति की आंख में आंख डालकर बात नहीं कर पाता था। लेकिन मैं अब बदल गया है। अब मैं काफी सहज महसूस करता हूं। उन्होंने कहा कि जब मैं युवा था तो शुरूआती तौर पर कई समस्यायें पेश आई। लोगों को लगता था कि मैं बात नहीं करना चाहता और जो आसपास चल रहा है, मेरी उसमें रुचि नहीं है।’

तेंदुलकर ने कहा कि आस्ट्रेलिया के १९९१९२ के पहले दौरे पर लगाये गए दो टेस्ट शतक उनके कैरियर का सबसे संतोषजनक दौर था। उन्होंने कहा कि मेरे कैरियर में कुछ दौर ऐसे थे जब मुझे लगा कि मैं अच्छा प्रदर्शन कर रहा हूं। आस्ट्रेलिया का १९९१९२ का दौरा उसी में से एक है। मैं १९९४९६ के अपने प्रदर्शन से भी खुश था। मैने २००३ विश्व कप में भी अच्छा प्रदर्शन किया। पिछले तीन साल में भी मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा है।’

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