सही दिशा में आगे ब़ढ रही है भारतीय टीम : भूटिया
नई दिल्ली। भारतीय फुटबाल टीम के कप्तान बाईचुंग भूटिया ने अपने साथी खिला़डयों को लंबे कैरियर के लिये ‘मानसिक तौर पर मजबूत’ बने रहने का गुरूमंत्र देते हुए कहा किराष्ट्रीय टीम कदम दर कदम ही सही, लेकिन सही दिशा में आगे ब़ढ रही है।
उन्होंने कहा कि टीम में युवा खिला़डयों की भरमार है जिससे यह उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले वषा] में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुछ बेहतर परिणाम मिलेंगे। इसमें अगले साल जनवरी में दोहा में होने वाला एएफसी एशियाई कप भी शामिल है, जिसके लिये टीम क़डी मेहनत कर रही है।
भूटिया ने आज यहां राष्ट्रीय टीम की नयी पोशाक जारी करने के अवसर पर संवाददाताआें से कहा कि हमारी टीम में पिछले दो तीन वषा] में काफी बदलाव आया है। मैं यह नहीं कहूंगा कि यह काफी बदल गयी है, लेकिन इसमें लगातार सुधार हो रहा है। हम कदम दर कदम आगे ब़ढना महत्वपूर्ण होता है और हमारी टीम अभी सही दिशा में आगे ब़ढ रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी खेल में अच्छे प्रदर्शन के लिये शारीरिक के साथ मानसिक मजबूती जरूरी होती है। मैंने पिछले १५१६ साल के अपने कैरियर में काफी दबाव झेले हैं, लेकिन इस बीच मैं मानसिक तौर पर अधिक मजबूत बना। मेरा आत्मविश्वास ब़ढा और मैं देख रहा हूं कि पिछले दो साल में अन्य खिला़डयों के रवैये में भी बदलाव आया है जो अच्छे संकेत हैं। भूटिया ने कहा कि भारतीय टीम को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है और उसका भविष्य उज्जवल है। उन्होंने कहा कि हमारे अधिकतर चोटी के खिल़ाडी २४ या २५ साल के हैं। हमारे पास बहुत अच्छी बेंच स्ट्रेंथ है और खिला़डयों को टीम के तौर पर एक दूसरे से मिलने और तालमेल बिठाने का अच्छा मौका मिल रहा है।
भारतीय कप्तान ने हालांकि राष्ट्रीय क्लबों की व्यवस्थ को बदलने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘क्लबों में हर साल ५० फीसदी नये खिल़ाडी ज़ोड दिये जाते हैं। इससे कोच के पास उन्हें परखने और समझने का मौका नहीं होता है और खिल़ाडी जब आपस में सामंजस्य बिठाते हैं तब तक टीम बदल जाती है।’
टीम पिछले कुछ समय से एशियाई कप की तैयारियों में जुटी हुई। वह हाल में पुर्तगाल के दो महीने के दौरे से लौटी है और अब अंतर्राष्ट्रीय मैत्री मैच खेलने में व्यस्त है। थाईलैंड से लौटी टीम अब इसी देश के खिलाफ आठ सितंबर को अंबेडकर स्टेडियम में इस साल का अपना दूसरा मैत्री मैच खेलेगी। भारत की तरफ से १०० से अधिक अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने वाले एकमात्र भारतीय भूटिया ने इस तरह के मैचों के लगातार आयोजन की जरूरत बतायी। उन्होंने कहा कि जब मैंने खेलना शुरू किया था तो तब हमें साल में बहुत कम मैच खेलने को मिलते थे। पिछले पांच साल में कुछ स्थिति सुधरी है, लेकिन अब भी अधिक मैच खेलने की जरूरत है। मैं ऐसी स्थिति में १०० मैच खेल पाया इसलिए खुद को गौरवान्वित महसूस करता हूं। भूटिया ने १९९५ में खेले गये अपने पहले अंतर्राष्ट्रीय मैच की याद को भी ताजा किया। उन्होंने कहा कि वह नेहरू कप का मैच था, जिसमें मैं दूसरे हाफ में मैदान पर उतरा लेकिन उसकी बहुत बुरी यादें हैं।
