बोपन्ना व कुरैशी की ज़ोडी फाइनल में
न्यूयार्क। भारत के रोहन बोपन्ना और उनके पाकिस्तानी ज़ोडीदार ऐसाम उल हक कुरैशी अपना स्वप्निल अभियान जारी रखते हुए वर्ष के आखिरी ग्रैंड स्लेम यूएस ओपन टेनिस टूर्नामेंट के पुरुष युगल के फाइनल में पहुंचकर नया इतिहास रचने से सिर्फ एक कदम दूर रह गए हैं।
बोपन्ना और कुरैशी के लिए यह पहला मौका है, जब वे किसी ग्रैंड स्लेम टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे हैं। १६वीं वरीयता प्राप्त बोपन्ना और कुरैशी ने बुधवार को सेमीफाइनल में गैर वरीयता प्राप्त अर्जेन्टीना के एडुआर्डो श्वांक और होरेशियो जेबेलोस की ज़ोडी को ७६, ६४ से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। भारत और पाक की यह ज़ोडी जब अपना सेमीफाइनल मुकाबला खेल रही थी, तो दोनों देशों के संयुक्त राष्ट्र के राजदूत भारत के हरप्रीत सूरी और पाकिस्तान के अब्दुल्ला एच हारून यह मैच देखने के लिए अतिविशिष्ट दर्शकों में मौजूद थे।
पहले सेट में जोरदार मुकाबला देखने को मिला। जबर्दस्त संघर्ष के बाद यह सेट टाइब््रको में खिंच गया। भारतपाक ज़ोडी ने आखिर टाइब्रेक ७५ से जीतकर पहला सेट अपने नाम कर लिया। दूसरे सेट में हालांकि श्वांक और जेबेलोस ने कुछ संघर्ष करने की कोशिश की, लेकिन बोपन्ना और कुरैशी ने ६४ से यह सेट जीतने के साथ ही पहली बार ग्रैंड स्लैम के फाइनल में जगह पक्की कर ली।
फाइनल में बोपन्ना और कुरैशी का मुकाबला शीर्ष वरीयता प्राप्त अमेरिका के ब्रायन बंधुआें बाब एवं माइक से होगा। दो बार के चैंपियन बाब और माइक ब््रयाान ने सेमीफाइनल में स्पेनिश ज़ोडी मार्सेल ग्रेनोलर्स और टामी रोब्रेडो को लगातार सेटों में ६१, ६४ से आसानी से मात दी।
इससे पहले बोपन्ना और कुरैशी ने इस वर्ष विम्बलडन के पुरुष युगल के क्वार्टरफाइनल में जगह बनाई थी जो उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था, लेकिन यूएस ओपन में उन्होंने अपने उस प्रदर्शन को भी पीछे छ़ोड दिया। लगभग एक महीने पहले बोपन्ना ने एक साक्षात्कार में कहा था कि उनका सपना है कि वह एक दिन ग्रैंड स्लेम खिताब जीतें और अब वह अपना यह सपना साकार करने से केवल एक कदम दूर रह गए हैं।
बोपन्ना यदि यूएस ओपन का युगल खिताब जीत लेते हैं तो वह ग्रैंड स्लेम खिताब जीतने वाले चौथे भारतीय खिल़ाडी बन जाएंगे। इससे पहले तक लिएंडर पेस, महेश भूपति और सानिया मिर्जा को ही यह उपलब्धि हासिल थी। सानिया ने भूपति के साथ गत वर्ष आस्ट्रेलियन ओपन का मिश्रित युगल खिताब जीता था।
बोपन्ना और कुरैशी ने सेमीफाइनल से पहले क्वार्टरफाइनल में अपने से कहीं ऊंची वरीयता प्राप्त वेस्ले मूडी और डिक नोर्मन की ज़ोडी को ७५, ७६ से हराया था। पेस, भूपति, सोमदेव देववर्मन और सानिया मिर्जा पहले ही इस टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद अब भारत की सारी उम्मीदें केवल बोपन्ना पर टिक गई हैं कि वह वर्ष के आखिरी ग्रैंड स्लेम में भारत को एक खिताबी सफलता दिलाएंगे।
बोपन्ना ने भी अपने शानदार प्रदर्शन पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि मैं बता नहीं सकता कि आज हम कितने खुश हैं। यह बहुत करीबी मुकाबला था और अंतत: विजेता बनने की जो खुशी होती है,वह अद्भुत है।
भारतीय खिल़ाडी ने साथ ही कहा कि हमारे दोनों प्रतिद्वंद्वी छह फुट सात इंच लंबे थे और उनकी सर्विस का सामना करना आसान नहीं था,लेकिन हमने पूरे आत्मविश्वास के साथ उन्हें खेला और सकारात्मक खेल दिखाया।
बोपन्ना और कुरैशी ने २००३ में एक ज़ोडी के रूप में खेलना शुरू किया था। इस ज़ोडी ने उस वक्त सबका ध्यान अपनी ओर खींचा जब ये दोनों खिल़ाडी अपनी टी शर्ट पर ‘युद्ध रोको टेनिस खेलो’ का नारा लिखकर टेनिस कोर्ट में उतरे। तब से लेकर उनका समर्थन करने वालों की संख्या निरंतर ब़ढती गई है। कुरैशी ने कहा कि दर्शकों की संख्या लगातार ब़ढ रही है। अब ज्यादा भारतीय और पाकिस्तानी मैच देखने आते हैं। सब साथ मिलकर मैच देखते हैं। उन्हें देखकर यह बता पाना मुश्किल है कि कौन भारतीय है और कौन पाकिस्तानी। यही टेनिस की खूबसूरती है और यही खेलने का मजा।
