रामडल खेलों का पहला स्टेिडयम बन कर तैयार
दीिली । कदेींय खेलमी मनोहर िसंह गिल ने रामडल खेलों के लिए दीि में पुननिमित किये जा रहे टेडियमों में से बनकर तयार हए पहले टेडियम मेजर यानचद राीय टेडियम को आज हाकीेमियों को समपित किया। इसके साथ ही इस टेडियम को लेकर चल रही अनिचितता भी समात हो गइ। रामडल खेलों के लिये नये िसरे से तयार िकये गये ३७ एकड में फले इस टेडियम पर २६२ करोड पये खच किये गये ह।
अटूबर में होने वाले रामडल खेलों की हाकी तियोगिता से पहले यहा पर विव कप हाकी तियोगिता २८ फरवरी से खेली जानी ह। तीन टफ वाले इस टेडियम में नइ पोली गास की टफ बिछाइ गयी ह, जिसमें पानी के वचलित छिडकाव, लड लाइट, दो इलेटानिक कोर बोड, चेंज म, पीटीजेड कमरा आर अडर गाउड पाकिग आदि की सुविधाए माजूद ह। खेलमी ने कहा कि यह टेडियम करीबकरीब नया बना ह। पिछले साल जब म यहा आया था, तो यहा पर चारों तरफ खुदाइ हो रही थी आर मुझे डर लग रहा था कि यह टेडियम समय पर बन भी पायेगा या नहीं, लेकिन आज मुझे खुशी ह कि यह भय टेडयम पूरी तरह से बन कर तयार हो गया।
गिल ने कहा कि आज उनके जेहन में मेवालाल की याद ताजा हो आइ ह, जिसने करीब ५९ साल पहले १९५१ में इसी टेडियम में हए पहले एशियाइ खेलों की फुटबाल पा के फाइनल में ‘रिवस किक’ के जरिये जबरदत गोल करके टीम को खिताबी जीत दिलाइ थी। गिल ने बताया कि जब वह कूल में पढते थे, तब अपने पिता के साथ एशियाइ खेलों को देखने के लिये विशेष प से दीि आये थे।
उहोंने बताया कि यह टेडियम आजादी से पहले १९३३ में वायसराय के नाम पर बनाया गया था आर फिर इसके बाद देश के पहले धानमी पडित जवाहरलाल नेह ने इसी टेडियम पर पहले एशियाइ खेलों का आयोजन कराया आर इसका नाम नेशनल टेडियम रखा आर बाद में हाकी के जादूगर मेजर यान चद के नाम पर इसका नाम रखा गया।
गिल ने कहा कि यह टेडियम दुनिया के सवश्रे टेडियमों से से एक ह। इस तरह की यवथा की जाएगी कि टेडियम खाली नहीं रहे आर यहा कोइ न कोइ हाकी तियोगिता साल भर चलती रहे। खेल मी ने वीकार किया कि रामडल खेलों के सभी टेडियम एक साल पहले ही बन कर तयार हो जाने चाहिये थे।
