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खेल सघों के काया] में दखलदाजी से बचें खेल मी

Swatantra Vaartha  Thu, 4 Feb 2010, IST

खेल सघों के काया] में दखलदाजी से बचें खेल मी

नइ दीली । एमएसगिल को ‘किसी भी विषय पर बयान देने के लिये तपर रहने वाला मी’ करार देते हए भारतीय ओलपिक सघ के वरि उपायक्ष विजय कुमार ने आज खेल मी को खेल सघों के काया] में दखलदाजी से बचने की सलाह दी आर आगाह किया कि यदि उहोंने अपना रवया नहीं बदला तो आइओसी कुवत की तरह भारत के खिलाफ भी कडा फसला ले सकती ह।

ऐसा लगता ह कि रामडल खेलों को बढावा देने के नाम पर खेल सघों पर कजा करने की कोशिश की जा रही ह। उहोंने कहा, ‘म खेल मी एमएसगिल को सलाह देना चाहता ह कि उहें खेल सघों पर कजा करने के सपने देखना बद करके रामडल खेलों की परियोजनाआें को समय पर पूरा करने पर यान देना चाहिए।’

टिपणी खेल मालय से खेल सघों की मायता को लेकर हाल में जारी दिशानिर्देशों के सदभ में की जिसमें सरकार ने ३७ शत] रखी ह, जिनमें खेल सघों को केवल एक साल के लिये मायता देने की शत भी शामिल ह।

उहोंने कहा कि खेल सघों को मायता सरकार नहीं, बकि अतराीय ओलपिक समिति देती ह। राीय खेल महासघों के सघ (जीएएनएसएफ) के भी अयक्ष महाेा ने कहा कि सरकार केवल अनुदान देती ह मायता नहीं। सघों के कामकाज में पारदशिता के लिये खचा] का लेखाजोखा करना सही ह, लेकिन खेल मालय खेल सघों को मायता नहीं देता। यह काम आइओसी का ह।

महाेा ने इस सदभ में कुवत का उदाहरण दिया, जहा के ओलपिक सघ को सरकार की अयाधिक दखलदाजी के कारण आइओसी ने निलबित कर दिया था।

उहोंने कहा, ‘कुवत के उपधानमी (शेख अहमद अल फहद अल सबाह) खेल सघों में बहत अधिक हतक्षेप करने लगे थे जिसके कारण आइओसी ने कुवत ओलपिक समिति को निलबित कर दिया था। यदि भारत सरकार ने भी अपना रवया नहीं बदला तो आइओए को भी परेशानी झेलनी पड सकती ह।’ आइओसी कायकारी बोड ने इसी साल एक जनवरी को ओलपिक चाटर के नियम २८९ के अनुसार कुवत ओलपिक समिति को निलबित कर दिया था। महाेा ने इसके साथ ही खेल मी गिल को हर विषय पर बयान देने आर श्रेय लेने से बचने की भी सलाह दी।

उहोंने कहा कि गिल हमेशा श्रेय लेने की फिराक में रहते ह, लेकिन जब असहज सवाल आते ह तो दूसरे के मथे ठीकरा फोडते ह। वह किसी भी विषय पर बयान देने के लिये तपर रहने वाला मी बनते जा रहे ह। उहोंने कहा कि इस सदभ में गिल के टेडियमों का निमाण २००७ तक पूरा होने आर यमुना में बहत गदगी होने के कारण वहा पयटकों को जाने से रोकने सबधी बयानों का जिक किया।

महाेा ने कहा कि गिल ने सही कहा ह कि सभी टेडियम २००७ तक तयार होने चाहिए थे, लेकिन इसके लिये कान जिमेदार ह। निमाण में देरी आर परियोजना लागत में बढाेारी के लिये गिल आर दीि की मुयमी शीला दीक्षित दोनों जिमेदार ह आर यह आपराधिक लापरवाही का साफ मामला ह।

उहोंने कहा कि हमें २००३ में रामडल खेल मिल गये थे तो फिर सरकार ने यमुना की दशा सुधारने के लिये यास यों नहीं किये।

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