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कल्पनाआें को साकार करता है फैशन डिजाइनिंग कैरियर

Swatantra Vaartha  Mon, 15 Feb 2010, IST

कल्पनाआें को साकार करता है फैशन डिजाइनिंग कैरियर

fashion designers careerआज फैशन की ब़ढती लोकप्रियता से फैशन उद्योग ने अपने कैरियर के प्रति उत्साही और जागरूक उन युवाआें के लिए, जो अपनी कल्पनाआें को साकार रूप देने के लिए एक ठोस धरातल की तलाश कर रहे हैं, सफलता एवं व्यवसाय के लिए नए क्षेत्र प्रस्तुत किए हैं।

इस क्षेत्र में आगे ब़ढने के लिए और अपना एक अलग मुकाम स्थापित करने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आपमें उच्च शैक्षणिक योग्यता ही हो। साधारण शिक्षा भी आपको अपना एक अलग स्थान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। जरूरी यह है कि आपमें सूझबूझ हो और किसी भी विषय को समझने के लिए गहरी समझ हो और अपने परिवेश तथा अपनी संस्कृति की विशेष जानकारी हो।

यह बात सबसे महत्वपूर्ण है कि यदि व्यक्ति अपने लिए कोई कैरियर चुनता है, तो यह उसका व्यक्तिगत निर्णय होता है, लेकिन किसी भी क्षेत्र में अपनी पैठ जमाने के लिए अच्छी तरह सोचना विचारना चाहिए। किसी भी कैरियर को अपनाने या चुनने से पूर्व कुछ पहलुआें पर अवश्य ध्यान देना चाहिए जैसे भौगोलिक स्थिति, पारिवारिक स्थिति, धन, दबाव, कार्य करने के घंटे, स्वयं की रुचि और मानसिक क्षमता।

ये बातें किसी भी कैरियर को चुनने से पहले समझनी बहुत जरूरी होती है, क्योंकि सफलता यूं ही नहीं मिल जाती। विभिन्न क्षेत्रों में ‘चोटी’ या ‘शीर्षस्थ’ व्यक्तियों का यदि इतिहास देखा जाए, तो ये ही बातें सामने आएंगी।

ये तो थीं किसी भी कैरियर को अपनाने से पूर्व की गई ठोस बातें। अब हम मुख्य बिन्दु ‘फैशन डिजाइनिंग’ की ओर आते हैं। अन्य क्षेत्रों में तो ऊपर लिखी सात बातें आवश्यक होती हैं, लेकिन फैशन के इस कैरियर में एक महत्वपूर्ण बात यह भी जरूरी है कि आपमें तुरंत सूझबूझ व कल्पना शक्ति की क्षमता अवश्य होनी चाहिए। तभी आप यहां मुकम्मल स्थान पा सकते हैं।

‘फैशन डिजाइनिंग’ में आगे ब़ढने की पहली स़ीढी यह है कि यदि बचपन से ही आपने इस शौक को बतौर अपना कैरियर बनाने की ठानी है, तो आप स्वयं को उच्च कोटि का रचनात्मक, क्षमतावान और उत्पादन पद्धतियों की तकनीक को समझने योग्य बनाएं। फैशन जागरूकता, रंग व आकार का ज्ञान भी अपने आपमें विकसित करें।

आपको चाहिए कि विद्यालय स्तर से ही रेखाचित्र बनाने औैर नक्शा तथा खाका तैयार करने का अभ्यास करें। इस क्षेत्र में विशेष रुझान वाले युवा वर्ग को चाहिए कि वे प्रतिदिन अपने आस पास के लोगों व उनकी सोच व रुचि को ध्यान से देखें, समझें। उनके चित्र बनाएं और विभिन्न लोगों पर विभिन्न तरह की पोशाकों को यथार्थ चित्रांकन दें।

इस प्रकार धीरेधीरे व्यक्ति को अपने कला कौशल में एक नवीन विकास व सुधार का अनुभव होता चला जाएगा। बाद में वह संप्रेषण कला में भी पारंगत होने का भरपूर प्रयास करता है जिससे आगे जाकर ग्राहक की पसंद, नापसंद को समझा जा सके। एक कुशल फैशन डिजाइनर के लिए संप्रेषण कला में दक्ष होना बहुत जरूरी है। जब तक आप अपने तौर से यानी सतही तौर पर ‘फैशन’ को रेखांकित करना या इसे समझ कर थ़ोडाबहुत सीख जाते हैं तब अगला कदम होता है कि आप विधिवत रूप से किसी संस्था से प्रशिक्षण लें ताकि आपकी कल्पनाआें और सोचों को एक विशाल, ठोस धरातल मिल जाए।

यदि आप केवल फैशन में ही अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो अन्य तरफ से ध्यान हटाकर अपना ध्यान ‘अर्जुन के लक्ष्य’ के समान एक पर ही रखें। जब फैशन डिजाइनिंग कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा तथा पैनल साक्षात्कार का आयोजन किया जाता है, तो इसमें उम्मीदवार के व्यक्तित्व और उसकी तार्किक क्षमता का मुख्य रूप से मूल्यांकन किया जाता है। यदि आप साक्षात्कार में खरे उतर जाते हैं, तो समझना चाहिए कि आधा मैदान तो आप जीत ही गए, लेकिन केवल यहीं आप पूर्ण संतुष्ट न हो जाएं, क्योंकि इसी के बाद तो आपकी असली बौद्धिक क्षमता का निर्णय होगा यानी कोर्स और कक्षाआें की शुरुआत होगी जिसमें आपको स्केचिंग, ड्रेपिंग, एनीमेशन, फैशन, ग्राफिक्स, फैशन मल्टीमीडिया, आर्ट एंड इलस्ट्रेशन, व मर्चेंडाइजिंग आदि का अध्ययन करना होगा। कोर्स समाप्त करने के पश्चात्‌ आप गारमेंट प्रोडक्शन में पारंगत हो जाएंगे। अब आप अपनी रचनात्मक सोच को कागज पर स्कैच करेंगे। फिर इसे ड्राइंग में डाला जाएगा। इस ड्राइंग को फ्लैट पैटर्न पर रखकर ब़डी ही सावधानी से काटा जाएगा। इसी आधार पर आपका गारमेंट नमूना तैयार होगा।

अब आपके द्वारा तैयार किया गया नमूना खरीदारों को प्रदर्शन हेतु तैयार है। आपने प्रारंभ में जो संप्रेषण व योग्यता स्वयं में पैदा की थी, उसे अब देखा जाएगा कि किस प्रकार आप ग्राहक को अपने अनुरूप ढालते हैं। ग्राहक द्वारा निर्धारित तारीख व समय का अनुपालन करना एवं खींचातानी प्रतियोगिता के इस दौर में अपना आत्मविश्वास बनाए रखना, सबसे अहम्‌ सिद्धांत साबित होगा। इस प्रकार आप फैशन स्नातक हो जाएंगे और कोई भी प्रतिष्ठित डिजाइनर प्रशिक्षु के तौर पर आपको नियुक्त कर लेगा या कोई भी गारमेंट निर्माता आपको नौकरी की पेशकश कर चुका होगा।अब आपका प्रशिक्षण व अभ्यास दौर तो समाप्त हो गया, किन्तु यदि आप किसी के सान्निध्य में रहकर अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो आपको पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स करना होगा, ताकि आपके तरीकों व कार्यविधि में और भी अधिक नफासत आए।

अब तक के लिए अभ्यास व प्रयासों को परखने के लिए अब एक कठिन परीक्षा का दौर प्रारंभ होता है कि किस प्रकार आप स्वयं को एक मंजे हुए बिजनेसमैन/वूमैन के रूप में स्थापित करते हैं। स्वयं को अलग से स्थापित करने के लिए सबसे पहले यह जरूरी होगा कि आए दिन बदलते फैशन पर अपनी निगाह व पक़ड मजबूत बनाए रखें ताकि ‘कस्टमर’ की अचानक की गयी फरमाइश पर आप उसे वहीं सब कुछ दे सकें जो चलते फैशन के अनुसार ग्राहक की मांग हो।

आज अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में भी फैशन ने अपनी जगह ढ़ूंढ ली है। आए दिन जो यह प़ढा जाता है कि अमुक डिजाइनर इतना कमा लेता है या उसकी बनाई गयी महंगी पोशाकें भी अति लोकप्रिय हैं, तो ऐसा बनना डिजाइनर की कला कौशलता ही है और यूं ही कोई अंतर्राष्ट्रीय स्तर का डिजाइनर नहीं बन जाता। इस सबके लिए दिन रात का कठिन परिश्रम बहुत मायने रखता है। अतः विशेष रूप से हमारी आगे आने वाली युवा प़ीढी को यह चाहिए कि इस क्षेत्र में वह सबसे पहले हमारी भारतीय सभ्यता व संस्कृति का गहन अध्ययन करे ताकि आगे चलकर अपनी कल्पनाआें को साकार रूप दे सके। ब़डे शहरों में तो प्रायः फैशन से संबंधित सभी सुविधाएं उपलब्ध हो जाती हैं किन्तु कस्बों व गांव में रहने वाले इन जानकारियों से वंचित रहते हैं अतः उन्हें चाहिए कि अपनी मंजिल यदि वे प्राप्त करना चाहते हैं, तो अखबारों व पुस्तकों का गहन अध्ययन करें ताकि वे संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर आगे ब़ढ सकें।

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