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इम्प्रेसिव पर्सनैलिटी

Swatantra Vaartha  Mon, 15 Feb 2010, IST

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खूबसूरत मोना की खूबसूरती से ज्यादा लोग उसकी चाल पर फिदा थे। मोना की चाल युवकों पर बिजलियां गिराती। हर किसी का ध्यान बरबस ही उसकी बलखाती, इठलाती चाल की ओर आकर्षित हो जाता।

सीधे होकर चलना वैसे भी शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, लेकिन कमर झुकाकर कूब निकालकर चलना न केवल भद्दा लगता है, बल्कि शारीरिक विकार भी पैदा करता है मगर शारदा की सास को ये बात कौन समझाए। उनके आइडियाज तो सैट हैं। उनके हिसाब से तनकर सीधे चलना बहुआें को शोभा नहीं देता। बहुआें को आंखें झुकाये, गर्दन झुकाये दबकर चलना चाहिए, तभी उनकी गिनती शालीन बहुआें में होगी। शारदा का सीधे तनकर चलना उन्हें बेहद च़िढा देता था और वे हमेशा उसे इसके लिए टोकती रहती थी।

आज की युवतियां आत्मविश्वास से परिपूर्ण हैं और ये उनकी चाल से साफ झलकता भी है। आज एक सीखी हुई सीधी तनी हुई चाल स्मार्ट वुमैन की पहचान है। वैसे भी फेफ़डों को पर्याप्त ऑक्सीजन इसी तरह चलकर प्राप्त होती है, झुककर दबकर चलने से नहीं, जो कि आपके ढीलेढाले व्यक्तित्व का परिचायक बन जाता है।

नियमित सैर, व्यायाम व योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ व उर्जावान बना रहता है। इससे व्यक्तित्व में निखार आता है। ब़डे शहरों में जगहजगह पार्क बने होते हैं। यहां पर खुली हवा के साथसाथ आप लोगों से जानपहचान ब़ढा सकते हैं, जिससे एकाकीपन दूर होता है, आपका सामाजिक दायरा ब़ढता है।

पति के विवाहेत्तर संबंधों के लिए कई बार स्त्री स्वयं भी जिम्मेदार होती है, जब वह घर गृहस्थी के फेर में अपनी तरफ से बिलकुल लापरवाह हो जाती है। न वो अपने रखरखाव की तरफ ध्यान देती है, न ही अपनी हॉबीज की तरफ। अपनी शिक्षा प्रतिभा को भूल वो थैंकलेस जॉब में ही जिंदगी का अनमोल वक्त गंवाने लगती है।

पर्सनैलिटी ग्रूमिंग स्कूल की ओनर शुभा सरन कहती हैं कि हमारे यहां औरतें बहुत जल्दी अपने को ब़ुढा लेती हैं। वे भूल जाती हैं कि जिंदगी एक बार ही मिलती है और इसे भरपूर जीने के लिए शानदार व्यक्तित्व जरूरी है। नई चुनौतियों को निरंतर स्वीकार करते हुए नईनई गतिविधियों में भाग लेने से व्यक्तित्व का विकास जारी रहता है वरना स्टेगनेशन की स्थिति उन्हें समय से पहले ही बुजुर्गियत का जामा पहना देती है।

पर्सनैलिटी गुरु महिमा सेन के अनुसार रुटीन से हटकर कुछ करना आपका अपने पर विश्वास पुख्ता करता है। यह आपको आंतरिक खुशी भी देता है। फिर यहां उम्र की कोई बाधा भी नहीं होती। आप अपनी रुचि का कोई भी कार्य गायन, वादन, नृत्य, पेंटिंग, फैशन डिजाइनिंग, इंटीरियर डेकोरेशन, ज्वैलरी डिजाइनिंग के अतिरिक्त कंप्यूटर में कोई क्रैश कोर्स कर सकती हैं, बच्चों को प़ढा सकती हैं। अकाउंट्‌स में रुचि है, तो अकाउंटिंग में अपनी प्रतिभा विकसित कर सकती हैं

अपने को स्वयं मोटीवेट करें

अपनी सहायता आपको स्वयं करनी है, दूसरे से उम्मीद छ़ोड दें। बस अपने रोल मॉडल को ध्यान में रखें। समयसमय पर अपने को टटोलते हुए अपने को मोटीवेट करें, उसमें जुनून लाएं। केवल टाइमपास समझकर ही न करें। हर सफलता आपको सच्ची खुशी देगी और आगे ब़ढने के इरादे बुलंद करेगी।

दोस्तों की अहिमयत समझें

व्यक्तित्व को सम्पूर्णता प्रदान करने में दोस्तों का बहुत ब़डा हाथ होता है। दिमाग संतुलित रखने और सोच में ताजगी लाने के लिए उनसे इंटरएक्ट करना बहुत लाभप्रद साबित होगा। जीवन में खुशियां लाते हैं दोस्त। वे आपका सपोर्ट सिस्टम मजबूत बनाते हैं, लेकिन दोस्त वो ही चुनें, जो आपको समझते हों, जिनकी सोच सकारात्मक हो। ईर्ष्यालु व नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूर से ही ‘हायहैलो’ रखें। सामूहिक गतिविधियों में भाग लेने से ही आपकी प्रतिभा खुलकर सामने आएगी। अपना दायरा विस्तृत रखें, अलगअलग कार्यक्षेत्र व जाति के लोगों से ज़ुडें।

मात्र फैशन, खाना और बच्चों को ही हमेशा अपने डिस्कशन का विषय न बनाएं, न ही हर समय अपने अतीत को दोहराते रहने की आदत डालें। वर्तमान में जीते हुए करंट टॉपिक्स पर भी सार्थक बातचीत, चर्चा करें। न्यूजपेपर व मैग्जीन्स रेग्युलर प़ढें। सोशल अवेयरनेस हर किसी के लिए बहुत जरूरी है।

कई घरेलू कम प़ढीलिखी स्त्रियों का व्यक्तित्व भी बहुत प्रभावशाली होता है। वे इतनी आकर्षक लगती हैं कि मिलने वालों का ध्यान बरबस ही उनकी तरफ चुम्बक की तरह खिंचा चला जाता है। अच्छे संस्कारों का इसमें ब़डा हाथ है। अंदर का सौन्दर्य बाहर खुद व खुद प्रकट होता है, नहीं तो आप लाख नाटक कर लें, महंगे ग्रूमिंग स्कूलों से सीखी हुई अदाआें के जलवे बिखेरें, वो सरलता, वो सादगी, जो बेसिक मूल्य हैं, के बगैर बात ही नहीं बन पाएगी। फिर भी ग्रूमिंग स्कूलों की कोई उपयोगिता ही नहीं, ऐसा नहीं कहा जा सकता। वहां से मिलने वाली जानकारियां और ग्रूमिंग निसंदेह आपके व्यक्तित्व में चार चांद लगा देंगी। आपकी सोच, आपकी बॉडी लैंग्वेज, आवाज का मॉड्‌यूलेशन, एक्सप्रैशन, हर छोटेब़डे से किस तरह पेश आएं, जनरल बिहेवियर, ड्रैसिंग सेंस सभी कुछ में सुधार लाते हैं ये स्कूल लेकिन सबसे ब़डी पाठशाला तो आप स्वयं ही हैं। बस इम्प्रेसिव पर्सनैलिटी बनाने का इरादा पुख्ता होना चाहिए।

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