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एविएशन में अवसर तमाम

Swatantra Vaartha  Mon, 1 Mar 2010, IST

एविएशन में अवसर तमाम

अब एविएशन इंडस्ट्री को तेजी से ब़ढते हुए सेक्टर के रूप में स्वीकार किया जा चुका है। रोमांचक और जोशीले कैरियर के विकल्प के रूप में भी एविएशन इंडस्ट्री हमेशा युवाआें की पहली पसंद रही है। इस क्षेत्र में तेजी से ब़ढते करोबार, एयरलाइंस की संख्या में हो रही ब़ढोतरी और हर साल यात्रियों की ब़ढती संख्या के कारण नौकरी के ढेरों मौके सृजित होने लगे हैं। फिर चाहे महिलाआें के लिए एयर होस्टेस का पद हो या फिर इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल किए हुए युवाआें के लिए मौकों की बात हो, नीचे से लेकर ऊपर तक के पदों के लिए एविएशन इंडस्ट्री में रोजगार के ढेरों विकल्प खुल गए हैं। बस कैरियर की ऊंची उ़डान भरने के लिए उम्मीदवार में योग्यता, कुशलता , सेवा भावना जैसे गुण होने चाहिए। तभी वह एविएशन सेक्टर में मजबूती से कदम जमा पाएगा।

एयरक्र ाफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर

एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर का काम हवाई दुर्घटनाआें से होने वाली क्षति को कम करना ही नहीं होता, बल्कि एयरक्राफ्ट के सफलतापूर्वक संचालन में भी उसकी अहम भूमिका होती होती है। एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग का पाठ्‌यक्रम किए हुए युवाआें की जरूरत एयरक्राफ्ट निर्माताआें और मेंटेनेंस सर्विसेज उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को भी प़डती है। इनके अतिरिक्त एयरलाइंस मेंटेनेंस में फ्लाइट एंड ग्राउंड इंस्ट्रक्टर, फ्लाइट डिस्पैचर, फैक्टर फैसिलिटेटर, एविएशन साइकोलॉजिस्ट, एविएशन डॉक्टर जैसे पदों पर भी जॉब के मौके मिल सकते हैं। एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग का पाठ्‌यक्रम तीन वर्ष का होता है, जिसमें प्रवेश के लिए उम्मीदवार को कम से कम ५० फीसदी अंकों के साथ बारहवीं या इंटरमीडिएट (भौतिकी, रसायनशास्त्र एवं गणित विषयों के साथ) उत्तीर्ण होना चाहिए या फिर उसने कम से कम पचास फीसदी अंकों के साथ इंजीनियरिंग में डिप्लोमा का पाठ्‌यक्रम किया हो।

एयरलाइंस मैनेजमेंट

अन्य व्यवसायों की तरह एविएशन इंडस्ट्री के कुशल प्रबंधन के लिए खास तरह के कौशल और ट्रेनिंग की आवश्यकता प़डती है। हालांकि इस प्रकार के ज्यादातर संस्थान हमारे देश में उपलब्ध नहीं हैं, जो इस उद्योग पर केंद्रित एमबीए जैसी डिग्री प्रदान करें। लेकिन आने वाले समय में ऐसे संस्थान ब़डी संख्या में अस्तित्व में आएंगे। फिलहाल तो सामान्य एमबीए डिग्री धारकों को ही एयरलाइंस मैनेजमेंट का भार सौंपा जा रहा है।

एवियोनिक्स इलेक्ट्रॉनिक्स

अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट की पूरी कार्यप्रणाली इलेक्ट्रॉनिक्स पर आधारित होती है। इनकी कार्यप्रणाली सही ढंग से काम करे और इनका उपयोग उचित तरीके से किया जाए, इसके लिये एवियोनिक्स इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इस पाठ्‌यक्रम में बैचलर डिग्री प्राप्त उम्मीदवार इलेक्ट्रिक सर्किट, डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरक्राफ्ट कम्युनिकेशन, नेविगेशन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक फ्लाइट इंस्ट्रूमेंट सिस्टम्‌ इंटीग्रेटेड एवियोनिक्स सिस्टम के अलावा ट्रैफिक एलर्ट जैसे कार्यों में भागीदारी दे सकते हैं। एवियोनिक्स में बैचलर ऑफ साइंस के अलावा एएएस यानी एसोसिएट इन अप्लायड साइंस जैसी डिग्री पाठ्‌यक्रम भी प्रचलित हैं, जो छात्र को एविएशन इंडस्ट्री की तकनीकी शाखा में आसानी से जॉब दिला देते हैं।

एयरक्राफ्ट डिजाइनिंग

हवाई जहाज में जितनी भी तरह की अत्याधुनिक सुविधाएं देखने को मिलती हैं, उसमें एयरक्राफ्ट डिजाइन इंजीनियर्स का महत्वपूर्ण योगदान होता है। ये न सिर्फ नई तकनीक के प्रयोग से हवाई यात्रा को सुरक्षित बनाने का प्रयास करते हैं, बल्कि यात्रियों की सुविधाआें का भी ध्यान रखते हैं। एयरक्राफ्ट डिजाइनर एयरोडायनेमिक्स, जहाज की सरंचना, उसके निर्माण में प्रयोग में आने वाले सामानों सहित कई बातों की प़डताल करते हैं और एयरक्राफ्ट को और उत्कृष्ट बनाने का प्रयास करते हैं। एयरक्राफ्ट डिजाइनर बनने के लिए एयरोस्पेस इंजीनियरिंग या उससे संबंधित क्षेत्र में महारत होनी चाहिए। कुछ उम्मीदवार एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में पीजी या पीएचडी करके भी एयरक्राफ्ट डिजाइन में अपना कैरियर बना सकते हैं।

इंस्ट्रक्टर्स

पायलट से लेकर अन्य प्रकार के एविएशन क्रू को ट्रेनिंग देने का काम इन्हीं इंस्ट्रक्टर्स के माध्यम से होता है। इनकी आवश्यकता ट्रेनिंग संस्थानों के अलावा एयरलाइंस कंपनियों तक में होती है।

केबिन क्रू एवं इन फ्लाइट सर्विस

किसी भी एयरलाइंस के संचालन में केबिन क्रू एवं इन फ्लाइट सर्विस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनका कार्य यात्रियों की सुखसुविधा का ध्यान रखने से लेकर सुरक्षित यात्रा को सुनिश्चित करना भी होता है। केबिन क्रू ही यात्रियों को हवाई जहाज में यात्रा करने संबंधी नियमों और कानूनों का अनुपालन करना सिखाते हैं । इस तरह की जॉब्स पाने के लिए इनका कार्यकलाप महज हवाई यात्रियों के लिए खानपान की व्यवस्था करने तक सीमित नहीं होता है। केबिन क्रू बनने के लिए मुख्य तौर पर कम से कम दस महीनों का डिप्लोमा पाठ्‌यक्रम करना होता है। इसके लिए आम तौर पर बारहवीं या स्नातक तथा आकर्षक, सौम्य एवं मृदुभाषी युवाआें को चुना जाता है तथा इस तरह की जॉब्स से ज़ुडने के लिए उम्मीदवार के लिए आयु सीमा १८ से २७ वर्ष होनी चाहिए। एयर होस्टेस, फ्लाइट अटेंडेंट, ग्राउंड होस्टेस, चेक इन होस्टेस आदि पद केबिन क्रू के अंतर्गत ही आते हैं।

ग्राउंड ड्‌यूटी स्टाफ

टिकेटिंग, कार्गो बुकिंग, एयर लाइंस मार्केटिंग, इमेज बिल्डिंग, कस्टमर केअर,टेलीकॉलिंग, इत्यादि काया] के लिए अलग से ग्राउंड ड्‌यूटी स्टाफ की प्रत्येक एयरलाइंस को लगभग सभी एयरपोर्ट्‌स पर जरूरत प़डती है। संबंधित विधा में ट्रेंड लोगों को ही विशिष्ट चयन प्रक्रिया के आधार पर रखा जाता है। अमूमन इनकी ड्‌यूटी डे नाइट शिफ्ट में होती है। इन सबके अतिरिक्त सेल्स एंड पर्चेजिंग, टेक्नीशियन, फ्लाइट मैकेनिक, फ्लाइट अटेंडेंट, एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन, कार्गो मैनेजमेंट, ऑफिस सपोर्ट जॉब्स, कॉकपिट रिसोर्स मैनेजमेंट इत्यादि पर आधारित विभिन्न पद एयरलाइंस में होते हैं।

पायलट ट्रेनिंग

एविएशन सेक्टर के सभी महत्वपूर्ण जॉब्स में कमर्शियल पायलट का भी कैरियर शामिल है। कमर्शियल पायलट हवाई जहाज को न सिर्फ कुशलता से हैंडल करता है, बल्कि वह आकाश में लंबी उ़डान के रोमांस से भी रूबरू होता है। इसलिए तो अधिकतर युवाआें में इस पद तक पहुंचने की चाहत होती है। पर पायलट बनने के लिए केवल हवाई जहाज चलाना आना ही काफी नहीं होता है, बल्कि कमर्शियल पायलट को हवाई जहाज की छोटी से छोटी तकनीक की जानकारी होना जरूरी होता है। कमर्शियल पायलट को सरकारी एवं निजी क्षेत्र की विमान कंपनियों में रोजगार के मौके मिल सकते हैं। इसके लिए उम्मीदवार को किसी फ्लाइंग क्लब या स्कूल के टेस्ट पास करने के पश्चात डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन द्वारा लाइसेंस जारी किया जाता है।

एयर होस्टेस

केबिन क्रू की एक सदस्य होती है एयर होस्टेस। आकर्षक, मेहनतकश एवं बातचीत करने में सक्षम महिलाआें को यह ग्लैमरस फील्ड अपनी ओर खींचता है। यह एक ऐसा प्रोफेशन है, जिसमें हर दिन रोमांचक यात्रा करने के अवसर के साथसाथ महिलाआें को सुनहरे कैरियर का अवसर मिलता है। कम से कम इंटरमीडिएट या समकक्ष उत्तीर्ण १९२६ वर्ष की युवतियां एयर होस्टेस ट्रेनिंग प्रोग्राम करने के लिए योग्य मानी जाती हैं। एयर होस्टेस को हमेशा असामान्य परिस्थितियों में काम करने के लिए तैयार होना चाहिए, साथ ही उसे यात्रियों के साथ भी हमेशा सामान्य रहने की जरूरत होती है। एयर होस्टेस बनने के लिए तीन से छह महीनों का शॉर्ट टर्म कोर्स करना होता है और कई बार यह कोर्स एक वर्ष का भी हो सकता है। इसके बाद उन्हें किसी एयरलाइंस कंपनी में इस पद पर जॉब मिल सकती है।

प्रशिक्षण एवं कोर्सेस

एविएशन सेक्टर से ज़ुडे अधिकांश कोर्स पार्ट टाइम या शॉर्ट टर्म कोर्स होते हैं। विशेषकर केबिन क्रू और एयरलाईंस टिकेटिंग से संबंधित पाठ्‌यक्रम। इसके अलावा कमर्शियल पायलट एवं इंजीनियर बनने के लिए उम्मीदवार को जरूरी योग्यता हासिल करनी होती है। हालांकि प्रत्येक एयरलाइंस नए कर्मियों को भर्ती के तुरंत बाद कुछ समय का ओरिएंटेशन कोर्स अवश्य करवाती है, ताकि वह एविएशन इडंस्ट्री की कार्यप्रणाली के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें। एविएशन इंडस्ट्री की एक खासियत यहां मिलने वाली कई सुविधाएं और आकर्षक वेतनमान भी है।

फ्लाइट अटेंडेंट भी बन सकते हैं

एविएशन सेक्टर में पायलट या इंजीनियर के अतिरिक्त कई ऐसे पद भी हैं, जिन पर काम करके अपना कैरियर प्रोफाइल मजबूत किया जा सकता है। ऐसे ही पदों में से एक है फ्लाइट अटेंडेंट। हाल ही में एविएशन सेक्टर में करीब एक लाख युवाआें की इस पद पर भर्ती की गई है, जिससे पता चलता है कि इस पद पर भी रोजगार के ढेरों मौके हैं । वैसे युवा जिन्होंने कम से कम हाई स्कूल डिप्लोमा स्तर की शिक्षा प्राप्त कर ली हो, इस पद के लिए योग्य माने जा सकते हैं। हालांकि स्नातक उत्तीर्ण युवाआें को जॉब में वरीयता मिल सकती है। जिन छात्रों ने फ्लाइट अटेंडेंट की ट्रेनिंग ली है, वह इस जॉब के उपयोगी होते हैं। फ्लाइट अटेंडेंट के लिए आवेदन करने हेतु उम्मीदवार की आयु कम से कम १८ से २१ वर्ष होनी चाहिए तथा साथ ही उनमें यात्रियों के साथ सामंजस्य बिठाने का विशेष गुण हो , तो उन्हें जॉब में आसानी होती है। नए फ्लाइट अटेंडेंट को शुरुआत में सीनियर के साथ तीन से आठ सप्ताह की प्रशिक्षण अवधि में कार्य करने को कहा जाता है, उसके बाद उन्हें कम से कम पांच से दस वर्ष तक नियुक्ति दी जाती है। कभीकभी उन्हें अस्थायी तौर पर भी जॉब दी जाती है। उसे स्वतंत्र रूप में कार्य करने का अवसर दिया जाता है। फ्लाइट अटेंडेंट का काम लोगों तक उनके जरूरी सामान पहुंचाने से लेकर उनके टिकट की जांच करना और उन्हें समान रखने की जगह बताना होता है। इसके अलावा यात्रियों के बीमार होने पर उनकी सेवा एवं इसी तरह की अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की सारी जिम्मेदारी फ्लाइट अटेंडेंट पर होती है।

कहते हैं विशेषज्ञ

नई दिल्ली स्थित जे आर एन इंस्टीट्‌यूट के ज्वाइंट डायरेक्टर सुब्रतो भट्टाचार्य ने बताया कि आनेवाले समय में एविएशन फील्ड में युवाआें को ब़डी संख्या में नौकरियां मिलने की संभावना है। खासकर एयक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग में युवाआें के लिए ढेरों मौके होंगे। हवाई जहाजों की संख्या ब़ढने से इस फील्ड के प्रोफेशनल्स की अच्छी डिमांड है। जेआरएन इंस्टीट्‌यूट में इस तीन वर्षीय कोर्स में ढाई साल थ्योरी एवं प्रैक्टिकल स्पेशल प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाती है। इस कोर्स के लिए उम्मीदवार को १२ वीं में ५० प्रतिशत अंक होने जरूरी हैं। यह पाठ्‌यक्रम करने के बाद टेक्नीशियन की नौकरी मिल सकती है। इसके बाद सिटी इंजीनियर, फॉरमेैन, उन्नति होती जाती है। यहां पायलट या फिर इंस्ट्रक्टर बन सकते हैं। साइंस के लिए आवेदन कर सकते हैं। पर इसके लिए शारीरिक तौर पर भी फिट होना चाहिए।

संस्थान:

* इंडियन इंस्टीट्‌यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स, दिल्ली

* भारत इंस्टीट्‌यूट ऑफ साइंस, जमशेदपुर

* इंडियन इंस्टीट्‌यूट ऑफ एयरोनॉटिकल साइंस, कोलकाता

* आजाद इंस्टीट्‌यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स, लखनऊ

* अल्पाइन इंस्टीट्‌यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स , देहरादून

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