सिक्के प़ढकर नोट कमाएं
न्यूमिस्मैटिक का मतलब है सिक्कों का अध्ययन। हो सकता है इन सिक्कों की खनक और चमक से आपके कैरियर में रौनक आ जाए। आइए जानते हैं क्या है यह पाठ्यक्रम और कैसे बना सकते हैं, इसमें कैरियर।
पुराने सिक्के या रुपये लोगों को हमेशा लुभाते रहे हैं, लेकिन अब इनसे लगाव सिर्फ एक शौक नहीं रहा, यह आय का जरिया भी बन चुका है। इसलिए इसमें बाकायदा विशेषज्ञता (डिग्री) हासिल कर इसे कैरियर का स्वरूप दिया जा सकता है। आर्कियोलॉजी से ज़ुडे विभिन्न कोर्सेज में इस विषय की प़ढाई कराई जाती है। इसके अलावा इसमें स्पेशलाइजेशन करने के लिए अब उम्मीदवार को विदेश जाने की भी जरूरत नहीं है। मुंबई स्थित अलकेश दिनेश मोदी न्यूमिस्मैटिक म्यूजियम ने एक से तीन महीने के कई कोर्स शुरू किए हैं। मार्च से शुरू हो रहे इन पाठ्यक्रमों में सिर्फ सप्ताह के अंत में ही कक्षा की व्यवस्था की गई है।
क्या है न्यूमिस्मैटिक कोर्स
न्यूमिस्मैटिक का अर्थ होता है, मुद्राशास्त्रीय। इसलिए न्यूमिस्मैटिक कोर्स के अंतर्गत उन सभी जानकारियों से परिचय कराया जाएगा, जो सिक्कों या रुपयों के इतिहास को समझने में मददगार हो। चूंकि न्यूमिस्मैटिक के विविध आयाम होते हैं, लिहाजा उन्हें आसान बनाने के लिए इसे कई कोर्सेज में बांटा गया है। पाठ्यक्रम की शुरुआत में केवल ईसापूर्व छठी शताब्दी के सिक्कों की गौरवगाथा बताई जाएगी, वहीं एडवांस कोर्स में पुराने सिक्कों (बाह्मी, खरोष्ठी और ग्रीक सिक्कों) के इतिहास से रूबरू कराने की कोशिश होगी। इसलामी सिक्कों के रूप में पर्सियन और अरबी सिक्कों की समझ ब़ढाई जाएगी, वहीं आधुनिक रुपयों के महत्व को जानने के लिए पिछले ३०० वषा] के सिक्कों की खनक सुनाई जाएगी। न्यूमिस्मैटिक और ऑर्कियोलॉजी के दो साल के मास्टर कोर्स में एक विशेष पाठ्यक्रम क्वाइन फोटोग्राफी का भी है, जिसमें तसवीरों के जरिये सिक्कों के इतिहास की जानकारी दी जाएगी।
इन पाठ्य्क्रमों में प्रायोगिक कक्षाआें पर विशेष जोर होगा, क्योंकि न्यूमिस्मैटिक को महज किताबी अध्ययन से ही नहीं समझा जा सकता। छात्रों को अपने अंदर न सिर्फ रुपयों को पहचानने की कला विकसित करनी होगी, बल्कि उनकी विशिष्टताआें को भी आत्मसात करना प़डेगा। ऐसे लोग जिन्हें सिक्के इकट्ठा करने का शौक होता है, उनके लिए यह फील्ड काफी कारगर साबित हो सकती है।
अवसर
न्यूमिस्मैटिक में पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद आपको कई प्रोफेशनल जॉब्स के अवसर मिलेंगे। कई भारतीय संग्रहालय और विश्वविद्यालय, जो इतिहास, पुरातात्विक और सभ्यता आदि विषय प़ढाते हैं, उन्हें न्यूमिस्मैटिक एक्सपर्ट की आवश्यकता होती है। ऐसी जगहों पर योग्यताधारी को प्रमुखता दी जाती है। वैसे भी इतिहास की जानकारी सिक्कों के बिना अधूरी है। यह सिक्के ही हैं, जिन्होंने बताया था कि अलेक्जेंडर के मात्र छह उत्तराधिकारी ही नहीं हुए, बल्कि तकरीबन २२ इंडोग्रीक राजाआें ने उसकी वंशावली को आगे ब़ढाया। इतना ही नहीं, छोटीछोटी दुकानों से लेकर अंतर्राष्ट्रीय पैमाने पर भी सिक्कों की दुनिया को जाननेसमझने वालों को तरजीह दी जाती है।
आर्कियोलॉजी पाठ्यक्रम भी लाभप्रद
यदि आप आर्कियोलॉजी में उच्च स्तर का डिग्री पाठ्यक्रम करते हैं, तो इसमें भी आप सिक्कों के अध्ययन से संबंधित विषय प़ढ पाएंगे। यह कोर्स स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा स्तर पर उत्तर भारत के कई संस्थाआें में संचालित किया जाता है। इनमें इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, बनारस यूनिवर्सिटी एचएन बहुगुणा यूनिवर्सिटी, पंजाब यूनिवर्सिटी आदि शामिल हैं।
