क़ढाई से करें कमाई
आसमान छूती महंगाई से निपटने के लिए अपनी आमदनी ब़ढाना भी जरूरी हो गया है। कम खर्च और एक छोटी सी ट्रेनिंग के जरिए आप घर की कमाई ब़ढाने में अहम योगदान दे सकते हैं।
कहते हैं, अगर इंसान के पास हुनर हो तो वह कभी भूखा नहीं मरता। कुछ न कुछ कर ही लेता है। अकसर आप घर की महिलाआें या दादीअम्मा को क़ढाई करते हुए जरूर देखते होंगे। लेकिन क्या कभी इससे आय करने की सोची है ? जी हां, सूई धागे के इस मेल से आप अच्छी खासी कमाई भी कर सकते हैं।
आमदनी ब़ढाने का जरिया
आजकल एंब्रॉयडरी का प्रचलन ज्यादा है। सलवार, कमीज, लहंगेचुन्नी, रेडीमेड कप़डों के अलावा हैंड बैग, पर्स, बेडशीट, रुमाल वगैरह पर भी कसीदाकारी के आकर्षक नमूने देखे जा सकते हैं। एनवीटीआई की प्राचार्या ए डी त्रिवेदी कहती हैं कि ब़ढती महंगाई के इस जमाने में जितना भी धन कमाया जाए, वह परिवार के गुजारे के लिए अपर्याप्त है। यदि आप सूईधागे की बाजीगरी से वाकिफ हैं या रुचि रखते हैं, तो एंब्रॉयडरी का काम आपके लिए सही है। अगर घर की महिलाएं अपने खाली समय में कुछ ऐसे कार्यों व व्यवसायों को अपनाएं, तो वे भी परिवार की आमदनी को ब़ढा सकती हैंंं।
कप़डों की सिलाई व क़ढाई का काम करने वाली अमिता बताती हैं कि मैंने क़ढाई वगैरह का काम अपनी मां से ही सीखा था। अकसर लोग मेरी कसीदाकारी को देख तारीफ भी करते और अपने लिए चीजें बनवाते थे। बाद में मेरे घर वालों ने इसे ही अपना कैरियर बनाने की सलाह दी। फिर मैंने हैंड और मशीन एंब्रॉयडरी की तीन महीने की ट्रेनिंग ली । इसके बाद क़ढाई करने वाली मशीन भी ले ली। शुरू में थ़ोडी परेशानी हुई, क्योंकि मैं क़ढाई के लिए बुटिक से काम लेती थी। हालांकि लोग फ्रेेेेशर को जल्दी काम देना नहीं चाहते हैं, लेकिन जैसे ही काम लोगों को पसंद आने लगा डिमांड भी ब़ढती गई। आज मैं घर बैठे पांच से दस हजार कमा लेती हूं। एक सूट व स़ाडी के लिए आराम से ड़ेढ से दो सौ रुपये मिल जाते हैं। पारंपरिक राजस्थानी मोज़डी की बात हो या दूल्हे की शेरवानी, क़ढाई का जादू ही बोलता है। ऐेसे में अगर आप किसी दुकान या गारमेंट कंपनी से काम लेती हैं, तो आपको अच्छा मार्जिन मिल जाता है।
थ़ोडे प्रशिक्षण और धन की ही जरूरत
आय उपार्जन के ऐसे व्यवसाय को थ़ोडे प्रशिक्षण के बाद ही शुरू किया जा सकता है। सबसे खास यह है कि इस व्यवसाय को बहुत कम पैसे में शुरू किया जा सकता है। प्रशिक्षण लेने के बाद हाथ व मशीन द्वारा क़ढाई का कार्य शुरू किया जा सकता है। इसके लिए बस अच्छी क्वालिटी के क़ढाई वाले धागे, सूई, क़ढाई मशीन की जरूरत प़डती है।
संस्थान
सभी वुमन पॉलिटेक्निक कॉलेजों के अलावा आप नेशनल वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, नोएडा से एंब्रॉयडरी की ट्रेनिंग ले सकते हैं। एंब्रॉयडरी और नीडल क्राफ्ट आठ महीने का कोर्स है इसके अलावा हैंड व मशीन एंब्रायडरी के लिए दो सप्ताह का प्रोग्राम होता है। इस कोर्स के तहत क़ढाईसिलाई की बेसिक जानकारी भर दी जाती है। बाकी आपका हुनर।
किरण मिश्रा
