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कुदरत बचाओ, किरयर बनाओ

swatantravarha  Mon, 28 Dec 2009, IST

कुदरत बचाओ, किरयर बनाओ

एक जमाना था जब छााें की ाथमिकता की सूची में सबसे अत में आता था पयावरण विज्ञान यानी इनवायनमेंटल साइस। लेकिन अब इस सूची में यह ऊपर की ओर कदम बढा रहा ह। जलवायु परिवतन आर उससे होने वाले खतरों के विषय में लगातार बढ रही जागकता आर पयावरण को बचाने के लिए विव के विभि हिसों में चल रहे आदोलनों के कारण अब छााें के बीच विषय के प में पयावरण विज्ञान की लोकयिता बढने लगी ।

पयावरण विज्ञान के ति छााें की बढ रही चि का एक कारण यह भी ह कि अब पयावरण से जुडे फीड में नाकरी की सभावना भी काफी तेजी से बढ रही ह। पयावरण के क्षे से जुडी इन नाकरियों को गीन जास का नाम दिया गया ह। गीन जास के क्षे में शिक्षित लोगों की माग कितनी तेजी से बढ रही ह, इसका अदाजा इसी बात से लगाया जा सकता ह कि सितबर, २००९ में दीि में देश के पहले गीन जास फेयर का आयोजन किया गया था। इस नाकरी मेले में देशविदेश की २५ से यादा कपनियों ने भाग लिया था।

या ह गीन जास

पर यहा सवाल उठता ह कि आखिर गीन जास ह या आर गीन जास की श्रेणी में कानसी नाकरियों को रखा गया ह ? पयावरण सुरक्षा के क्षे में काम करने वाली मुबइ थित एनजीओ ‘दी लाइमेट पोजेट इडिया’ के डायरेटर गारव गुा के अनुसार, ‘गीन जास, काय की ऐसी विधिया ह, जहा पयावरण की सुरक्षा को यान में रखते हए वतुआें का उपादन आर उसका उपयोग किया जाता ह। बिजली की बचत आर सार तथा पवन ऊजा आदि अधिकसे अधिक इतेमाल करने वाली बिडिग का निमाण करने वाला आकिटेट, वाटर रीसाइकल सिटम लगाने वाला लबर, विभि कपनियों में पयावरण के सरक्षण से सबधित शोध काय आर सलाह देने वाले लोग, ऊजा की खपत कम करने की दिशा में काम करने वाले विशेषज्ञ, पारिथितिकी त व जव विविधता को कायम करने के गुर सिखाने वाले विशेषज्ञ, दूषण की माा आर गीन हाउस गसों के उसजन को कम करने के तरीके बताने वाले एसपट आदि के काम गीन जास की श्रेणी में आते ह।’ विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले व में हर नाकरी में यह क्षमता होगी कि वह गीन जाब में तदील हो सके। इस सेटर में धीरेधीरे वितार हो रहा ह आर साथ ही साथ नाकरी की सभावनाए भी बढ रही ह। यह सेटर शिक्षित लोगों की माग करता ह आर बदले मे अछी सलरी देता ह। कइ विशेषज्ञों की यह भी राय ह कि जिस तरह सूचना आर ााेगिकी क्षे मे एक जमाने में भारी उछाल आया था, वसा ही आने वाले व में गीन जास के क्षे में होगा।

भारत तेजी से शहरीकरण की ओर बढ रहा ह। हमारे यहा नए भवनों का निमाण हो रहा ह आर ऊजा की माग भी बढ रही ह। आने वाले समय में पयावरण सरक्षण के क्षे में नियमकायदे आर भी प व कडे होंगे आर पयावरण सुरक्षा के साथसाथ विकास के फामूले को हर जगह मायता मिलेगी। अय क्षेाें के अलावा कषि के क्षे में भी भारतीय आर विदेशी कपनिया भारत में रिसच आर डेवलपमेंट सेंटर की थापना कर रही ह। कषि उपादन बढाने आर पारिथितिकी त को कमसेकम नुकसान पहचाने की दिशा में लगातार शोध काय आर निवेश हो रहे ह। हर साल सिफ इन मागों को पूरा करने के लिए ५००० शिक्षित लोगों की जरत होगी। आनेवाले समय में देश के सभी छह लाख गावों को पानी आर कचरा बधक की जरत होगी आर इस जरत को पूरा करने के लिए १२ करोड शिक्षित लोगों की जरत होगी। आप अगर गीन जास कर रहे ह, तो इसका मतलब यह ह कि आप नाकरी के साथ पयावरण सरक्षण की दिशा में भी अपना महवपूण योगदान दे रहे ह।

कसे करें शुआत

सर्वो यायालय के दिशानिर्देश के आधार पर यूजीसी ने गेजुएशन के तर पर इनवायनमेंटल टडीज को अनिवाय बना दिया ह। कूल आर टेनिकल पाठकमों के तर पर यह जिमेदारी कमश एनसीइआरटी आर एआइसीटीइ को सापी गइ ह। पयावरण विज्ञान बेसिक साइस आर सोशल साइस दोनों का मिश्रित प ह। रिसोस मनेजमेंट आर रिसोस टेनोलाजी भी पयावरण विज्ञान का एक महवपूण अग ह। पयावरण से जुडे विभि क्षेाें में अपना करियर बनाने के लिए पढाइ बारहवीं के बाद शु की जा सकती ह, पर इस तर पर सथानों की सया कम ह। गीन जास के क्षे में बेहतर करियर बनाने के लिए पयावरण विज्ञान में उ शिक्षा ा करना आपके भविय के लिए अछा होगा। पयावरण से सबधित नीतियों के निमाण में दिलचपी रखने वाले साधारण गेजुएट के लिए भी यहा माके ह। जीव विज्ञान के साथ बारहवीं की परीक्षा उाीण करने वाले छा गेजुएशन के तर पर इनवायनमेंटल साइस की पढाइ कर सकते ह। फिजिकल साइस, लाइफ साइस, इजीनियरिग या मेडिकल साइस आदि विज्ञान विषयों से गेजुएशन करने के बाद इनवायनमेंटल साइस में पोटगेजुएशन करना बेहतर होगा। इनवायनमेंटल साइस में बीटेक का कोस भी कइ सथानों में उपलध ह।

सेंटर फार साइस एड इनवायनमेंट, दीि में पयावरण विज्ञान से जुडे विषयों में इटनशिप आर सटिफिकेट कोस करवाया जाता ह। देश में पयावरण विज्ञान को समपित दीि थित एकमा सथान दी एनर्जी एड रिसोस इटीटूट यानी टेरी में इनवायनमेंटल साइस से सबधित विषयों में पोटगेजुएट आर डाटेरल तर के पाठयकमों की पढाइ होती ह। टेरी पयावरण विज्ञान के क्षे में कालरशिप भी देती ह। इडियन कूल आफ माइस, धनबाद में इनवायनमेंटल इजीनियरिग में बीटेक की पढाइ होती ह। यूनिवसिटी आफ पेटोलियम एड एनर्जी टडीज, देहरादून में इनवायनमेंटल इजीनियरिग में बीइ का कोस उपलध ह। इू में इनवायनमेंटल टडीज में छह माह का सर्टीफिकेट कोस उपलध ह। इसके अलावा कइ सरकारी आर गरसरकारी सथाए भी पयावरण सरक्षण की दिशा में टेनिंग दे रही ह। इनमें अमोडा थित गोविंद बभ पत हिमालय पयावरण एव विकास सथान, देहरादून थित इडियन काउसिल आफ फारिटी रिसच एड एजूकेशन, इलाहाबाद थित सेंटर फार सोशल फारिटी एड इकोरीहेबिलिटेशन, बगलू थित सेंटर फार इनवायनमेंटल एजूकेशन आर चेइ थित सीपीआइ इनवायनमेंटल एजूकेशन पमुख ह।

इनवायनमेंटल साइस में पोटगेेजुएशन के बाद विकपों की भरमार ह। सरकारी आर गरसरकारी क्षे में इनवायनमेंटल बायोलाजिट, इनवायनमेंटल आफिसर, इनवायनमेंटल मनेजर, इनवायनमेंटल साइटिट, इनवायनमेंटल कसटेंट, इनवायनमेंटल एसटेंशन आफिसर, इनवायनमेंटल ला आफिसर आदि उपलध ह। वतमान समय में शिक्षित इनवायनमेंटलिट की देशविदेश में काफी माग ह। हर राय में पोयूशन कटोल आर इनवायनमेंटल ाेटेशन बोड होता ह। इनवायनमेंटल साइस में कोइ भी पोट गेजुएट इनवायनमेंटल आफिसर आर सीनियर इनवायनमेंटल आफिसर के पद के लिए आवेदन कर सकता ह। ाइवेट सेटर में भी शुगर मिल, खाद की फटी, चावल मिल, आटा मिल, आटोमोबाइल इडटी आर सिमेंट फटी आदि में आपके लिए गीन जास के माके ह। पयावरण विज्ञान के क्षे में छााें को शिक्षित करने के लिए कूल आर कालेज के तर पर शिक्षकों की भी जरत होगी।

कहा होती ह पढाइ

कूल आफ इनवायनमेंटल साइस, जेएनयू, नइ दीि

दी एनर्जी एड रिसोस इटीटूट (टेरी), नइ दीि

सेंटर फार इकोलाजिकल साइसेज, इडियन इटिटूट आफ साइस, बगलू

डिपाटमेंट आफ इनवायनमेंटल साइसेज, श्रीनगर, गढवाल

डिपाटमेंट आफ इनवायनमेंटल बायोलाजी, यूनिवसिटी आफ दीि

कूल आफ इनवायनमेंटल साइसेज, रायबरेली रोड, लखनऊ

डिपाटमेंट आफ इनवायनमेंटल साइसेज, जभेवर यूनिवसिटी, हिसार

इू, नइ दीि

सयु रा सघ ारा करवाए गए एक सर्वे के अनुसार २०२५ तक भारत में जव इधन निमाण के क्षे में ९००,००० नाकरियों के अवसर पदा होंगे। इसमें से ३००,००० नाकरिया टोव निमाण के क्षे में उप होंगी। लगभग ६००,००० से यादा लोगों को इधन आपूति आर इससे जुडे अय क्षेाें में नाकरिया मिलेंगी। पयावरण आर उससे जुडे ाेडट आर सेवाआें का वविक बाजार २०२० तक वतमान के १,३७० अरब डालर से बढकर २,७४० अरब डालर का हो जाएगा।

शावती

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