िरसेशनिट रोचक, मनोरजक आर मुकराहटों से भरा किरयर
एक कहावत ह कि पहला भाव ही थायी होता ह। यह बात सा फीसदी सही ह। बहत से ऐसे काम ह, जहा आगतुक या गाहक का वागत करने वाले य से उसकी थम मुलाकात हो आर वह भावपूण तथा मधुर हो। इसी साित को यान में रखते हए आजकल बडेबडे आर अछे होटलों में, यावसायिक सथाआें तथा कपनियों के आफिसों में रिसेशनिट रखने का चलन ह। रिसेशनिट की नाकरी पाने के लिए शिक्षा आर शिक्षण के साथसाथ आकषक यवि का होना भी बहत जरी ।
जो युवतिया अथवा युवक रिसेशनिट की नाकरी को अपना करियर बनाना चाहते ह, उहें इस क्षे में तरी के अनेक अवसर मिल सकते ह आर इस कार वे अछा वेतन पाने के साथसाथ सुदर भविय भी बना सकते ह।
किसी भी अछे दतर या होटल में घुसते ही आगतुक सबसे पहले रिसेशनिट से ही मुखातिब होता ह। आमतार पर रिसेशनिट के प में लडकियों को ही रखा जाता ह, परतु बहत सारे क्षे ऐसे भी ह, जहा पुष भी रिसेशनिट का काय करते ह।रिसेशनिट को उस विभाग के लोगों के बारे में जानकारी होनी चाहिए, जहा उसकी नियु हइ ह। चाहे वह कोइ दतर हो, होटल हो या कोइ भी विभाग। आमतार पर रिसेशनिट के पास फोन आते रहते ह कि अमुक आदमी ह अथवा नहीं, उसे यह सूचना देनी ह। ऐसी थिति में रिसेशनिट को वाकपटु होने के साथसाथ पों के उार लिखने का भी ज्ञान होना चाहिए। रिसेशनिट में निन तीन गुण अवय होने चाहिए
आकषक यवि
रिसेशनिट के लिए आकषक यवि का होना बहत जरी ह। सजेसवरे चेहरे को साफ कपडों में मुकराते देख आगतुक को सता होती ह। इसके विपरीत यदि कोइ रिसेशनिट साधारण शलसूरत या बदसूरत चेहरे की हो, तो आगतुक उससे ढग से बात नहीं कर पाता।
मधुर यवहार
रिसेशनिट के पास आने वाला येक य कुछ न कुछ पूछने या जानने ही आता ह। एकदम नए य से यदि शितापूवक आर अपनव भरी वाणी में बातचीत हो, तो आने वाला वय को ‘अपनेपन’ के माहाल में पाता ह। अत जहा शि आर अपनेपन से भरा यवहार आगतुक की समया को आधा कम कर देता ह, वही खा आर अशि यवहार आगतुक के मन को खि कर देता ह।
अनेक भाषाआें का ज्ञान
वज्ञानिक उति के कारण आज दूरिया कम हो गइ ह। लगभग हर देशदेश के लोगों को दूसरे देश के लोगों से काम पडता ही रहता ह। अत रिसेशनिट को हिदी तथा अगेजी के अलावा आर भी जितनी अधिक भाषाओ का ज्ञान होगा, उतनी ही उसकी कीमत बढ जाएगी। अगर रिसेशनिट आगतुक की भाषा में बात करे तो आगतुक की तबीयत खुश हो जाती ह तथा वह बात को आसानी से समझ लेता ह।
रिसेशनिट के शिक्षण हेतु वेश सबधी विज्ञापन देश के ाय सभी मुख समाचार पों मे समयसमय पर काशित होते रहते ह। भारत में रिसेशनिट के लिए हिदी तथा क्षेीय भाषा का ज्ञान तो आवयक ह ही, साथ ही आज अगेजी भाषा का ज्ञान भी अनिवाय ह। यही कारण ह कि ऐसा पाठयकम कराने वाले सथान वेश के पूव अगेजी भाषा के ज्ञान को आवयक योयता मानते ह।
छोटेछोटे होटलों या छोटे यावसायिक सथानों में रिसेशनिट की नाकरी के लिए हिदी, अगेजी तथा क्षेीय भाषा के ज्ञान के साथ ही टकण आर आकषक यवि का होना पया माना जा सकता ह। परतु बडेबडे होटलों या यावसायिक सथानों में नाकरी में वरीयता शिक्षण ा रिसेशनिट को ही मिलती ह। इस माग को यान में रखकर ‘नेशनल काउसिल फार होटल मनेजमेंट एड कटरिग टनोलाजी’ ारा देशभर के कुछ चुनिंदा सथानों में रिसेशनिट के पाठयकम की यवथा की गइ ह। इस सबधी आर अधिक जानकारी निन पते पर ा की जा सकती ह
* इटीटयूट आफ होटल मनेजमेंट, कटरिग यूटीशन, लाइबेरी एवेयू, पूसा, नइ दीि११००१२
* इटीटयूट आफ होटल मनेजमेंट, कटरिग टनोलाजी एव एलाइड यूटीशन, एटी आइ कपस, वािनगर, हदराबाद ५००००७
इन सथानों में वेश हेतु एक वेश परीक्षा आयोजित की जाती ह। वेश परीक्षा हेतु निधारित योयता इटरमीडिएट (१०+२) उाीण होना ह, बशर्ते तियोगी ने कम से कम ५० तिशत अक ा किए हों। इन सथानो में ायोगिक आर लिखित दोनों शिक्षण दिए जाते ह, जिनमें अयथियों को कमरा बुक करने का तरीका, इटरकाम की जानकारी, वागत सबधी जानकारी के अलावा भाषायी ज्ञान भी दिया जाता ह। इसके अलावा शिक्षण में गाहकों के विभि तार तरीकों, यि या अयि से निबटने का तरीका भी सिखाया जाता ह। इस कार रिसेशनिट का काम बडा रोचक मनोरजक तथा मुकराहटों से भरा ह। इस करियर में आकषक वेतन के साथसाथ बहत सारी सुविधाए भी उपलध होती ह।
अनिल कुमार
