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हेल्थ सेक्टर में कैरियर के अवसर

Swatantra Vaartha  Mon, 12 Jul 2010, IST

हेल्थ सेक्टर में कैरियर के अवसर

जनसंख्या ब़ढने के साथसाथ लोगों की लाइफस्टाइल भी बदली है और खानेकमाने की दिक्कतें भी। इसके कारण क्रॉनिक और लाइफस्टाइल डिजीज ने पैर पसारे हैं। प्रति व्यक्ति आय में ब़ढोत्तरी से लोग हेल्थकेयर में ज्यादा से ज्यादा पैसा लगा रहे हैं और वे उच्च गुणवत्ता के हेल्थकेयर प्रोफेशनल की मांग कर रहे हैं।

ब़ढता दायरा

इस क्षेत्र में प्राइवेट हेल्थकेयर प्रोवाइडर काफी आ गए हैं और इनकी संख्या ब़ढती जा रही है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में टेक्नोलॉजी इम्प्रूव हो रही है, जनसंख्या ब़ढ रही है और जलवायु परिवर्तन के कारण बीमारियों की शक्ल भी बदल रही है। एक अन्य कारण जागरुकता भी है। लोग इन्फेक्शनल कन्ट्रोल के प्रति जागरुक हैं। वे मेडिकल केयर और कंफर्ट के लिए अच्छा पैसा खर्च करने को तैयार हैं। इस कारण उच्च तकनीक और अच्छा एन्वायरनमेंट प्रदान करने वाले तमाम हॉस्पिटल्स खुल रहे हैं। लोगों की खर्च करने की क्षमता के साथसाथ कॉस्मेटिक और ऐस्थेटिक केयर की मांग भी लोगों में ब़ढ रही है। प्लास्टिक सर्जन और डर्मेेटोलॉजिस्ट की आज काफी मांग है। अब जनरल प्रैक्टिशनर्स से ज्यादा स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की ज्यादा डिमांड की जा रही है। इस इंडस्ट्री में ब़डे बदलाव की वजह तकनीक का एडवांसमेंट और चिकित्सा के क्षेत्र में नईनई खोज है। क्लीनिकल रिसर्च, ऑर्थोपैडिक्ट, कार्डियोथोरैसिक सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, आई साइकिएट्री, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, रेडियोडाग्नोसिस वगैरह एरिया मेडिकल के क्षेत्र में तेजी से ब़ढ रहे हैं।

मुख्य क्षेत्र

मेडिकल प्रैक्टिशनर

जनसंख्या ब़ढ रही है और बीमारियां भी। ऐसे में डॉक्टरों की कमी है। मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए प्री मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) आयोजित किया जाता है। इस परीक्षा में फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायोलॉजी के साथ १२वीं पास स्टूडेंट बैठ सकता है। एमबीबीएस (बैचलर डिग्री) की प़ढाई करके कोई भी व्यक्ति प्रैक्टिस कर सकता है। एमबीबीस के बाद मास्टर डिग्री (एमडी या एमएस) या स्पेशलाइजेशन किया जा सकता है। यदि हेल्थ सेक्टर में रुचि है, तो पीएमटी के अलावा पैरामेडिकल आदि में भी डिग्री या डिप्लोमा किया जा सकता है।

नर्सिंग

नर्सिंग में भी काफी संभावनाएंहै। यह महिलाआें के लिए सबसे उपयुक्त कैरियर माना जाता है। देश में तेजी से फैलते अस्पतालाेें में नर्स बनने के लिए नर्सिंग में डिप्लोमा या पाठ्‌यक्रम किया जा सकता है। कई इंस्टीट्‌यूट्‌स में इससे संबंधित कोर्स उपलब्ध हैं।

मैनेजमेंट

यदि आपके पास मैनेजमेंट स्किल है और आप हेल्थ सेक्टर में कैरियर बनाना चाहते हैं, तो हॉस्पिटल मैनेजमेंट का कोर्स करके इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं।

फार्मेसी

पीसीबी स्टूडेंट्‌स के लिए इसमें भी बेहतर कैरियर है, क्योंकि इन दिनों फार्मा से संबंधित प्रोफेशनल्स की डिमांड खूब है। यही कारण है कि देश के प्रमुख संस्थानों में इससे संबंधित कोर्स हैं। इसके लिए न्यूनतम योग्यता १२वीं है। इसमें एंट्री के लिए कुछ संस्थान प्रवेश परीक्षा, तो कुछ मेरिट पर लेते हैं। १२वीं के बाद फार्मेसी का कोर्स करके फार्मा कंपनियों में अच्छे पैकेज पर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव भी बन सकते हैं। इसमें आप बीएससी (बायो) करके भी एंट्री कर सकते हैं। कुछ वर्ष के अनुभव के बाद आप फील्ड मैनेजर, एरिया मैनेजर, जोनल मैनेजर वगैरह बन सकते हैं।

मेडिकल टूरिज्म

ग्लोबलाइजेशन के बाद से दूरियां घटती जा रही हैं और भारत के पुराज्ञान का महत्व दुनिया को पता चला है। विदेशों से लोग योगा, आयुर्वेद द्वारा स्वास्थ्य लाभ के लिए भारत आ रहे हैं। इसके अलावा चिकित्सा के क्षेत्र में एशिया में भारत प्रमुख स्थान रखता है। यही कारण है कि कम खर्च में ही बेहतर प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ उठाने के लिए देशविदेश से लोग भारत आते हैं। ऐसे लोगों को बेहतर सुविधा तभी मिल सकती है, जब संबंधित ट्रेंड प्रोफेशनल्स हों। इंडस्ट्री की मांग को देखते हुए भारत में कई संस्थान इससे संबंधित कोर्स भी करा रहे हैं। इसमें नौकरी के बाद बेहतर सैलरी के साथ ही अलगअलग संस्कृति के लोगों से मिलनेजुलने का मौका भी मिलता है। अनुभव होने पर आप विदेश भी जा सकते हैं।

फिजियोथेरेपी

आज के युग में लोग बीमारी का इलाज करने के लिए दवाइयों का प्रयोग कम से कम करना चाहते हैं, जिसके चलते फिजियोथेरेपिस्ट की मांग में इजाफा हुआ है। फिजियोथेरेपी फिजिकल थेरेपी का दूसरा नाम है।यह एक तेजी से उभरता क्षेत्र है, जिसमें बीमारियों का उपचार दवाइयों को छ़ोड व्यायाम करके किया जाता है।

रिक्रूटमेंट

इन सभी क्षेत्रों में जॉब्स के लिए केन्द्र और राज्य सरकारें समयसमय पर अपनी आवश्यकता के अनुरूप रिक्तियां निकालती रहती हैं। यदि आप सरकारी नौकरी के इच्छुक है,तो इन परीक्षाआें के माध्यम से गवर्नमेंट सेक्टर में जा सकते हैं। इसके अलावा भारत में प्राइवेट अस्पतालों का जाल बिछा हुआ है। कैरियर काउंसलर परवीन मल्होत्रा के मुताबिक, इस क्षेत्र में योग्य प्रोफेशनल्स की काफी कमी है।यदि आपके पास बेहतर स्किल और योग्यता है, तो प्राइवेट सेक्टर में बेहतर सैलरी के साथ सुनहरा भविष्य बना सकते हैं। इसके लिए यूपीएससी भी साल में एक बार कंबाइंड मेडिकल सर्विसेज एग्जाम आयोजित करता है। इसे निकालने के बाद रेलवे, केन्द्रीय स्वास्थ्य सेवाआें, ऑर्डिनेंस फैक्टरी की हेल्थ सर्विसेज और म्युनिसिपल कार्पोरेशन में डॉक्टर के रूप में चयन हो सकता है।

संभावनाएं

हमारे देश में हेल्थकेयर सर्विसेज का ब़डा नेटवर्क है, लेकिन इसमें पर्याप्त स्टाफ की काफी कमी है। एक आंक़डे के मुताबिक, यहां करीब ३९१० कम्युनिटी हेल्थ सेंटर है, २२६६९ प्राइमरी हेल्थ सेंटर और १४४९८८ सब सेंटर हैं। इन सबके बावजूद सर्जंस, ऑब्सट्रीशियन और गाइनकोलॉजिस्ट, फिजीशियंस, पीडियाट्रीशियंस व अन्य हेल्थ प्रोफेशनल्स की कमी है। संभावनाआें को देखते हुए देश के सभी ब़डे ग्रुप हॉस्टिपल्स की चेन खाेेलने के उद्देश्य से प्रवेश कर रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में २५ लाख हॉस्पिटल्स हैं, जिन्हें संभालने के लिए ब़डी संख्या में ट्रेंड प्रोफेशनल्स की जरूरत है। परवीन कहती हैं कि डॉक्टरों के लिए प्राइवेट नर्सिंग होम और पॉलीक्लीनिक्स में भी बहुत संभावनाएं हैं, वहीं जनरल प्रैक्ट्‌िशन, स्पेशलिस्ट, फार्मेसिस्ट, पैरामेडिकल के विशेषज्ञ और डेंटिस्ट अकेले या पार्टनरशिप में प्राइवेट क्लीनिक भी खोल सकते हैं। इसके अलावा यदि रिसर्च में रुचि है, तो इस क्षेत्र के दरवाजे भी आपके लिए खुले हैं। यदि आप एकेडमिक क्षेत्र में जाने के इच्छुक हैं, तो संबंधित कॉलेजों या संस्थानों में आप टीचिंग प्रोफेशन भी अपना सकते हैं।

ब्रेन ड्रेन में कमी

अब मेडिकल क्षेत्र में काफी बदलाव आ चुका है। पहले इस पर सरकारी क्षेत्र का ही नियंत्रण था। इसलिए मांग के अनुरूप ट्रेंड प्रोफेशनल नहीं मिल पाते थे। स्पेशलाइजेशन व बेहतर ट्रेनिंग के लिए उन्हें विदेश जाना प़डता था, लेकिन अब प्राइवेट हॉस्पिटल चेन्स को मेडिकल कॉलेजेज खोलने की अनुमति प्रदान करने के बाद सारी सुविधाएं यहीं उपलब्ध हो रही हैं। जिससे ब्रेन ड्रेन में कमी आई है और यहां के स्टूडेंट्‌स कम खर्च में स्टैंडर्ड शिक्षा हासिल कर रहे हैं और बेहतर जॉब पा रहे हैं।

इंस्टीट्‌यूट वाच

हालांकि हेल्थ सेक्टर से संबंधित कोर्स देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से कुछ इस प्रकार हैं

* ऑल इंडिया इंस्टीट्‌यूट ऑफ मेडिकल साइंस, नई दिल्ली ुुु रळळाीरलळप ेी ुुु रळळाीशर्वी

* मणिपाल यूनिवर्सिटी, मणिपालुुुारपळरिश्रशर्वी

* आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज, पुणे ुुुरषालपळलळप

* भारती विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, पुणे ुुुलर्र्पीींळर्शीीींळीूंळप

* महात्मा गांधी इंस्टीट्‌यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, वर्धा ुुु ासळाीरलळप

* जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्‌यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंेड रिसर्च, पॉन्डिचेरी ुुुक्षळाशीशर्वी

* क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लूरू और लुधियाना

* पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्‌यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंेड रिसर्च, चंडीग़ढ सिळाशीपळलळप

* गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली ुुुळर्रीिलळप

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