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सॉल्यूशन फिंगर टिप्स पर र

Swatantra Vaartha  Mon, 19 Jul 2010, IST

सॉल्यूशन फिंगर टिप्स पर र

एमबीए करने के बाद अब्दुल बारी ने एक रियल एस्टेट कंपनी के साथ बतौर मार्केटिंग मैनेजर, अपने करियर की शुरुआत की । अनुभव के साथ पद बढा, सैलरी बढी और साथ ही बढी जिम्मेदारियां । काम निपटाने और जिम्मेदारी निभाने में उन्होंने कोई कसर नहीं छ़ोडी, लेकिन समय के साथ १० से ७ बजे तक की रूटीन जॉब से उनका मन हटता गया । उन्होंने जॉब छ़ोड दी और इसके बाद रियल्टी सेक्टर की ही छोटी और मझोली कंपनियों को सेल्स, मार्केटिंग , पॉलिसी और स्टाफ से संबंधित कंसल्टेंसी देनी शुरू कर दी । कुछ ही महीनों में काम इतना बढ गया कि अब्दुल बारी को अपने साथ कई और फ्रोफेशनल्स ज़ोडने प़डे । रियल्टी कंसल्टेंट अविनाश केसवानी कहते हैं कि कंसल्टेंट्‌स की डिमांड आज हर क्षेत्र में तेजी से बढ रही है। कंसल्टेंसी सर्विसेज देने वाली एक्सेंचर और अर्नेस्ट एंड यंग जैसी कंपनियों में एमबीए ग्रेजुएट्‌स की खूब डिमांड है । मैनेजमेंट कंसल्टेंट्‌स के काम की एक विशेषता यह है कि इन्हें एक साथ कई तरह की कंपनियों और लोगों के साथ काम करने का मौका मिलता है, जिनकी समस्याएं और जरूरतें अलग तरह की होती हैं । अगर आप भी ऑर्गनाइजेशनल प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने में रुचि रखते हैं और रोजमर्रा की गतिविधियों के साथ समस्याआें को विश्लेषणात्मक नजरिये से देखते हैं, तो आप भी इस क्षेत्र में अपने लिए संभावनाएं तलाश सकते हैं ।

कैसे बनें कंसल्टेंट

कंसल्टेंट बनने और कंसल्टेंटसी सर्विसेज देने के लिए आपको किसी भी अच्छे संस्थान से सबसे पहले मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करनी होगी । मैनेजमेंट के अलावा इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद भी इस क्षेत्र में प्रवेश किया जा सकता है । यह कहना है रियल्टी कंसल्टेंट राकेश पोपली का । इंजीनियरिंग की डिग्री के जरिये जहां आप इस क्षेत्र में एनालिस्ट के तौर पर काम कर सकेंगे, वहीं एमबीए की डिग्री आपको एसोसिएट या फिर कंसल्टेंट के तौर पर काम करने का मौका दिलाएगी ।

अच्छे कंसल्टेंट के गुण

अच्छे कंसल्टेंट में विश्लेषणात्मक क्षमताआें का होना जरूरी है, साथ ही उसे विभिन्न इंडस्ट्रीज के ट्रेंड के बारे में भी जानकारी जरूरी है। इससे किसी खास क्षेत्र इंडस्ट्री या सेक्टर में काम करने वाली कंपनी को आ रही समस्याआें को समझने में आसानी होगी । समस्याआें को समझने के लिए उसे कंपनी के रिप्रेजेंटेटिव्स की बातों को एकाग्रचित होकर गंभीरता से सुनना होगा । इसके साथ कंसल्टेंट को अपनी पसंद के अलावा दूसरे क्षेत्रों के बारे में भी जानकारी रखनी होगी , क्योंकि संभव है कि किसी एक क्षेत्र में केवल सलाह देकर ही समस्याएं दूर हो सकें, जबकि अन्य कंपनी में उसे मार्केटिंग के साथ परिचालन में भी शरीक होना प़डे।

आय

मैनेजमेंट करने वाले फ्रोफेशनल्स यदि बतौर कंसल्टेंट किसी कंपनी के साथ ज़ुडते हैं, तो आरंभिक तौर पर उन्हें ५ से ८ लाख रुपये वार्षिक की सैलरी ऑफर की जाती है । जबकि कुछ साल के अनुभव के साथ सैलरी में भी अच्छा खासा इजाफा हो जाता है । इस क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि दस साल से अधिक के अनुभव वाले कंसल्टेंट्‌स लीडरशिप पर होते हैं, ये अपनी टीम में काम करने वाले दूसरे फ्रोफेशनल्स को समस्याएं समझने और उन्हें सुलझाने में सहायता करते हैं । कंसल्टेंसी के इन अनुभवी फ्रोफेशनल्स को कंपनियां हर महीने ढाई से पांच लाख रुपये की सैलरी देने में भी कोई हिचक महसूस नहीं करतीं ।

संस्थान इंडियन इंस्टीट्‌यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद ।

फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, साउथ कैम्पस यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली ।

एक्सएलआरआई , जमशेदपुर ।

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