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एडवेंचर स्पोट्‌र्स को बनाइये कैरियर

Swatantra Vaartha  Mon, 26 Jul 2010, IST

एडवेंचर स्पोट्‌र्स को बनाइये कैरियर

दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद राघव ने हिमाचल के एक इंस्टीट्‌यूट से माउंटेनियरिंग का बेसिक और एडवांस कोर्स किया। माउंटेनियरिंग में एकदो साल का एक्सपीरियंस लेने के बाद राघव लर्नर से एंटरप्रेन्योर बन गए। उन्होंने खुद की एडवेंचर टूरिज्म कंपनी शुरू की। अब राघव साल के बारह महीने एडवेंचर के शौकीन टूरिस्ट्‌स को ट्रैकिंग कराते हैं। असल में एडवेंचर स्पोट्‌र्स फ्यूचर का कैरियर है और युवाआें को यह खूब लुभा रहा है। विदेश की तरह अब हमारे देश में भी एडवेंचर स्पोट्‌र्स को मान्यता मिलने लगी है। अगर पह़ाडों की ऊंचाइयां मापने, जंगल में ट्रैकिंग, खुले आसमान में ग्लाइडिंग, नदी में राफ्टिंग करने को आप सिर्फ एक हॉबी ही समझते हैं, तो आप गलत हैं, क्योंकि इन्हें कैरियर के रूप में भी अपनाया जा सकता है। कॉमनवेल्थ गेम्स का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और १०० से भी कम दिन बचे हैं। उस दौरान देश में देशीविदेशी पर्यटकों की खासी हलचल देखने को मिलेगी और एडवेंचर के शौकीन टूरिस्ट्‌स हिमालय की पहा़डयों या हम्पी की सख्त चट्टानों या फिर गोवा के बीच का रुख जरूर करेंगे और उनका ये शौक पूरा कराएंगे प्रोफेशनल एडवेंचर स्पेशलिस्ट। भारत की डेमोग्राफी स्थिति भी एडवेंचर टूरिज्म के लिए मुफीद है, क्योंकि यहां बर्फ से ढके पह़ाड भी हैं, तो लद्दाख जैसा कोल्ड डेजर्ट भी। यहां नदियां और घने जंगल भी हैं, तो स्कूबा डाइविंग के लिए गोवा का बीच भी। इतनी सारी विविधताएं एक एडवेंचर टूरिस्ट को लुभाने के लिए काफी हैं।

माउंटेनियरिंग

एडवेंचर स्पोट्‌र्स में सबसे पॉपुलर है माउंटेनियरिंग। इसके शौकीनों की कोई कमी नहीं है। एवरेस्ट पर पहुंचने वाली पहली महिला पर्वतारोही बिछेन्द्री पाल और आज के पर्वतारोही अर्जुन ने माउंटेनियरिंग को नई दिशा दी है। अगर आप फिजिकली फिट हैं और बर्फीली चोटियों और चट्‌टानों पर च़ढने का हौसला रखते हैं, तो माउंटेनियिरंग कैरियर को आप चुन सकते हैं। हालांकि देश के काफी संस्थानों में माउंटेनियरिंग का कोर्स कराया जाता है, लेकिन उत्तरकाशी का नेहरू इंस्टीट्‌यूट ऑफ माउंटेनियरिंग ट्रैनिंग में अव्वल है। देश की पहली महिला पर्वतारोही बिछेन्द्री पाल, दो बार एवरेस्ट पर अपना परचम लहराने वाली संतोष यादव और देश के सबसे छोटे माउंटेनियर अर्जुन भी यहीं से ट्रेनिंग ले चुके हैं और यही वजह है कि इसे इंडियन माउंटेनियिरंग का मक्का भी कहा जाता है। निम के प्रिंसिपल कर्नल आई एस थापा के मुताबिक माउंटेनियरिंग के बेसिक कोर्स के लिए कैंडिडेट का फिजिकली फिट होना जरूरी है। साथ ही उसकी उम्र १७ से ३५ साल के बीच हो। वहीं एडवांस कोर्स के लिए उम्र १८ से ४० साल के बीच और ए ग्रेड के साथ माउंटेनियरिंग का बेसिक कोर्स किया हो। यहां २६ दिन का बेसिक और २८ दिन का एडवांस कोर्स कराया जाता है।

जॉब ऑप्शनः माउंटेनियरिंग का कोर्स करने के बाद आप ट्रेकिंग या माउंटेन गाइड बन सकते हैं। एक प्रशिक्षित ट्रेनर १२ हजार से लेकर ७० हजार रुपये महीने तक कमा सकता है। चाहें, तो किसी संस्थान से सर्च एंड रेस्कयू कोर्स भी कर सकते हैं, जिसका आपको अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। आजकल इस क्षेत्र में जीपीएस ट्रेकिंग और मैप रीडिंग की जानकारी होना भी बेहद जरूरी है। वहीं राघव की तरह खुद के एंडवेंचर कैंप्स भी आर्गेनाइज कर सकते हैं।

ट्रेनिंग फैसिलिटेटर्स और ट्रेनर्स

कंपनियों के एचआर डिपार्टमेंट आउट बाउंड ट्रेनिंग को ट्रेनिंग का सबसे बेहतरीन जरिया मानते हैं साथ ही यह काफी कारगर एंप्लॉई एंगेजमेंट मॉडल भी है। कंपनियों को अकसर आउटबाउंड ट्रेनिंग प्रोग्राम्स के लिए काफी प्रशिक्षित और योग्य एंडवेंचर प्रोफेशनल्स की जरूरत रहती हैं। फैसिलिटेटर और ट्रेनर बनने के लिए बेहतरीन स्किल्स के साथसाथ अतिरिक्त योग्यता होना भी जरूरी है। एक फैसिलिटेटर और ट्रेनर की मासिक आय १५ हजार से लाख तक हो सकती है। इसके लिए विभिन्न संस्थानों में एडवेंचर कोर्स कराए जाते हैं।

स्कूबा डाइविंग

आजकल लोगों में समुद्र के प्रति दिलचस्पी तेजी से ब़ढने लगी है। लोग सी लाइफ को नजदीक से देखना चाहते हैं। फिल्मों में भी स्कूबा का इस्तेमाल ब़डे पैमाने पर होने लगा है। फिल्म ‘ब्लू’ में भी अक्षय कुमार, संजय दत्त और लारा दत्ता समंदर की गहराइयों में अठखेलियां यानी स्कूबा डाइविंग करते नजर आए थे। अगर आप साहसी हैं और पानी से खेलने में आपको मजा आता है, तो आपके लिए यह फील्ड गोल्डन अपॉरच्युनिटी साबित हो सकता है।

जॉब ऑप्शन ः स्कूबा डाइविंग की ट्रेनिंग लेने वालों के लिए इस फील्ड में जॉब के ढेरों ऑप्शंस हैं। खासकर कोस्टल एरिया में देशदुनिया से लाखों लोग आते हैं और यहां अंडर वाटर टूरिज्म को ब़ढावा देने के लिए कंपनियां स्कूबा इंस्ट्रक्टर को हायर करती हैं। वैसे, इस फील्ड में आप कमर्शियल ड्राइवर, डाइविंग इंस्ट्रक्टर, ब़डीब़डी तेल कंपनियां में कंस्ट्रक्शन और रिपेयर डाइवर्स के रूप में जॉब कर सकते हैं। इस फील्ड में सैलरी भी काफी अच्छी होती है। शुरुआती दौर में अच्छे इंस्ट्रक्टर की सैलरी प्रति माह ३० हजार रुपये के करीब होती है।इसके अलावाइंसेंटिव भी अलग से मिलता है। दो से तीन साल के अनुभव के बाद आप ५० से ७० हजार रुपये प्रति माह आराम से कमा सकते हैं।

रॉफ्टिंग और एयरो स्पोट्‌र्स स्पेशलिस्ट

अब रॉफ्टिंग सिर्फ मौजमस्ती के लिए ही नहीं रह गया है। कई साहसी युवाआें ने इसे बतौर कैरियर अपनाना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि भारत मेें रॉफ्टिंग अब काफी पॉपुलर हो रहा है। रॉफ्टिंग का कोर्स कराने वाले संस्थान रॉफ्टिंग में सर्टिफिकेट कोर्स संचालित करते हैं। रॉफ्टिंग की ट्रेनिंग के दौरान रॉफ्टिंग इक्विपमेंट्‌स के इस्तेमाल करने का तरीका सिखाया जाता है। साथ ही ओवरनाइट रिवर ट्रिपनदी का बहाव, गहराई, ढलान और उसके खतरों की भी विस्तार से जानकारी दी जाती है। भारत में रॉफिंटग के कोर्स की अवधि छह माह होती है। वहीं देश में पैराग्लाइडिंग का क्रेज भी जबरदस्त ब़ढ रहा है। यही वजह है कि आज देश के हर हिल स्टेशन में पैराग्लाइडिंग कराई जाती है। एक अच्छा पैराग्लाइडर इंस्ट्रक्टर बनने के फिजिकली फिट होने के साथसाथ कई घंटों की थकान का अनुभव होना जरूरी है और पी थ्री लेवल (इंटरमीडियेट)। इसके अलावा कुमाऊं मंडल विकास निगम भी पैराग्लाइडिंग ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन करता है।

जॉब ऑप्शनः रॉफ्टिंग का कोर्स करने के बाद आप रॉफ्टिंग गाइड बन सकते हैं। चाहें तो अपना राफ्टिंग ट्रेनिंग स्कूल खोल सकते हैं। साहसी व एडवेंचर पसंद युवाआें को नदी में रॉफ्टिंग कराकर भी अच्छा खासा पैसा कमा सकते हैं। वहीं पैराग्लाइडिंग कोर्स करने के बाद आप अपने ट्रेनिंग स्कूल या एडवेंचर ग्रुप्स या ट्रेवेलिंग एजेंसी से ज़ुड कर सैलानियों को पैराग्लाइडिंग करा सकते हैं।

कैसे करें शुरुआत?

इस फील्ड में एंट्री के लिए आपका एडवेंचर लवर होना जरूरी है, साथ ही स्पोट्‌र्स को आगे ब़ढाने का स्पिरिट का होना जरूरी है। बतौर ट्रेनर या आर्गेनाइजर आप अपने कैरियर की शुरुआत कर सकते हैं। इसके लिए स्पोर्टिंग टैलेंट और मैनेजमेंट की काबिलियत होना जरूरी है। वैसे ऑउटडोर स्पोट्‌र्स का ज्यादातर काम घूमनेफिरने के दौरान ही सीखा जाता है। ट्रेनर्स का काम एडवेंचर में लोगों की दिलचस्पी ब़ढाना है। इसके अलावा संकट के समय रेस्क्यू ऑपरेशन की ट्रेनिंग इस फील्ड के लिए एडिशनल स्किल्स साबित हो सकती है।

कोर्सेज करने के लिए संस्थान:

* माउंटेनियरिंग नेहरु इंस्टीट्‌यूट ऑफ माउंटेनियरिंग, उत्तरकाशी । ुुुपळाळपवळरेीस

* अटल बिहारी इंस्टीट्‌यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोट्‌र्स, मनाली।ुुुरवर्शींर्पीीींश हळारश्ररूरेीस

* हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्‌यूट, दार्जिलिंग।ुुुहळारश्ररूरर्पाेीपींरळपशशीळपस ळपीींर्ळीीींंश लो

* जवाहर इंस्टीट्‌यूट ऑफ माउंटेनियरिंग, पहलगाम।

स्कूबा डाइविंग

* प्लेनेट स्कूबा इंडिया, बेंगलुरु। ुुु श्रिरपशीींर्लीलरळपवळरलो

* बाराकूडा डाइविंग इंडिया, गोवा। ुुुलरीीरर्लीवरवळर्ळींपसलो

* ठाणे स्कूबा डाइविंग क्लब, ठाणे, महाराष्ट्र,

ुुुरर्लीलळपवळरलो

* लाकाडाइव, मुंबई एवं बैंगलुरु।

ुुुश्ररलरवळशीलो

रॉफ्टिंग

* वॉटर स्पोट्‌र्स सेंटर, बिलासपुर।

* नेशनल इंस्टीट्‌यूट ऑफ वाटर स्पोट्‌र्स पणजी

ुुुपळुीपळलळप

* काटाबेटिक एंडवेंचर स्पोट्‌र्स, ऋषिकेश।

ुुुज्ञरींरलरींळललेळप

* रीजनल वाटर्स स्पोट्‌र्स सेंटर, कांग़डा।

* हिमालयन रिवर रनर्स, नई दिल्ली।

ुुुहीीळपवळरलो

पैरा ग्लाइडिंग

* बंगलौर माउंटेनियरिंग क्लब, बंगलुरु।

ुुुलालळपवळरेीस/

* अटल बिहारी इंस्टीट्‌यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोट्‌र्स, मनाली। ुुुरलर्शींर्पीीींशहळारश्ररूरेीस

* निर्वाना एडवेंचर्स, पुणे। ुुुषश्रूपळीर्रींपरलो

* पीजी गुरुकुल, मनाली।

ुुुसिळपवळरपशीं

स्कीइंग

* विंटर स्पोट्‌र्स स्कीइंग सेंटर, कुल्लू।

*हाई एल्टीट्‌यूड ट्रेकिंग एंड स्कीइंग सेंटर, नारकंडा।

* इंडियन स्कीइंग इंड माउंटेनियरिंग इंस्टीट्‌यूट, गुलमर्ग। ुुुर्सीश्रारीसेीस

* अटल बिहारी इंस्टीट्‌यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोट्‌र्स।ुुुरलर्शींर्पीीींशहळारश्ररूरेीस

* एडवेंचर स्पोट्‌र्स, सेंटर, हटकोटी, शिमला।

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