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जेसी आपकी सोच, वेसे ही आप

swatantravaartha  Mon, 11 Jan 2010, IST

जेसी आपकी सोच, वेसे ही आप

हम दूसरों के बारे में महसूस करते है उस वाइब कहते है । यह बात सब जानते है , लेकिन या कोइ इस तथाकथित वाइब/एहसास की जड में गया ह? अब आप यह सोच सकते ह कि इसकी जरत नहीं है , लेकिन यहीं तो आप गलती कर रहे है । यह छोटासा शद हमारी बाहरी दुनिया को अछे या बुरे के लिए बदल देता ह।

या कभी आपने सोचा कि ऐसा यों होता है ? जब आप पहली बार किसी से मिलते है , तो आप उसे तुरत पसद करने लगते ह या फारन ही उसे नापसद कर देते ह? या कभी आपने सोचा कि आप एक खास किम के लोगों को यों आकषित करते है । जबकि वातव मे आप उनसे विपरीत लोगों का यान आकषित करना चाहते ह?

खर, उार इसका आपके दिल की गहराइयों में छुपा ह। बारबार हम जानते आर सुनते ह, जो हमारे जीवन के लिए जिमेदार ह आर इससे भी खराब बात यह होती ह कि जब कोइ उार नहीं आता तो हम अपने कम को दोष देने लगते है , लेकिन कम से कम एक बार कोशिश करके अधिक वज्ञानिक काेिण अपनाए।

अपने जीवन का चाज आप खुद यों नहीं ले लेते। तरीका आसान है । सबसे पहले अहसास के नियमों को समझे। सिफ एक बात जहन में रखें कि जब भी आप इन तकनीकों को आजमाए कपना करें कि आपके विचार फल रहे है । जसे जब आपकी ऊगलिया तबला बजाती ह आर वनि चारों तरफ फल जाती ह। इस फले हए सगीत को हर कोइ सुनता ह। ऐसे ही आपके दिमाग से निकलने वाला हर विचार हर कोइ सुने। वह फल दूसरे के दिल को छूने के लिए।

ऐसे वातव में हो रहा ह या नहीं, इसे भी जानने का एक तरीका है । एक पल के लिए उसके बारे में सोचो, गहराइ में जाओ आर योग करो। एक छोटासा ककर पानी में फेंके, एक कटोरे में भरा पानी भी काफी है , लेकिन यह सुनिचित कर लें कि ककर फेंकने से पहले पानी शात ह, थिर ह आर फिर आप देखेंगे कि एक छोटासा ककर एक के बाद कितनी गोल लहरें उप करता है ।

ये लहरें बाहर की तरफ जाती है , न? ऐसे ही अहसास काम करता ह। एक छोटासा विचार जब शात मन में फेंका जाता ह, तो उसकी लहरें बाहर की ओर निकलती ह आर उसे पश कर जाती ह जो भी उसके दायरे में आता ह। ये सभी लहरें हमारे जीवन को भावित करती ह।

ये लहरे किस तरह से भावित करती है ? यह इस बात पर निभर करता कि विचार का ? या वह यार भरा विचार था? या अहसास या गुसा या ठुकराना, या विचार शातिपूण था? हमारी अनगिनत भावनाए । हर बार एक अलग किम का विचार हमें आता ह, लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि जो हम बाहर भेज रहे ह वही हमारी वातविकता है ।

जब हम अदर से शात होते ह तो हम शातिपूण एहसास या लहरें बाहर भेजते ह। जब हम गुसे में होते है , तो लहरें भी गुसे से भरी होती ह। इहें ही आपके आसपास के लोग गहण कर लेते ह आर उनकी तिकिया वसी होगी जसी आपके एहसास के बारे में ये महसूस करते है ।

इसलिए सही किम के एहसास या तरगें बाहर भेजने के लिए आपको फोकस विकसित करना होगा आर अपने अदर शाति भी कायम करनी होगी। मसलन, जब आप गुसे मे हों तो बेहतर ह कि बोड मीटिंग न बुलाए। जब आप अपनेे सहकमियों को कुछ बात समझाने का यास कर रहे हों उस समय गुसे भरी तरगें उन तक पहचाना ठीक नहीं आर अगर आप ऐसा करेंगे तो दिन के आखिर तक सारा गुसा आप पर ही लाट रहा होगा।

सच तो यह ह कि हम जो कुछ ाेजेट करते ह वही हमारा जीवन ह। ेम जरत ह, इसलिए अपने अदनी हिसे को ेम से भर लो। अपने अदर शाति थापित करो। यान रहे कि जो आप सोचते ह वही आप बन जाते ह।

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