बनें तकनीक विशेषज्ञ
वैज्ञानिक प्रगति और उदारीकरण के बाद कैरियर के अनेक क्षेत्र उभर कर सामने आए हैं। अब यह आप पर निर्भर करता है कि आपके लिए कौन सा क्षेत्र बेहतर हो सकता है। इन दिनों जीआईएस से संबंधित प्रोफेशनल्स की काफी मांग है। आप इससे संबंधित कोर्स करके तकनीक के इस ब़ढते बाजार में कैरियर की बुलंदियों को छू सकते हैं, क्योंकि वर्तमान जरूरतों को देखते हुए पूरी दुनिया में यह सेक्टर तेजी से आगे ब़ढ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष २०१०११ तक भारत में जीआईएस मार्केट ३००० कऱोड रुपये तक पहुंच जाने की उम्मीद है।
क्या है जीआईएस
जीआईएस एक ऐसी तकनीक है, जिसके तहत विभिन्न एडवांस सॉफ्टवेयर्स की मदद से टारगेट एरिया की मैपिंग की जाती है। खासकर इस तकनीक का इस्तेमाल अर्थ साइंस, एग्रिकल्चर, डिफेंस,न्यूक्लियर साइंस, आर्किटेक्चर, टाउन प्लानर, मैपिंग, मोबाइल आदि क्षेत्र में खूब हो रहा है। इसके लिए सेटेलाइट की भी मदद ली जाती है।
जीआईएस का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां अपनी कार्यप्रणाली के हिसाब से कुछ खास तरह की जीआईएस टेक्निक्स, जैसेआर्कइंफो,ऑटोकैड मैप, मैपइंफो, जिओमीडिया,सीएआरआईएसजीआईएस,सीआईसीएडी, आर्कव्यू आदि का इस्तेमाल कर रही हैं।
स्पेशलाइज्ड एरिया
यदि आप इस कोर्स में दाखिल लेने के इच्छुक है, तो आपके मन में यह जरूर आ रहा होगा कि किस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद बेहतर कैरियर बनाया जा सकता है। विशेषज्ञता वाले क्षेत्र हैंः
* जिओग्राफिक इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी
* फोटोग्रामैट्री
* जीआईएस ऐप्लिकेशन
*जीआईए डेवलपमेंट
*जिओस्टेटिस्टिक
*जीआईएस प्रोजेक्ट डेवलपमेंट
* वेबजीआईएस
इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए आप दो से छह माह की अवधि वाले कोर्स में दाखिला ले सकते हैं।
उपलब्ध कोर्स
देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में जीआईएस से संबंधित कोर्स उपलब्ध हैं। इस क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ जिओइन्फॉर्मेटिक्स एंड रिमोट सेंसिंग के अंतर्गत आने वाले इंस्टीट्यूट सर्टिफिकेट इन जीआईएस एंड आरएस, पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट इन जीआईएस प्रोग्रामिंग कोर्स आदि उपलब्ध है। आईआईटी, रुडकी और आईआईटी, कानपुर से रिमोट सेंसिंग और जिओ इन्फॉर्मेटिक में ट्रेनिंग कोर्स और पीएचडी कर सकते हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (देहरादून) में जीआईएस से संबंधित एमटेक, एमएससी, पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा, सर्टिफिकेट आदि कोर्स उपलब्ध हैं। बुंंदेलखंड यूनिवर्सिटी से भी दो वर्षीय एमएससी कोर्र्स (जीआईएस एंड रिमोट सेंसिंग) में दाखिला लिया जा सकता है। जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से भी रिमोट सेंसिंग और जीआईएस ऐप्लिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कर सकते हैं। इसके अलावा, सिम्बायोसिस इंस्टीटयूट ऑफ जिओइन्फॉर्मेटिक्स, पुणे से जिओइन्फॉर्मेटिक्स में दो वर्षीय मास्टर डिग्री कर सकते हैं।
योग्यता
जिओलॉजी,अप्लॉयड जिओलॉजी, अर्थ साइंस, जिओग्राफी, जिओसाइंस आदि विषयों से ग्रेजुएशन (बीए, बीएससी या बीई/बीटेक) पूरा करने वाले स्टूडेंट्स जीआईएस से संबंधित कोसा] मेें प्रवेश ले सकते हैं।
फ्यूचर प्रोस्पेक्ट्स
आज पब्लिक सेक्टर के साथसाथ निजी सेक्टर की कंपनियों में भी जीआईएस कोर्स कर चुके छात्रों के लिए भरपूर अवसर हैं। यदि पब्लिक सेक्टर की बात करें, तो इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो), नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी (एनआरएसए) नेशनल इन्फॉर्मेटिक सेंटर (एनआईसी),स्पेस एप्लिकेशन सेंटर, अर्बन डेवलपमेंट अथोरिटी, म्युनिसिपल बॉडीज आदि में कैरियर की बेहतर संभावनाएं हैं। इसके अलावा, नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट, इमरजेंसी मैनेजमेंट, मिलिट्री कमांड, ट्रांसर्पोटेशन मैनेजमेंट,सोशियो इकोनॉमिक डेवलपमेंट बिजनेस एप्लिकेशन आदि क्षेत्रों में भी कैरियर के विकल्प तलाशे जा सकते हैं।
इंस्टीट्यूट वॉच
* इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, देहरादून (जीआईएस कोर्सः एमटेक,एमएससी, पोस्ट, ग्रेजुएट डिप्लोमा,सर्टिफिकेट और रिमोट सेंसिंग)
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* इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, उप्र (पीजी डिप्लोमा कोर्स इन जीआईएस)
ुुरश्रश्रर्वीपळर्रींलळप
* बिडला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची (एमएससी जिओइनफॉर्मेटिक्स, एमटेक)
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* इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी,रुडकी (ट्रेनिंग एंड पीएचडी कोर्स इन रिमोट सेंसिंग एंड जिओइन्फॉर्मेेटिक)
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